अस्पताल जाने के दौरान खाट पर हुआ प्रसव

Updated at : 06 Aug 2018 7:08 AM (IST)
विज्ञापन
अस्पताल जाने के दौरान खाट पर हुआ प्रसव

ललपनिया : गर्भवती महिलाओं व गंभीर रूप से बीमार नवजातों को अस्पताल ले जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से ममता वाहन का प्रावधान है. लेकिन नक्सल प्रभावित झुमरा पहाड़ के निकटवर्ती गांवों के बीमारों को अस्पताल ले जाने के लिए खटिया ही सहारा है. झुमरा के निकटवर्ती संताली बहुल सिमराबेड़ा में दो दिन […]

विज्ञापन
ललपनिया : गर्भवती महिलाओं व गंभीर रूप से बीमार नवजातों को अस्पताल ले जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से ममता वाहन का प्रावधान है. लेकिन नक्सल प्रभावित झुमरा पहाड़ के निकटवर्ती गांवों के बीमारों को अस्पताल ले जाने के लिए खटिया ही सहारा है. झुमरा के निकटवर्ती संताली बहुल सिमराबेड़ा में दो दिन से प्रसव से कराहती संगीता देवी को अस्पताल ले जाने के लिए खटिया ही सहारा बना. शनिवार की रात अस्पताल के रास्ते में ही उसे खाट पर प्रसव हो गया. जच्चा व बच्चा स्वस्थ हैं. विडंबना है कि क्षेत्र के विकास व कायापलट के लिए सरकार के पास झुमरा एक्शन प्लान है. और क्षेत्र में न सड़क, न अस्पताल है और न ही एंबुलेंस या ममता वाहन.
खटिया की डोली पर ले जाया गया : जानकारी के अनुसार प्रसव पीड़ा से त्रस्त संगीता की स्थिति बिगड़ती देख उसे तत्काल बाहर ले जाने का फैसला करना पड़ा. सिमराबेड़ा से झूमरा पहाड़ मोड़ तक जाने का रास्ता नहीं है. फलत: ग्रामीणों ने आनन-फानन में दिन के 12 बजे के आसपास खटिया की डोली बनाकर सिमराबेड़ा बेड़ा से लगभग सात किमी की दूरी तय कर झुमरा पहाड़ मोड़ पहुंचे. यहां से किसी एंबुलेंस या अन्य वाहन से घाटो या रामगढ़ अस्पताल ले जाने की तैयारी थी. इसी बीच झूमरा पहाड़ मोड़ के समीप प्रसव पीड़ा से त्रस्त महिला ने बच्चे को जन्म दिया.
प्रशासन झुमरा एक्शन प्लान के तहत करता है विकास का दावा
ग्रामीण नहीं जानते ममता वाहन क्या है
सिमराबेड़ा के ग्रामीणों को पता नहीं कि गर्भवती महिलाओं व गंभीर रूप से बीमार नवजातों को अस्पताल ले जाने के लिए सरकार की ओर से ममता वाहन का प्रावधान किया जाता है. जनप्रतिनिधि अपनी निधि से इसकी सुविधा उपलब्ध कराते हैं. प्रखंड विकास पदाधिकारी सुधीर प्रसाद का कहना है कि झूमरा में ममता वाहन का आवंटन नहीं हुआ है. मुखिया रेणुका देवी कहती हैं कि यहां एंबुलेंस या ममता वाहन नहीं है. उसे गर्भवती महिला की स्थिति की सूचना मिलती तो वह अपने स्तर से प्रयास जरूर करती. कहा : स्त्री होने के नाते इतना तो कर ही सकती थी.
जंगल में आवागमन का साधन नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि बीते दिन बलथरवा व सिमराबेड़ा में दो अन्य गर्भवती महिलाओं का भी बगैर किसी चिकित्सक व नर्स की मदद से प्रसव हुआ. महिला को गांव के ग्रामीण अर्जलाल मांझी, सुरेश मांझी, राम लाल मांझी युवा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज महतो आदि ने सिमराबेड़ा से सात किलोमीटर दूर झूमरा पहाड़ मोड़ तक लाने में सहयोग किया. ग्रामीणों का कहना था कि दुर्भाग्य है कि वे लोग ऐसे जंगल में रहते हैं जहां से आवागमन का भी कोई साधन नहीं है.
दो साल से बंद है आंगनबाड़ी केंद्र
सिमराबेड़ा के निकट बलथरवा गांव में गत दो साल से आंगनबाड़ी केंद्र बंद है. किसी दूसरे केंद्र से जुड़कर आंगनबाड़ी केंद्र झुमरा मोड़ में संचालित किया जा रहा है. यह भी गांव से सात किमी दूर है. तीन माह पूर्व आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका का चुनाव किया गया, पर आज तक जिला से चयन का अनुमोदन नहीं किया गया. ग्रामीण कहते हैं कि गांव की सेविका होती तो समय-समय पर गर्भवती महिलाओं को सेविका की सेवा मिलती. इससे परेशानी हो रही है.
झुमरा में दो साल से बन रहा है अस्पताल
झुमरा पहाड़ में गत दो साल से अधिक समय से स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य चल रहा है. आज तक यह भवन अधूरा है. अस्पताल चलने व बनने की बात तो दूर है. झुमरा व आसपास के ग्रामीण अपनी किस्मत व भगवान के भरोसे रहते हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola