Bokaro News : जयंती पर याद किये गये रवींद्रनाथ टैगोर

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Bokaro News : जयंती पर याद किये गये रवींद्रनाथ टैगोर

Bokaro News : डीएवी चार में मनायी गयी जयंती, बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की दी प्रस्तुति, प्राचार्य ने विद्यार्थियों को किया संबोधित.

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बोकारो, डीएवी सेक्टर चार में बुधवार को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 162वीं जयंती मनायी गयी. शुरुआत विद्यालय के प्राचार्य एसके मिश्रा ने किया. उन्होंने बच्च��ं को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व पटल पर देश को गौरवान्वित करने वाले नोबेल विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन दृष्टांत को जानना बच्चों के लिये बहुत जरूरी है. ब्रिटिश शासन के खिलाफ वे भारतीय राष्ट्रवादियों की लड़ाई का पूरा समर्थन करते थे. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही उन्होंने अपनी पुस्तक गीतांजलि में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ लिखें यह भारत की आन बान शान का प्रतीक है. शिक्षा की मशाल जलाए रखने के लिए उन्होंने शांति निकेतन की स्थापना की, जो अपने शैक्षणिक उत्तमता के लिए प्रसिद्ध है. प्राचार्य ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर के साथ-साथ उनका पूरा परिवार ही सामाजिक सुधार में संलग्न था. वहीं, कार्यक्रम के दौरान कविता अंशिका के अनमोल वचन के साथ बच्चों ने गीत-संगीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया.

गुरु गोविंद सिंह एजुकेशनल सोसाइटी टेक्निकल कैंपस

गुरु गोविंद सिंह एजुकेशनल सोसाइटी टेक्निकल कैंपस, कांड्रा, चास में बुधवार को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनायी गयी. उनके चित्र पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों व संस्थान के सचिव सुरेंद्र पाल सिंह, कॉलेज निदेशक डॉ प्रियदर्शी जरुहार ने पुष्प अर्पित किया. वहीं, सुरक्षा को लेकर मॉक ड्रिल भी किया गया. संस्थान के अध्यक्ष तरसेम सिंह ने छात्र- छात्राओं व शिक्षकों को राष्ट्र सेवा के लिए तत्पर रहने को कहा. मौके पर प्रो रश्मि ठाकुर, प्रो कृतिका चौधरी, डॉ एपी बर्नवाल, पलक कुमारी आदि मौजूद थे.

बोकारो पब्लिक स्कूल में मनायी गयी जयंती

बोकारो पब्लिक स्कूल सेक्टर तीन में रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनायी गयी. शुरुआत विद्यालय की प्राचार्या डॉ सुधा शेखर ने रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया. प्राचार्या डॉ सुधा शेखर ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर एक महाकवि, उपन्यासकार, नाटककार, संगीतकार, दार्शनिक, समाज सुधारक और चित्रकार थे. साहित्य में बेहतर काम करने के लिए उन्हें सन् 1913 में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था. इस पुरस्कार को जीतने वाले वे पहले भारतीय थे. उन्होंने बंगाली साहित्य व बंगाली म्यूजिक को नई दिशा दी थी. मौके पर निदेशक कैप्टन आरसी यादव, उप प्राचार्य विश्वजीत पाल, अरविंद कुमार सहित अन्य शिक्षक – शिक्षिकाएं भी उपस्थित थे.

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Anand Kumar Upadhyay

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