कांग्रेस की चुनावी रणनीति ने सबको चौकाया, कई दिग्गज हुए परास्त

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निर्दलीय अर्चना ने कांग्रेस को दी कड़ी टक्कर, भीतरघात का शिकार हुए भाजपा प्रत्याशी बेरमो : फुसरो नगर परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस की चुनावी रणनीति ने सबको चौकाया. दोनों सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों ने सम्मानजनक जीत हासिल कर अपने कार्यकर्ताओं को पिछले विस चुनाव में कांग्रेस को मिली हार […]

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निर्दलीय अर्चना ने कांग्रेस को दी कड़ी टक्कर, भीतरघात का शिकार हुए भाजपा प्रत्याशी

बेरमो : फुसरो नगर परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस की चुनावी रणनीति ने सबको चौकाया. दोनों सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों ने सम्मानजनक जीत हासिल कर अपने कार्यकर्ताओं को पिछले विस चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद जीत का स्वाद चखने का मौका दिया है. कांग्रेस प्रत्याशियों की ओर से पूरे चुनाव में पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह व उनके पुत्र कुमार जयमंगल सिंह व युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुमार गौरव ने इस सीट को पार्टी के साथ व्यक्तिगत रूप से प्रतिष्ठा का विषय बनाते हुए काफी मेहनत की. कुमार जयमंगल ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को कहा था : अगर फुसरो नप के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की सीट कांग्रेस की झोली में नहीं दे पाया, तो आने वाले विस चुनाव में बेरमो विस से कांग्रेस का टिकट मांगने नहीं आयेंगे.
साथ ही कांग्रेस के सभी प्रकोष्ठों के अलावा राकोमसं बीएंडके व ढोरी एरिया ने भी पूरी ईमानदारी के साथ कांग्रेस का साथ दिया. दूसरी ओर से कांग्रेस की कब्र खोदने में कांग्रेस के ही कई दिग्गज यहां लगे हुए थे, लेकिन कांग्रेस को दोनों सीट पर मिली जीत ने उनकी रणनीति पर पानी फेर दिया. चेयरमैन पद पर कांग्रेस को निर्दलीय प्रत्याशी अर्चना सिंह ने काफी कड़ी टक्कर दी. अर्थाभाव से जूझते हुए अर्चना ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी 57 सौ वोट लाकर नप क्षेत्र में अपनी जोरदार उपस्थिति और भविष्य की राजनीति का एक नया संकेत दिया है. अध्यक्ष पद पर भाजपा प्रत्याशी व भाजपा के जिलाध्यक्ष जगरनाथ राम ने भी 51 सौ मत लाकर अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करायी है. अगर भाजपा का एक विशेष वर्ग का वोट दूसरी जगह ट्रांसफर नहीं होता को भाजपा जीत के करीब पहुंच सकती थी. दूसरी ओर भाजपा के ही नेता बंसत कुमार सिंह तथा हिंदू जागरण मंच के रामू दिगार बतौर निर्दलीय प्रत्याशी खड़े हो गये. इन दोनों को करीब दो हजार मत मिले. अगर ये लोग चुनाव में खड़े नहीं होते तो यह वोट भाजपा प्रत्याशी जगरनाथ राम के खाते में शामिल होता. भाजपा व कांग्रेस के अध्यक्ष प्रत्याशियों को अपने उपाध्यक्ष प्रत्याशियों के साथ बेहतर तालमेल का भी ला‍भ मिला. जहां तक सीपीआइ प्रत्याशी जवाहरलाल यादव का सवाल है तो श्री यादव को भी अपने वोट बैंक का लाभ पूरी तरह से नहीं मिल पाया. इनका भी कुछ खास वोट बैंक दूसरी जगह शिफ्ट कर गया. झामुमो के आलमगीर आलम को भी सम्मानजनक मत मिला, लेकिन झामुमो को लोकल के साथ-साथ अकलियत वोट बैंक में दूसरे प्रत्याशियों ने सेंधमारी की. निर्दलीय प्रत्याशी कृष्ण कुमार को भी आशा के अनुरूप मत नहीं मिला. पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा मेहनत व प्लानिंग के साथ चुनाव लड़ने वाले कृष्ण कुमार के साथ भी बड़े पैमाने पर धोखा हुआ. श्री कुमार ने हर हाल में 9-10 हजार मत मिलने की उम्मीद लगा रखी थी. ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले आजसू के संतोष महतो व झामुमो उलगुलान के नरेश महतो ग्रामीण क्षेत्रों तक ही सीमित रह गये तथा दोनों ने करीब साढ़े चार हजार मतों पर जोरदार हमला किया. इस चुनाव में सबसे बुरी स्थिति निर्दलीय प्रत्याशी बंसत कुमार सिंह की रही, जिन्हें मात्र 494 मत मिले. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी आर उन्नेश को भी मात्र 380 वोट मिले. एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी उमेश रवानी जिन्हें भाजपा प्रत्याशी के लिए खतरा साबित किया जा रहा था उन्हें भी सिर्फ 511 मतों से संतोष करना पड़ा. बहरहाल फुसरो नप का चुनाव कई मायनों मे खास रहा. सांसद रवींद्र कुमार पांडेय व बेरमो विधायक योगेश्‍वर महतो के गढ़ में भाजपा को दोनों सीट पर मिली पराजय भविष्य की राजनीति के लिए खतरे की घंटी है. अगर इस पर ठोस रूप से चिंतन-मनन नही किया गया तो आने वाला दिन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा से भरा रह सकता है.
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