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हरिलागोड़ा गांव में थम नहीं रहा है डायरिया का प्रकोप

5 Aug, 2018 5:32 am
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हरिलागोड़ा गांव में थम नहीं रहा है डायरिया का प्रकोप

प्रत्येक सप्ताह दो से चार लोग आ रहे हैं डायरिया की चपेट में चास : हरिलागोड़ा में डायरिया का प्रकोप थम नहीं रहा है. प्रत्येक सप्ताह गांव के दो-चार लोग डायरिया की चपेट में आ रहे हैं. कई मरीज दवा लेकर घर में ही हैं तो कई लोग चास के अस्पताल में भर्ती हैं. आइटीआइ […]

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प्रत्येक सप्ताह दो से चार लोग आ रहे हैं डायरिया की चपेट में

चास : हरिलागोड़ा में डायरिया का प्रकोप थम नहीं रहा है. प्रत्येक सप्ताह गांव के दो-चार लोग डायरिया की चपेट में आ रहे हैं. कई मरीज दवा लेकर घर में ही हैं तो कई लोग चास के अस्पताल में भर्ती हैं. आइटीआइ मोड़ स्थित अनुमंडल अस्पताल में भर्ती गोउर गोराईं (52 वर्ष) ने बताया कि उनका नाती रंजीत कुमार गोराईं (13 वर्ष) भी भर्ती है. गांव के अर्जुन गोराईं (78) भी अनुमंडल अस्पताल में भर्ती हैं. इसके अलावा शिवराम महतो, भुजन गोराईं का इलाज निजी अस्पतालों में चल रहा है.
स्वास्थ्य विभाग का प्रयास नाकाफी : फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों को सिर्फ दवा व हिदायत देकर ही डायरिया से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन फिलहाल यह नाकाफी लग रहा है. गौरतलब हो कि जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में दर्जनों ग्रामीण डायरिया की चपेट में आये थे. प्रभात खबर में खबर छपने के बाद चास एसडीएम सतीश चंद्रा ने गांव का दौरा कर मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था करायी गयी थी. लेकिन, अधिकारियों की निगरानी हटने के बाद फिर से ग्रामीणों को उनके हालात पर छोड़ दिया गया है. इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी गांव का दौरा किया था. इस दौरान अधिकारियों ने पीने के लिए उपयोग किये जाने वाले पानी की जांच करने की बात कही थी, लेकिन अभी तक जांच नहीं करायी गयी है.
दो हजार की आबादी के लिए सिर्फ चार चापाकल : हरिलागोड़ा के विमल गोराईं, शंकर महतो और दिनेश कुमार ने बताया कि लगभग दो हजार की आबादी वाले गांव में मात्र चार चापाकल हैं. चापाकल के पानी का उपयोग सिर्फ पीने और खाना बनाने के लिए ही हो पाता है. नहाने के लिए तालाब जाना ही पड़ता है. कभी-कभी खाना बनाने के लिए भी तालाब का पानी प्रयोग करना पड़ता है. गांव में एक डीप बोरिंग की आवश्यकता है. प्रत्येक जरूरतमंद परिवार के लिए शौचालय बनाने की भी जरूरत है.
हरिलागोड़ा गांव में बीमारी को नियंत्रित कर लिया गया था. अगर अब भी ग्रामीण डायरिया के चपेट में आ रहे हैं तो इसकी शीघ्र जानकारी ली जायेगी और प्रभावित ग्रामीणों को इलाज मुहैया कराया जायेगा.
एस मुर्मू, सिविल सर्जन, बोकारो
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