Bokaro News : आनंद मार्ग प्रचारक संघ का तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन शुरू
Published by : JANAK SINGH CHOUDHARY Updated At : 30 May 2026 12:41 AM
Bokaro News : आनंदनगर (पुरुलिया) में तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन शुक्रवार से शुरू हुआ.
आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनंदनगर (पुरुलिया) में आयोजित तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन शुक्रवार से शुरू हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात संगीत, कीर्तन व आध्यात्मिक साधना के साथ हुई. मौके पर काफी संख्या में आनंदमार्गी उपस्थित थे.
पदार्थ, ऊर्जा और चेतना अलग-अलग नहीं हैं : आचार्य विकाशानंद
आचार्य विकाशानंद अवधूत ने श्री श्री आनंदमूर्ति जी के ””””पदार्थ, ऊर्जा और चेतना के रहस्य”””” विषय के योगदान पर व्याख्यान दिया. कहा कि पदार्थ, ऊर्जा और चेतना अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही परम चेतना का विभिन्न रूपों में क्रमशः स्थूल और सूक्ष्म प्रकटीकरण हैं. जिसे हम पदार्थ कहते हैं -चाहे वह एक परमाणु हो, एक अणु हो, एक पर्वत हो, एक नदी हो या मानव शरीर हो, वह अंततः संघनित (जमी हुई) ऊर्जा के अलावा और कुछ नहीं है. पदार्थ कोई स्वतंत्र और शाश्वत तत्व नहीं है. यह केवल ऊर्जा है, जो एक सघन और व्यवस्थित रूप में विद्यमान है. कहा कि आधुनिक भौतिकी धीरे-धीरे इसी बोध की ओर अग्रसर हुई है. आचार्य विकाशानंद अवधूत ने कहा कि एक पत्थर और प्रकाश के किरण के बीच अंतर यह नहीं है कि एक दूसरे से पूरी तरह भिन्न है, बल्कि यह है कि ऊर्जा स्वयं को विभिन्न अवस्थाओं और प्रतिरूपों में अभिव्यक्त करती है.
क्या ऊर्जा स्वयं ही अस्तित्व का अंतिम सत्य है?
आचार्य विकाशानंद अवधूत ने कहा कि मानवता ऊर्जा और पदार्थ को जितनी गहराई से समझेगी, भौतिक जगत को आकार देने और उसका उपयोग करने की उसकी क्षमता उतनी ही अधिक बढ़ेगी. वैज्ञानिक प्रगति इसी समझ का परिणाम है. ऊर्जा के नियमों की खोज करके मनुष्यों ने बिजली उत्पन्न की है, मशीनें बनायी, अंतरिक्ष की खोज की और परमाणुओं की छिपी हुई संरचना को उजागर किया है. एक वैज्ञानिक वह है जो ऊर्जा की भाषा के माध्यम से पदार्थ की कार्यप्रणाली को समझता है. फिर भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न अनुत्तरित रह जाता है.क्या ऊर्जा स्वयं ही अस्तित्व का अंतिम सत्य है?
पूर्ण शून्यता से किसी भी चीज़ की उत्पत्ति नहीं हो सकती
आचार्य विकाशानंद ने कहा कि यदि ब्रह्मांड कणों और बलों के संग्रह से अधिक कुछ नहीं है, तो चेतना कहां से आयी? विचार, भावना, कल्पना, प्रेम, स्मृति और मेरे अस्तित्व का बोध, ये सब निर्जीव पदार्थ से अचानक कैसे उत्पन्न हो गये?
पूर्ण शून्यता से किसी भी चीज की उत्पत्ति नहीं हो सकती. यदि आज मनुष्यों में चेतना विद्यमान है, तो इसकी संभावना सृष्टि के बिल्कुल आरंभ से ही मौजूद रही होगी. मौके पर केंद्रीय जनसंपर्क सचिव आचार्य दिव्यचेतनानंद अवधूत सहित अन्य मौजूद थे.
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