Bokaro News : प्रज्ञा केंद्र संचालक ने अपने खाते में मंगायी मंईयां सम्मान योजना की राशि

Bokaro News : चास प्रखंड की नारायणपुर पंचायत के नारायणपुर गांव का है मामला, लाभुक अंशिता देवी ने शिकायत की, तो चार माह की राशि वापस की.
पिंड्राजोरा, चास प्रखंड में एक प्रज्ञा केंद्र के संचालक ने मंईयां सम्मान योजना का पैसा अपने खाते में मंगा लिया. जब आंगनबाड़ी के स्तर से सर्वे हुआ, तो फर्जीवाड़े का पता चला. लाभुक की शिकायत पर संचालक ने चार माह के पैसे वापस कर दिये हैं. मामला नारायणपुर पंचायत के नारायणपुर गांव का है. ग्रामीण दिलीप कुमार बाउरी की पत्नी अंशिता देवी ने बताया कि उसने बरटांड़ नारायणपुर स्थित हाफिज अंसारी के प्रज्ञा केंद्र में मंईयां सम्मान योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था. जब दो महीने तक पैसा नहीं आया, तो वह प्रज्ञा केंद्र गयी. इस पर संचालक ने कहा कि ऑनलाइन आवेदन किया जा चुका है. उसके बाद की जानकारी नहीं है.
अंशिता ने बताया कि हाफिज अंसारी का एकाउंट व मोबाइल नंबर का पता उसे तब चला, जब आंगनबाड़ी के सर्वेक्षण के दौरान फाॅर्म प्राप्त हुआ. पैसा नहीं जाने की जब जांच की गयी, तो एकाउंट व मोबाइल नंबर दूसरे का निकला. जांच के बाद पता चला कि दोनों नंबर प्रज्ञा केंद्र के संचालक का है. इसकी जानकारी दंपती ने पंचायत सचिव व मुखिया को दी. पंचायत सचिव ने जांच करने के बाद प्रज्ञा केंद्र के संचालक को फटकार लगायी, तो उसने लाभुक के एकाउंट में 5500 रुपये भेज दिये. हाफिज अंसारी ने कहा कि तीन महीने का 3000 रुपये व एक महीने का 2500 रुपये दे दिया है.अंशिता का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन के दौरान प्रज्ञा केंद्र के संचालक ने गड़बड़ी कर अपना खाता नंबर डाल दिया था. लाभुक ने कहा कि उसने पंचायत सचिव को अपना एकाउंट नंबर व सभी जरूरत कागजात देकर सुधार करने का आग्रह किया है.
प्रज्ञा केंद्र का संचालक बोला : भूलवश भर दिया था अपना एकाउंट नंबर
इस संबंध में प्रज्ञा केंद्र संचालक हाफिज अंसारी ने कहा कि मंईयां सम्मान योजना को लेकर मेरे प्रज्ञा केंद्र व सीएससी में काफी भीड़ चल रही थी. जानबूझकर अपना एकाउंट नंबर नहीं डाला है, भूलवश गलती हो गयी. पंचायत सचिव के जानकारी के बाद उसके एकाउंट में आये 5500 रुपये लाभुक अंशिता देवी के खाता में तुरंत डाल दिया गया.
उठ रहे सवाल
प्रज्ञा केंद्र संचालक की माने तो भूलवश उसने लाभुक की जगह खुद का खाता संख्या फार्म में अंकित कर दिया. इस कारण लाभुक की जगह उसके खाता में पैसा आ रहा था. लेकिन, जानकारों की माने तो यह भूलवश होना संभव नहीं है. कारण यह कि लाभुक का खाता भारतीय स्टेट बैंक के बायपास शाखा में है. खाता संख्या 396331….5 है. जबकि प्रज्ञा केंद्र संचालक ने बैंक ऑफ इंडिया के तेलीडीह मोड़ शाखा के खाता संख्या 585110…….82 को फार्म में भर दिया. जानकारों की माने तो खाता संख्या में एक दो अंक की गलती को भूलवश माना जा सकता है, लेकिन अलग-अलग बैंक, अलग आइएफएसी कोड, पूरी तरह अलग खाता संख्या की इंट्री को भूलवश नहीं माना जा सकता.
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