कैंसर पीड़ित चंदू का सवाल ''मां! क्या मैं मर जाऊंगा?''

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चंदू को है मदद की दरकार पिता ने की अपील कसमार : ‘यह कदंब का पेड़ अगर मां होता…’ गुनगुनाने की उम्र में जब कोई बेटा जिज्ञासा करे कि ‘मां! क्या मैं कर जाऊंगा?’ तो उस मां के लिए इससे हृदयद्रावक और कुछ नहीं हो सकता. हां, कसमार प्रखंड के खैराचातर के किशोर अमन कुमार […]

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चंदू को है मदद की दरकार पिता ने की अपील

कसमार : ‘यह कदंब का पेड़ अगर मां होता…’ गुनगुनाने की उम्र में जब कोई बेटा जिज्ञासा करे कि ‘मां! क्या मैं कर जाऊंगा?’ तो उस मां के लिए इससे हृदयद्रावक और कुछ नहीं हो सकता. हां, कसमार प्रखंड के खैराचातर के किशोर अमन कुमार उर्फ चंदू (16 वर्ष) की इस जिज्ञासा से उसकी मां को रोज दो-चार होना पड़ता है. दरअसल लीवर कैंसर पीड़ित अमन कुमार असहनीय पीड़ा से गुजरते हुए रोज मौत को अपनी ओर खिसकते हुआ पाता. है.
सब जगह से लौट गये : चंदू के बेहतर इलाज का खर्च उठाने में परिजन असमर्थ हैं. चंदू के पिता सत्यनारायण जायसवाल ऑटो चालक है़ उनकी कमाई से बमुश्किल घर चल पाता है तो इलाज की वे कैसे सोच सकते हैं. वैसे घर वालों ने यथासंभव कोशिश की. बोकारो, रांची के चिकित्सकों ने कैंसर की बात कह सीएमसी, वेल्लोर जाने की सलाह दी़ रिश्तेदारों के सहयोग से सत्यनारायण बेटे को लेकर सीएमसी गये. वहां करीब पंद्रह दिन रहे़ वहां चिकित्सकों ने स्थिति को नाजुक बताते हुए इलाज में बड़ी रकम खर्च होने की बात कही़ खर्च उठाने में असमर्थ सत्यनारायण निराश होकर चंदू को लेकर लौट गये.
रोज मरते हैं मां-पिता : सीएमसी के बाद किसी की सलाह पर करीब एक माह पहले पतंजलि, हरिद्वार भी ले गये. वहां के इलाज से कुछ दिनों तक चंदू में सुधार दिखा, पर बाद में स्थिति बिगड़ने लगी़ पुन: वर्धमान, पश्चिम बंगाल लेकर गये. वहां भी जड़ी-बूटी का इलाज चला. अर्थाभाव से टूट गया परिवार तीन दिन से दवा नहीं करवा पा रहा है. चंदू की कराह सुन कर मां-पिता रोज मरते हैं. खुजली ऐसी कि शरीर को छील डालना चाहता है़ हर दिन अपनी मां से पूछता रहता है कि मां, क्या मैं मर जाऊंगा? अपने पुत्र को हर दिन मरते देख कर रहा नहीं जाता़
आवंटन के अभाव ने संकट बढ़ा दिया : चंदू के पिता ने बताया :
चिकित्सा अनुदान के लिए झारखंड सरकार को आवेदन दिये दो माह से अधिक बीत गये, पर अब-तक कोई सहयोग राशि नहीं मिल पायी है़ सिविल सर्जन से संपर्क करने पर बताया गया कि इस मद में अभी आवंटन नहीं है़ सत्यनारायण ने कहा : बेहतर इलाज के लिए लाखों रु खर्च करने की बात तो दूर, रोज की दवा, उसका खर्च (प्रति माह करीब 15 हजार रु) उठाने में भी असमर्थ हो चुका हूं. परिजनों के अलावा डॉ लंबोदर महतो ने कुछ सहयोग राशि प्रदान की थी़
पापा कहीं छपवा दीजिए, कोई मददगार आ जाये
चंदू के पिता सत्यनारायण ने लोगों से सहयोग की अपील की है़ कहा कि दवा-इलाज नहीं करा पाने की लाचारी है़ चंदू ने खुद उससे कहा, ‘पापा किसी अखबार में छपवा दीजिए न, शायद कोई हमारी मदद करने आ जाए़’ चंदू के इलाज के लिए अगर कोई सहयोग करना चाहे तो उसके पिता के मोबाइल नंबर 7549523879 पर संपर्क किया जा सकता है.
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