Bokaro News: 10 हजार कमानेवाले दिव्यांग मजदूर को सेंट्रल जीएसटी ने भेजा 5.40 करोड़ का नोटिस

Bokaro News: ‘करोड़पति कारोबारी’ मजदूर के नाम पर फर्जी फर्म ‘जी इंटरप्राइजेज’ बनाया, कसमार प्रखंड के धधकिया गांव का निवासी है सुबोध मुखर्जी, बालीडीह के एक टिंबर प्रतिष्ठान में करता है मजदूरी व बैंक खाते में हैं मात्र 1400 रुपये.
दीपक सवाल, कसमार, कसमार प्रखंड की पोंडा पंचायत के धधकिया गांव निवासी दिव्यांग सुबोध मुखर्जी को सेंट्रल जीएसटी ने 5.40 करोड़ रुपये का नोटिस थमाया है. वह घर से करीब 30 किमी दूर बालीडीह स्थित एक टिंबर प्रतिष्ठान में 10 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी करता है. कसमार स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा में सुबोध का बचत खाता है, जिसमें वर्तमान में केवल 1400 रुपये हैं. मंगलवार को डाक से नोटिस मिलने के बाद परिवार सदमे में है. उसकी बीमार पत्नी करोड़ों के नोटिस की बात सुन बार-बार बेहोश हो रही है. सुबोध यह समझ पाने में असमर्थ है कि करोड़ों के कर दायित्व का नोटिस उसके नाम कैसे जारी हो गया. इस मामले ने जीएसटी पंजीकरण और सत्यापन प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर किया है.
फर्जी आईटीसी क्लेम का आरोप, सात दिन में जवाब का निर्देश
नोटिस केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग द्वारा जारी किया गया है. इसमें मेसर्स जी इंटरप्राइजेज नामक फर्म का उल्लेख है, जिसका प्रोपराइटर सुबोध मुखर्जी को बताया गया है. विभाग का कहना है कि उक्त फर्म ने नवंबर 2025 में जीएसटी रिटर्न दाखिल कर 5.40 करोड़ रुपये से अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम किया, जबकि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार वास्तविक पात्रता मात्र 29 हजार रुपये के आसपास थी. इसे जीएसटी कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए सात दिनों के भीतर जवाब या भुगतान का निर्देश दिया गया है, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है. इधर, सुबोध मुखर्जी का कहना है कि उन्होंने कभी कोई फर्म नहीं खोला, ना ही वे व्यापार से जुड़े हैं. उन्हें जीएसटी या टैक्स संबंधी किसी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है. उनका कहना है कि ‘जी इंटरप्राइजेज’ आखिर किसका है, यह वे खुद नहीं जानते.
घर आकर लिये फोटो और दस्तावेज, साजिश की आशंका
सुबोध ने बताया कि 22 जनवरी को दो अज्ञात व्यक्ति चारपहिया वाहन से उनके घर पहुंचे थे. उन्होंने खुद को जीएसटी अधिकारी बताते हुए सुबोध से नाम पूछा, बातचीत की और उनकी तस्वीर ली. साथ ही, पैन कार्ड नंबर लेकर चले गये. अगले दिन एक कॉल आया, जिसमें खुद को जीएसटी इंस्पेक्टर बताने वाले व्यक्ति ने आधार और पैन नंबर का सत्यापन किया. इन घटनाओं से संदेह होने पर सुबोध ने इसकी जानकारी स्थानीय थाना को भी दी थी. पुलिस ने आश्वस्त कर भेजा, बावजूद उसके नाम पर फर्म खड़ा कर दिया गया.
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