बोकारो स्टील सिटी के UPHC की दुर्दशा: 4 महीने से इंटरनेट ठप, टेटनस वैक्सीन तक नहीं

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Bokaro UPHC की जर्जर स्थिति

Bokaro UPHC: बोकारो स्टील सिटी की झोपड़ी कॉलोनी में स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) 11 साल बाद भी बदहाल है. इंटरनेट ठप होने और डिलीवरी रूम न होने से हजारों मरीज परेशान हैं. पढ़ें, पूरी रिपोर्ट.

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बोकारो से धर्मनाथ कुमार की रिपोर्ट

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Bokaro UPHC, बोकारो : बोकारो स्टील सिटी (BSL) के झोपड़ी कॉलोनी क्षेत्र के लोगों को उनके घर के पास ही बेहतर और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 30 जनवरी 2015 को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) की शुरुआत की गई थी. लेकिन स्थापना के 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह स्वास्थ्य केंद्र आज बुनियादी सुविधाओं के घोर अभाव से जूझ रहा है. स्थिति इस कदर गंभीर हो चुकी है कि हजारों परिवारों के इलाज का जिम्मा संभालने वाला यह सरकारी केंद्र खुद प्रशासनिक उदासीनता और बदहाली का शिकार बन गया है. यह स्वास्थ्य केंद्र रोजाना सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक संचालित होता है, जहां डॉ. सतेंद्र कुमार (जनरल फिजीशियन) के नेतृत्व में फार्मासिस्ट सुरेंद्र कुमार, एएनएम निशा होदा, लैब टेक्नीशियन गोविंद कुमार महतो, काउंसलर विनीता और सहयोगी दिलीप कुमार प्रमाणिक सीमित संसाधनों और अभावों के बीच भी मरीजों को बेहतर इलाज देने की जद्दोजहद कर रहे हैं.

चारों तरफ की बस्तियों का एकमात्र सहारा

स्वास्थ्य केंद्र की टीम और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केंद्र सिर्फ झोपड़ी कॉलोनी ही नहीं, बल्कि बीएसएल एलएच, आजाद नगर, रितुडीह, जोशी कॉलोनी सहित आसपास के कई सुदूर और घनी आबादी वाले इलाकों के लिए लाइफलाइन है. यहां प्रतिदिन औसतन 80 मरीज गंभीर बीमारियों के इलाज और परामर्श के लिए पहुंचते हैं, जबकि सामान्य दिनों में भी ओपीडी (OPD) की संख्या 40 से 50 मरीजों की रहती है. इतनी भारी भीड़ और निर्भरता के बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों को मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं, जिससे व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.

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डिलीवरी रूम नहीं, सदर अस्पताल किया जाता है रेफर

इस स्वास्थ्य केंद्र की सबसे बड़ी कमी यहां प्रसव (डिलीवरी) की कोई सुविधा न होना है. स्वास्थ्य टीम के अनुसार, केंद्र में आने वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, जरूरी टीकाकरण और डॉक्टरी परामर्श तो जैसे-तैसे दे दिया जाता है, लेकिन प्रसव का समय नजदीक आने पर उन्हें सीधे सदर अस्पताल रेफर कर दिया जाता है. आपातकालीन या गंभीर स्थिति में एम्बुलेंस न मिलने पर यह लचर व्यवस्था गर्भवती महिलाओं और उनके गरीब परिजनों के लिए बड़ी मुसीबत और जान का जोखिम बन जाती है.

चारदीवारी और स्टोर रूम का अता-पता नहीं

अस्पताल परिसर की सुरक्षा के लिए यहां कोई चारदीवारी (Boundary Wall) नहीं है, जिससे असामाजिक तत्वों का डर बना रहता है. दवाओं और मेडिकल उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए अलग से कोई स्टोर रूम नहीं है, जिसके कारण एक चालू कमरे को ही अस्थायी गोदाम बना दिया गया है. मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां या शेड तक नहीं है. शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था भी बेहद खराब है. कड़कती गर्मी से राहत देने के लिए अस्पताल में लगाया गया एकमात्र एसी (AC) भी खराब स्थिति में है और पर्याप्त ठंडक नहीं दे पाता, जिससे मरीज और ऑन-ड्यूटी स्वास्थ्यकर्मी दोनों पसीने से बेहाल रहते हैं.

डिजिटल इंडिया में 4 महीने से इंटरनेट ठप

एक तरफ सरकार हर काम डिजिटल करने का दावा कर रही है, वहीं इस यूएचपीसी में पिछले चार महीने से इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद पड़ी है. इंटरनेट न होने के कारण दवाओं की ऑनलाइन एंट्री, एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज) की रिपोर्ट अपलोड करने तथा स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन भेजी जाने वाली महत्वपूर्ण दैनिक रिपोर्ट पूरी तरह प्रभावित हो रही है. इसके अलावा, केंद्र में टेटनस वैक्सीन और मैक्सूलिन जैसी बेहद आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी बनी हुई है. दवाओं की नियमित आपूर्ति न होने के कारण लाचार डॉक्टरों को गरीब मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदने की पर्ची लिखनी पड़ती है, जिससे जरूरतमंदों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.

स्थानीय जनता में भारी आक्रोश

अस्पताल की इस दुर्दशा को लेकर स्थानीय निवासी रविशंकर प्रसाद, बैधनाथ प्रसाद, शिवशंकर सिंह, मंजीत कुमार, अभय कुमार और रौनक कुमार सहित अन्य लोगों ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया है. ग्रामीणों का कहना है कि इस केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और सुलभ इलाज देना था, लेकिन 11 साल बाद भी यह जस की तस स्थिति में है. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने बोकारो जिला प्रशासन और राज्य स्वास्थ्य विभाग से पुरजोर मांग की है कि इस स्वास्थ्य केंद्र में अविलंब प्रसव कक्ष का निर्माण कराया जाए. साथ ही दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो और बुनियादी ढांचे को सुसज्जित किया जाए ताकि क्षेत्र की हजारों आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिल सके.

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