Bokaro News : दशकों बाद शुरू नहीं सकी डीआरएंडआरडी परियोजना

Updated at : 06 Jan 2026 11:51 PM (IST)
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Bokaro News : दशकों बाद शुरू नहीं सकी डीआरएंडआरडी परियोजना

Bokaro News : बेरमो में सीसीएल की डीआरएंडआरडी परियोजना दशकों बाद भी शुरू नहीं हो सकी.

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बेरमो में सीसीएल की डीआरएंडआरडी (दामोदर नदी एवं रेलवे विपथन) परियोजना दशकों बाद भी शुरू नहीं हो सकी. इस परियोजना के लिए तीन-चार दशक पूर्व जमीन अधिग्रहीत की गयी और इसके लिए 631 विस्थापितों को नौकरी दी गयी. करोड़ों रुपया भी भूमि अधिग्रहण में फंस गया. अभी भी चार सौ से अधिक विस्थापित नौकरी का दावा कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार डीआरएंडआरडी परियोजना के लिए वर्ष 1981 में जमीन अधिग्रहण के लिए पहला नोटिफिकेशन हुआ. दूसरा नोटिफिकेशन 1983 व तीसरा 1985 में हुआ. परियोजना के लिए पेटरवार प्रखंड के चलकरी, झुंझको, खेतको, अंगवाली, खेदो, पिछरी और बेरमो प्रखंड के डोरी, घुटियाटांड़, जरीडीह आदि गांवों में 6436 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया. भूमि अर्जन के बाद रैयतों को सीसीएल की ओर से करोड़ों रुपये का मुआवजा भी दिया गया.

क्या थी योजना

गोमो बरकाकाना रेलखंड के बीच फुसरो रेलवे स्टेशन से अमलो हॉल्ट की रेल लाइन को मोड़ कर जरीडीह बाजार होते हुए सीधे जारंगडीह स्टेशन की क्रॉसिंग में मिलाने की योजना तैयार की गयी थी. इसके लिए जारंगडीह स्टेशन को जरीडीह बस्ती तथा बेरमो स्टेशन को घुटियाटांड़ ले जाने का प्रस्ताव भी था. दामोदर नदी की धारा को खेतको बस्ती से मोड़ कर चलकरी होते हुए अंगवाली की दिशा में मोड़ने का प्रारूप तैयार किया गया था. इस कवायद के बाद करीब 6436 एकड़ के भूखंड में बेशकीमती प्राइम कोकिंग कोल के खनन के लिए परियोजना शुरू करने की बात कही गयी थी. इसी वजह से इस परियोजना का नाम दामोदर नदी व रेल विपथन पड़ा.

वर्ष 1981 में जब परियोजना का डीपीआर तैयार की गयी, तब इसकी लागत 200 करोड़ रुपये निर्धारित की गयी. केंद्रीय बजट में इसका प्रावधान नहीं होने से यह परियोजना ऐसी लटकी कि चार दशक बाद भी यह शुरू नहीं हो पायी. कई बार परियोजना को चालू करने को लेकर सीसीएल ने ग्लोबल टेंडर भी कराया. बाद में सीसीएल प्रबंधन ने डीआरएंडआरडी परियोजना के एक पैच से सालाना चार मिलियन टन कोयला उत्पादन करने की पहल शुरू की. बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया. परियोजना को चालू करने और लंबित नौकरी की मांग को लेकर विस्थापितों ने कई बार आंदोलन किया. आंदोलन के क्रम में वर्ष 1985 में बेरमो अनुमंडल विस्थापित संघर्ष समिति बनी.

परियोजना में है 14 सौ मिलियन टन प्राइम कोकिंग कोल

डीआरएंडआरडी परियोजना में लगभग 14 सौ मिलियन टन प्राइम कोकिंग कोयला है. परियोजना को लेकर रेलवे विपथन के तहत घुटियाटांड़, चलकरी व जारगंडीह स्टेशन के निकट करोड़ों की लागत से तीन बड़े-बड़े रेलवे पुल का निर्माण कराया गया था. नदी विपथन के तहत चैनल कटिंग का भी काम किया गया. चलकरी झुंझको होते हुए अंगवाली तक सड़क का निर्माण भी वर्षों पहले कराया गया था.

सीएमडी ने कही थी रिवाइज पीआर की बात

पिछले वर्ष बेरमो के दौरे पर आये सीसीएल के सीएमडी निलेंदू कुमार सिंह ने कहा था कि डीआरएंडआरडी परियोजना के तहत अब छोटे-छोटे पैच के बजाय वृहद पैमाने पर कोयला उत्पादन किये जाने की योजना है. इसके लिए रिवाइज पीआर बनायी जा रही है. इस परियोजना से उत्पादन शुरु करने के लिए कंपनी की सोच है कि आने वाले 15-20 वर्षो तक यहां उत्पादन में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो. देश में वर्ष 2030-32 तक स्टील उत्पादन के लिए 100 मिलियन टन कोकिंग कोल की जरूरत पड़ेगी.

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JANAK SINGH CHOUDHARY

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