बीआइएफआर में भी संडे और ओटी पर नहीं था प्रतिबंध
Updated at : 27 Aug 2018 7:17 AM (IST)
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बेरमो : कोल इंडिया में ट्रेड यूनियनों द्वारा बनाये गये दबाव के बाद फिलहाल स्टैगर्ड रेस्ट पर रोक तो लग गयी है, पर संकट अभी बरकरार है. कंपनी ने अपनी सेवा व सुविधाओं से कर्मियों की आकांक्षा का स्तर इतना ऊंचा कर दिया था कि अब उसमें थोड़ी भी कटौती कर्मियों को बर्दाश्त नहीं. जिस […]
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बेरमो : कोल इंडिया में ट्रेड यूनियनों द्वारा बनाये गये दबाव के बाद फिलहाल स्टैगर्ड रेस्ट पर रोक तो लग गयी है, पर संकट अभी बरकरार है. कंपनी ने अपनी सेवा व सुविधाओं से कर्मियों की आकांक्षा का स्तर इतना ऊंचा कर दिया था कि अब उसमें थोड़ी भी कटौती कर्मियों को बर्दाश्त नहीं. जिस संडे-ओटी पर कंपनी ने बीआइएफआर जैसे अपने बुरे दिन में ब्रेक नहीं लगाया था, पर उस पर रोक की कल्पना ही दु:स्वप्न की तरह है. इसीलिए उच्चाधिकारी आशंकित हैं कि अचानक संडे व ओटी बंद कर दिया जाये तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है. कोल इंडिया मुख्यालय के आदेश पर अनुषंगी कंपनियां अपने स्तर से इसे डील कर रहे हैं.
बच सकता है 40 अरब : विदित हो कि कोल इंडिया में मौजूद कुल 2.98 लाख मजदूरों में करीब 1.95 लाख से दो लाख कोयला मजदूरों को संडे, ओटी आदि लाभ मिलता था. संडे व ओटी के लिए कोल कर्मियों में होड़ रहती है. अगर कोल इंडिया प्रबंधन ने आदेश निकालकर इसे पूर्णत: बंद कर दिया तो अमूमन एक साल में कोल इंडिया को लगभग चार हजार करोड़ रुपये की बचत होगी. सिर्फ सीसीएल में संडे व ओटी का सालाना बजट करीब 508 करोड़ रु है.
विचित्र है कि कोल इंडिया की कंपनियां बीआइएफआर (औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड) में थी तो उस वक्त कभी भी कोलकर्मियों का संडे-ओटी बंद नहीं किया गया. कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई सीसीएल वर्ष 2004 से वर्ष 2009 तक बीआइएफआर में रहा. इसके अलावा बीसीसीएल भी कई वर्षों तक बीआइएफआर में रही, लेकिन इन कंपनियों में कभी भी संडे व ओटी को बंद नहीं की गयी. अब कोल इंडिया प्रबंधन हर हाल में स्टैगर्ड रेस्ट को चालू करने पर आमादा है.
बदल सकता है काम का दस्तूर
बताते चलें कि थर्टी डे वर्क का आदेश लागू हो गया तो कर्मियों का सप्ताहांत संडे नहीं होगा. प्रबंधन अपनी सुविधानुसार कर्मियों के समूह विशेष के लिए सप्ताह का कोई एक दिन अवकाश तय कर देगा. माइंस एक्ट के तहत अब कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों में कर्मचारियों को सप्ताह में 48 घंटे ही काम करना होगा. रेस्ट डे में काम के लिए बुलाने पर कामगारों को डबल हाजिरी मिलेगी. कोयला उद्योग में अब सेवन डेज वर्किंग पॉलिसी की योजना पर काम चल रहा है. फिलहाल रविवार के दिन काम करने पर कर्मियों को डबल हाजिरी व एक दिन रेस्ट दिया जाता है.
केंद्र ने कंपनी को कंगाल कर दिया
कोल इंडिया बनने के बाद से कंपनी के पास 63 हजार करोड़ रु मुनाफा के रूप में जमा हो गया था. बीते छह माह के दौरान भारत सरकार ने मजदूरों की इस गाढ़ी कमाई को कोल इंडिया से ले लिया. मजदूरों की सुविधा में कटौती करनेवाली सरकार की निगाह मजदूरों की गाढ़ी कमाई पर है. सीटू नेता व जेबीसीसीआइ सदस्य डीडी रामानंदन कहते हैं कि कंपनी को सरकार ने कंगाल कर दिया गया है.
कोल इंडिया की जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार ने ले लिया है. कंपनी के पास बची रकम पर भी अब संदेह है. कहा कि केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए कोल इंडिया को आर्थिक संकट में डाला है. कोल इंडिया और इसकी इकाई के बड़े अधिकारी तक की स्थिति यह है कि वे कोई भी बड़े फैसले नहीं ले सकता है.
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