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झारखंड के बोकारो में नाबालिग भतीजी के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी चाचा को 20 साल की सजा, 15 हजार रुपए जुर्माना

Updated at : 15 Apr 2024 7:36 PM (IST)
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बोकारो सिविल कोर्ट

बोकारो सिविल कोर्ट

बोकारो की अदालत ने सोमवार को नाबालिग भतीजी के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी चाचा को 20 साल की सजा सुनायी. इस दौरान अदालत ने 15 हजार का जुर्माना लगाया. 2022 के इस मामले में अदालत ने सजा सुनायी.

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बोकारो, रंजीत कुमार: बोकारो की अदालत ने सोमवार को नाबालिग भतीजी के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी चाचा को 20 साल की सजा सुनायी और 15 हजार का जुर्माना लगाया. ये मामला 2022 का है. हरला थाने में इस बाबत पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. पुलिस ने घटना के बाद दबिश डालकर आरोपी चाचा को गिरफ्तार कर लिया था.

बोकारो की अदालत ने सुनायी सजा
15 वर्षीया नाबालिग के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी चाचा को राजीव रंजन की अदालत ((पोक्सो स्पेशल कोर्ट) ने सोमवार को अलग-अलग धाराओं में सात वर्ष व 20 वर्ष की सजा सुनायी है. इसके साथ ही अपहरण व दुष्कर्म के मामले में कुल 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है. जुर्माना नहीं देने पर मुजरिम को नौ माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. मुजरिम को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनायी गयी है. दोनों सजा साथ-साथ चलेगी.

2022 का है मामला
सरकार की ओर से कोर्ट में अभियोजन का पक्ष विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र कुमार ने रखा. उन्होंने बताया कि घटना हरला थाना क्षेत्र में 15 दिसंबर 2022 की रात को घटी थी. दोषी चाचा नाबालिग भतीजी को लेकर घर से गायब हो गया था. अपने स्तर से खोजबीन के बाद अपहृत नाबालिग के पिता ने हरला थाने में इसकी शिकायत की थी. शिकायत के आधार पर 23 जनवरी 2023 को हरला थाने में पोक्सो एक्ट के तहत अपहरण की प्राथमिकी दर्ज की गयी. इसके बाद पुलिस ने अनुसंधान शुरू किया.

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नाबालिग ने बयान में दुष्कर्म की बात कही थी
हरला पुलिस की दबिश के कारण दोषी चाचा कुछ दिन बाद ही नाबालिग भतीजी को लेकर बोकारो आया था. पुलिस ने दोषी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. नाबालिग का कोर्ट में बयान दर्ज कराया गया. नाबालिग ने बयान में एक बंद कमरे में दुष्कर्म करने की बात बतायी थी. इस तथ्य के सामने आने पर पुलिस ने अपहरण व दुष्कर्म के बिंदु पर अनुसंधान पूरा किया. कोर्ट में चार्जशीट समर्पित करते हुए ठोस गवाह व साक्ष्य प्रस्तुत किया. इसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी चाचा को दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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