झारखंड में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए ई-पास लेने में परेशानी, श्रद्धालुओं को ऐसे कराया जा रहा दर्शन

अव्यवस्था व हंगामे की स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए प्रशासन ने गुरुवार सुबह से ही आये भक्तों को कोरोना नियमों का पालन कराते हुए पूजा कराने की व्यवस्था जारी रखी. सुबह से शाम चार बजे तक सभी भक्तों को मानसरोवर फुट ओवरब्रिज से कतारबद्ध तरीके से जलार्पण कराने की व्यवस्था जारी रही.
Jharkhand News, देवघर न्यूज : बाबा मंदिर में दर्शन-पूजा के लिए जारी किया गया दूसरा लिंक भी कारगर नहीं दिख रहा है. इसमें कई खामियां हैं. यही वजह है कि अव्यवस्था से बचने के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से सभी भक्तों को प्रवेश दिया जा रहा है. गुरुवार से दर्शन डॉट बाबाधाम डॉट ओआरजी वेबसाइट का लिंक ई-पास के लिए जारी किया गया था. इसका लिंक जारी होते ही एक सप्ताह तक स्लॉट बुक भी हो गया, लेकिन ई-पास का प्रिंट नहीं निकलने के कारण परेशानी हो रही है.
किसी तरह की अव्यवस्था व हंगामे की स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए प्रशासन ने गुरुवार सुबह से ही आये भक्तों को कोरोना नियमों का पालन कराते हुए पूजा कराने की व्यवस्था को जारी रखा. सुबह से शाम चार बजे तक आये सभी भक्तों को मानसरोवर फुट ओवरब्रिज से कतारबद्ध तरीके से जलार्पण कराने की व्यवस्था जारी रही. वहीं मानसरोवर इंट्री प्वांइट पर तैनात अधिकारी से ई-पास के बारे में पूछने पर बताया कि बुकिंग तो एक सप्ताह तक हो गयी है, लेकिन किस-किस की बुकिंग हुई और कितने बजे के लिए हुआ, इसका प्रिंट निकालने का वेबसाइट में ऑप्शन ही नहीं है. इस कारण ई-पास की जांच कर प्रवेश कराना संभव नहीं है.
ऐसे में सभी भक्तों को कतारबद्ध तरीके से मास्क का उपयोग करते हुए पूजा कराने का निर्देश प्राप्त हुआ. प्राप्त निर्देश के आलोक में भक्तों को समय अंतराल से कतारबद्ध तरीके से सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए पूजा कराने की व्यवस्था को जारी रखा गया है. बताते चलें कि बाबा मंदिर हर घंटे एक सौ भक्तों को भी प्रवेश की अनुमति देने का निर्देश जारी किया गया है.
आश्विन मास कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि पर गुरुवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पुजारी विनोद झा ने दैनिक पूजा संपन्न करायी. मंदिर का पट तय समय सुबह चार बजे खुलने के बाद पुजारी ने सबसे पहले मां काली की दैनिक पूजा संपन्न की. उसके बाद बाबा मंदिर का पट खोला गया. गर्भ गृह में प्रवेश करने के बाद पुजारी ने कांचा जल की परंपरा प्रारंभ की. इसके बाद करीब 45 मिनट तक बाबा भोलेनाथ की दैनिक पूजा की गयी. वहीं करीब साढ़े छह बजे से आम भक्तों को मंदिर में प्रवेश कराने की व्यवस्था को शुरू की गयी, जो कि पट बंद होने तक जारी रही. इस दौरान पट बंद होने तक करीब आठ हजार भक्तों ने बाबा पर जलार्पण कर मंगलकामना की़
Posted By : Guru Swarup Mishra
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