Jharkhand News : बीएसएल के इंजीनियरों और टेक्नीशियनों की टीम ने ऐसे रोकी पानी की बर्बादी

Jharkhand News, Bokaro News, बोकारो (सुनील तिवारी) : बीएसएल के इंजीनियर्स और तकनीशियनों की टीम ने नगर जलापूर्ति के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में लगे लगभग पचास साल पुराने रशियन मशरूम वाल्व में लीकेज के कारण प्रतिदिन बर्बाद हो रहे हजारों गैलन पानी की बचत करने में सफलता पायी है. फलस्वरूप, बीएसएल को पानी की बर्बादी से होने वाली राजस्व की बचत भी हुई है. बोकारो टाउनशिप क्षेत्र में जलापूर्ति की प्रक्रिया में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में लगे इन 12 रशियन मशरूम वाल्व की अहम भूमिका होती है.
Jharkhand News, Bokaro News, बोकारो (सुनील तिवारी) : बीएसएल के इंजीनियर्स और तकनीशियनों की टीम ने नगर जलापूर्ति के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में लगे लगभग पचास साल पुराने रशियन मशरूम वाल्व में लीकेज के कारण प्रतिदिन बर्बाद हो रहे हजारों गैलन पानी की बचत करने में सफलता पायी है. फलस्वरूप, बीएसएल को पानी की बर्बादी से होने वाली राजस्व की बचत भी हुई है. बोकारो टाउनशिप क्षेत्र में जलापूर्ति की प्रक्रिया में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में लगे इन 12 रशियन मशरूम वाल्व की अहम भूमिका होती है.
वाल्व के पुराना होने के कारण इसमें से लगातार रिसाव होना शुरू हो गया था, जिससे बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी हो रही थी. शुरुआत में इस वाल्व को बदलने के लिए बाहरी विशेषज्ञों को आमंत्रित किया. लेकिन, वाल्व की जटिल डिजाइन व अन्य तकनीकी जटिलताओं के कारण बाहरी विशेषज्ञों ने इस कार्य को स्वीकार करने में अपनी असमर्थता जतायी. सामान आकार व डिजाइन के मशरूम वाल्व की उपलब्धता बाजार में भी नहीं थी.
पानी की बर्बादी रोकने के लिए उप महाप्रबंधक (जलापूर्ति-नगर सेवा) एके सिंह की पहल पर महाप्रबंधक (स्ट्रक्चरल शॉप) व पीपीएस जेएन हंसदा, सहायक महाप्रबंधक (मैकेनिकल) दिनेश पुनिया, सहायक महाप्रबंधक (मेकेनिकल शॉप) जीबी साहू, प्रबंधक (प्लांट डिजाइन) नीरज कुमार, प्रबंधक मयंक आकाश व नगर जलापूर्ति के सदस्यों की टीम ने इस समस्या के समाधान का निर्णय लिया.
टीम के सदस्यों ने सर्व प्रथम पुराने वाल्व की डिजाइन का आकलन किया. इसका पुन: निर्माण आतंरिक संसाधनों से हीं करने का फैसला लिया. सभी तकनीकी जटिलताओं का अध्ययन करने के बाद वाल्व के डिजाइन में कुछ बदलाव किये गये. उसके बाद प्लांट के स्टील फाउन्ड्री, मशीन शॉप व स्ट्रक्चरल शॉप में इसका निर्माण किया गया. शुरू में ट्रायल के तौर पर एक मोडिफाइड वाल्व को पुराने वाल्व की जगह रिप्लेस किया गया.
ट्रायल सफल होने पर क्रमबद्ध तरीके से शेष 11 वाल्व को भी रिप्लेस किया गया. वाल्व रिप्लेस हो जाने के बाद पानी की बर्बादी पर अंकुश लगाने में मदद मिली है. इस सफलता से जलापूर्ति विभाग की टीम का मनोबल भी बढ़ा है. उल्लेखनीय है कि नगर सेवा का जलापूर्ति विभाग तेनुघाट बांध से नहर के माध्यम से प्रतिदिन 16-17 मिलियन गैलन पानी की आपूर्ति करता है. पानी को केमिकल डोजिंग, क्लोरीनेशन, मिक्सिंग चैंबर आदि कई प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद टाउनशिप में घरों तक पहुंचता है. इसकी गुणवत्ता भी तय मानकों के अनुरूप काफी उच्च स्तर की है.
Posted By : Guru Swarup Mishra
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