बोकारो : सत्ता पक्ष के लिए उम्मीद भरा, विपक्ष के लिए उत्साह भरा, जनता को न उम्मीद न उत्साह
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Dec 2018 7:24 AM
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बोकारो : राज्य निर्माण के 14 वर्ष बाद स्थायी सरकार का सपना 23 दिसंबर 2014 में साकार हुआ. पूर्ण बहुमत से एनडीए गठबंधन की सरकार बनी. उम्मीद थी कि खनिज संपदा से धनी राज्य विकास की इबारत गढ़ेगा. इंजीनियरिंग कॉलेज-मेडिकल कॉलेज, दुंदीबाद बाजार स्थायीकरण, बोकारो एयरपोर्ट विस्तारीकरण, गवई बराज जीर्णोद्धार समेत कई योजनाओं के जरिये […]
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बोकारो : राज्य निर्माण के 14 वर्ष बाद स्थायी सरकार का सपना 23 दिसंबर 2014 में साकार हुआ. पूर्ण बहुमत से एनडीए गठबंधन की सरकार बनी. उम्मीद थी कि खनिज संपदा से धनी राज्य विकास की इबारत गढ़ेगा.
इंजीनियरिंग कॉलेज-मेडिकल कॉलेज, दुंदीबाद बाजार स्थायीकरण, बोकारो एयरपोर्ट विस्तारीकरण, गवई बराज जीर्णोद्धार समेत कई योजनाओं के जरिये बोकारो को भी मंत्रमुग्ध किया गया.
मेडिकल कॉलेज के लिए तो बजट में भी प्रस्ताव पारित हो गया. चार साल बीत जाने के बाद बोकारो विस को क्या मिला, क्या नहीं मिला, सरकार अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरी इसे लेकर सोमवार को प्रभात खबर ने आम से लेकर खास (जनप्रतिनिधि) की राय जानी.
सत्ता पक्ष के लिए कार्यकाल उम्मीद भरा यानी अपेक्षा के अनुरूप रहा. वहीं विपक्ष के लिए कार्यकाल उत्साह भरा रहा, यानी विपक्ष उत्साहित है कि ऐसे कार्यकाल से सरकार बदलना तय है. अगर बात आम लोगों की करें, तो उनके लिए कार्यकाल न उम्मीद व न ही उत्साहजनक रहा. मतलब, विकास तो हुआ है, लेकिन प्रदेश की संपन्नता के मुकाबले कार्य अधूरा है.
कुछ-कुछ हुआ है, कुछ हो गया है
चास व बोकारो को जोड़ने वाले गरगा पुल का निर्माण समेत नदी पर सात पुल बनने से लोगों को राहत मिली. बारी-को-ऑपरेटिव में पावर ग्रिड बनने से बिजली की समस्या से कुछ राहत मिली है. हैसाबातू पेयजलापूर्ति योजना से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है.
बोकारो एयरपोर्ट का विस्तारीकरण कार्य भी जारी है. बहुप्रतीक्षित बोकारो-चंद्रपुरा संपर्क पथ भी बन रहा है. सभी गांव में विद्युतीकरण भी विकास की कहानी बयान कर रहा है.
विस्थापित व ग्रामीण क्षेत्र में 160 किमी पीसीसी सड़क का निर्माण प्रदेश में बोकारो विस के लिए उत्साहित करने वाला है. वहीं एग्रीकल्चरल फीडर, कुदनडीह व पिंड्राजोरा फीडर का काम इसी वित्तीय वर्ष में पूरा होने की संभावना है. रानीपोखर पेयजलापूर्ति व पुपुनकी-राहरबेड़ा पेयजलापूर्ति योजना भी कतार में खड़ी है.
सपना जो नहीं हुआ पूरा
कई योजनाओं पर काम पूर्ण व शुरुआत हुआ तो, कई योजनाओं पर पानी फिर गया. बोकारो की सबसे बड़ी मांग उच्चतर शिक्षा अधूरी रह गयी. विस में मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज योजना अंगड़ाई लेकर सो गया.
बजट में मेडिकल कॉलेज का प्रावधान होने के बाद भी धरातल पर कुछ नहीं उतरा. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का सपना फाइल दर फाइल ही भटकता रह गया. चास में ट्रांसपोर्ट नगर स्थापित नहीं हो सकी.
दुंदीबाद बाजार का स्थायीकरण भी योजना की राह में गुम हो गया. नेशनल हाइवे के किनारे अत्याधुनिक बस स्टैंड का वादा तो मानों कहीं खो गया. दिल्ली के कैंसर रोग विशेषज्ञ माजिद तालकोटी के सहयोग से बनने वाली मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल सीमा रेखा के अंदर ही रह गया.
हर क्षेत्र में कियागया है विकास
हर क्षेत्र में विकास हुआ है. विकास के वादा को पूरा किया जा रहा है. विस्थापित से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाया गया है. हवाई अड्डा का विस्तारीकरण कार्य प्रगति पर है. मेडिकल कॉलेज व इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम निर्माण कार्य 2019 में शुरू करने की चुनौती है, इसे हर हाल में पूरा किया जायेगा.
बिरंची नारायण, विधायक- बोकारो
2014 से भी पीछे चल गया बोकारो
बोकारो विस क्षेत्र में विकास रूक गया है. स्थानीय विधायक निजी हित में काम कर रहे हैं. कागजी योजना से हवाई जहाज उड़ाने की कोशिश हो रही है. विस्थापितों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है. गांव बुनियादी सुविधा के इंतजार में है.
मंटू यादव, बोकारो महानगर अध्यक्ष- झामुमो
जुमलेबाजी में बीत गये चार साल
बोकारो विस में विकास सिर्फ जनप्रतिनिधि की बातों में दिखाई देता है. विस्थापित व ग्रामीणों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है. एक भी काम पूरा नहीं हो पाया है. बीएसएल व ठेका मजदूरों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया. सिर्फ जुमलेबाजी करने में ही 04 साल बीत गये.
डॉ प्रकाश सिंह, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य- झाविमो
चार साल में विकास नहीं विनाश हुआ
चार साल में क्षेत्र के विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है. औद्योगिक क्षेत्र की सभी इकाई मरणासन्न है, इनके उत्थान के लिए कुछ नहीं किया गया. रोजगार के लिए एक भी काम नहीं किया गया. इससे युवाओं में रोष है. क्षेत्र को विनाश के कगार पर खड़ा कर दिया गया है.
मंजूर अंसारी, जिलाध्यक्ष- कांग्रेस
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