बोकारो : चास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े 29 स्वास्थ्य केंद्रों का हाल बेहाल है. छह लाख की आबादी के इलाज के लिए छह चिकित्सक उपलब्ध हैं. जबकि 11 चिकित्सक का पद स्वीकृत है. टुपरा व पिंड्राजोरा एपीएचसी में चिकित्सक डॉ डीके गुप्ता व डॉ संजय कुमार पदस्थापित हैं. इनकी प्रतिनियुक्ति चास अनुमंडल अस्पताल व सदर अस्पताल में कर दी गयी है.
ऐसे में इन एपीएचसी में चिकित्सक के अभाव में मरीजों की ओपीडी में जांच नहीं होती है. 24 सब सेंटर में सप्ताह में चिकित्सक को एक दिन ओपीडी सेवा देनी है. चिकित्सकों की कमी के कारण पदस्थापित चिकित्सक सब सेंटर की सर्किल को पूरा नहीं कर पाते हैं.
दर्जनों बार एमओ आइसी लिख चुके हैं सरकार को पत्र
चास पीएचसी एमओ आइसी डॉ बी मिश्रा चिकित्सकों की कमी को लेकर दर्जनों बार सरकार व वरीय अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं. चास ग्रामीण क्षेत्र में दो लाख 98 हजार, चास शहरी क्षेत्र में एक लाख 60 हजार, बीएस सिटी स्लम क्षेत्र में दो लाख व बीएस सिटी शहरी क्षेत्र में पौने दो लाख की आबादी निवास करती है. जो सरकारी चिकित्सा सेवा पर निर्भर है. ऐसे में चिकित्सक की कमी का असर मरीजों पर पड़ता है. चिकित्सकों की कमी से कार्य कर रहे चिकित्सक भी परेशान हैं. चास पीएचसी में पदस्थापित आयुष चिकित्सक ओपीडी में मरीजों की जांच करते हैं. एलोपैथ दवा लिखने को विवश होते हैं.
अस्पताल का नाम पदस्थापित व प्रतिनियुक्त चिकित्सक
पीएचसी चास डॉ बी मिश्रा, डॉ अनिल कुमार व डॉ मैथिली ठाकुर
चीरा चास एपीएचसी डॉ केके सिन्हा व डॉ एसएन महतो
राजकीय औषधालय डॉ राजेश चौधरी व डॉ एस टुडू (आरसीएच पदाधिकारी)
पिंड्राजोरा एपीएचसी डॉ डीके गुप्ता (प्रतिनियुक्त – अनुमंडल अस्पताल चास)
टुपरा एपीएचसी डॉ संजय कुमार (प्रतिनियुक्त – सदर अस्पताल कैंप दो)
24 स्वास्थ्य केंद्र प्रतिदिन एएनएम की ड्यूटी – सप्ताह में एक दिन चिकित्सक
लोगों ने सुनायी व्यथा
अस्पताल में जाने पर काफी लंबा लाइन मिलती है. कभी चिकित्सक ही अवकाश पर रहते हैं. ऐसे में चिकित्सक सेवा लेने में परेशानी होती है.
अरविंद कुमार, चास मेन बजार
सिवनडीह से राजकीय औषधालय आती हूं. यहां महिला चिकित्सक नहीं मिलने पर काफी परेशानी होती है. वापस घर को लौट जाना पड़ता है.
रइसा परवीन, सिवनडीह
राजकीय औषधालय में चिकित्सक मिलते हैं. यहां चिकित्सा सेवा 24 घंटे उपलब्ध नहीं होती है. पूछने पर पता चलता है कि चिकित्सक ज्यादा नहीं है.
एमएल प्रसाद, सेक्टर पांच
चिकित्सक अस्पताल में कभी मिलते हैं कभी नहीं मिलते हैं. महिला चिकित्सक से भेंट हो जाती है, तो सौभाग्य की बात है.
विभा कुमारी, चीरा चास
क्या कहते हैं पदस्थापित चिकित्सक व एमओ आइसी
चिकित्सकों की कमी के कारण हमसभी परेशान होते हैं. एक चिकित्सक के अवकाश में जाने पर 16 से 24 घंटे तक ड्यूटी करनी होती है, जो मानसिक रूप से परेशान करने वाली है. 24 सब सेंटर में सप्ताह में एक दिन चिकित्सक को ओपीडी ड्यूटी करनी है. चिकित्सक के अभाव में इस ड्यूटी को कैसे पूरा करें.
डॉ अनिल कुमार, एमओ, चास पीएचसी.
लगभग 200 मरीजों की ओपीडी जांच प्रतिदिन होती है. एमओ आइसी विभागीय कार्य में व्यस्त होते हैं. दो चिकित्सक में एक भी चिकित्सक अवकाश पर गये, तो ओपीडी सेवा चरमरा जाती है. मैं स्थायी रूप से अस्पताल परिसर में ही रहता हूं. लगातार मरीजों की जांच करता रहता हूं. ऐसे में परेशानी स्वाभाविक है.
डॉ बी मिश्रा, एमओ आइसी, पीएचसी चास
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
चिकित्सकों की बात जायज है. चिकित्सक के अभाव में दूसरे चिकित्सक पर लोड बढ़ जाता है. ऐसेे में सेवा पर प्रभाव तो पड़ता ही है. विभाग से चिकित्सक की मांग की गयी है. अनुबंध सहित आयुष चिकित्सकों के माध्यम से मरीजों को सेवा दी जा रही है. चिकित्सक की पदस्थापना के बाद चिकित्सकों की परेशानी ठीक होगी.
डॉ एस मुर्मू, सिविल सर्जन, बोकारो
क्या कहते हैं आइएमए अध्यक्ष
सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या काफी कम है. ऐसे में काम का दबाव चिकित्सकों पर बढ़ जाता है. इसके बाद भी आम लोगों को सेवा में किसी तरह की कोताही नहीं करते हैं. सरकार को अविलंब खाली पदों को जल्द भरना चाहिए. ताकि कार्य करने वाले चिकित्सकों की परेशानी कम हो सके.
डॉ अमन श्रीवास्तव, अध्यक्ष, आइएमए चास