अपने ही घर में उपेक्षित हैं पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर अजय

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बोकारो : क्या आपने बाइचुंग भुटिया का नाम सुना है? भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भुटिया. सुनील छैत्री को जानते हैं? भारतीय फुटबॉल टीम के वर्तमान कप्तान सुनील छैत्री. आपका जवाब होगा हां. इनका नाम कौन नहीं जानता. पर क्या आप जानते हैं कि वह कौन खिलाड़ी हैं, जिनके घायल होने के बाद […]

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बोकारो : क्या आपने बाइचुंग भुटिया का नाम सुना है? भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भुटिया. सुनील छैत्री को जानते हैं? भारतीय फुटबॉल टीम के वर्तमान कप्तान सुनील छैत्री. आपका जवाब होगा हां. इनका नाम कौन नहीं जानता. पर क्या आप जानते हैं कि वह कौन खिलाड़ी हैं, जिनके घायल होने के बाद सुनील छैत्री को मोहन बगान से खेलने का मौका मिला था? जब बाइचुंग भुटिया का नेशनल रैंक चार था, तो रैंक एक पर कौन था? वह नाम है बोकारो का अजय सिंह. अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी अजय सिंह.

एक जमाने में गोल मशीन के नाम से प्रसिद्ध अजय सिंह को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों सम्मान मिला. संयुक्त बिहार में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का अवार्ड मिला. लेकिन, जिस जिला व प्रदेश को फुटबॉल के क्षेत्र में उन्नत बनाने के लिए सभी अवसरों को अजय सिंह ने छोड़ा, वहां उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसका वह हकदार हैं. सोमवार को प्रभात खबर ने अजय सिंह से विशेष बातचीत की. अजय सिंह वर्ष 2005 में बोकारो की प्रतिभाओं को संवारने के लिए फुटबॉल खेलना छोड़ कर यहां आये थे.

झारखंड सरकार से एक फूल भी नहीं मिला
अजय सिंह बताते हैं कि झारखंड के लिए अजय सिंह अनजान जरूर है. लेकिन, प्रदेश से बाहर निकलते ही अजय सिंह की पहचान एक सेलिब्रिटी की तरह है. कोलकाता में जो सम्मान मिलता है, उसे शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता है. देश के बड़े से बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट में बतौर अतिथि सम्मानित किया जाता है. उपेक्षा के कारण प्रदेश में प्रतिभा होने के बाद भी खिलाड़ी सफल नहीं हो पा रहे हैं. स्टारडम छोड़ कर बोकारो आया, लेकिन सरकार इसका फायदा नहीं लेना चाहती. सम्मान में झारखंड सरकार की ओर से एक फूल भी नहीं दिया गया.
जिसे मेरी पहचान नहीं, उसे समस्या कैसे बताऊं : अजय
अपने ही घर में सरकार की उपेक्षा के शिकार भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बोकारो के अजय सिंह ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि मैं लोकल या डिस्ट्रिक्ट लेवल का खिलाड़ी नहीं था. जो सरकार अपने राज्य के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को नहीं पहचान पायी, उसे समस्या कैसे बतायी जा सकती है? ऐसी सरकार के पास योजना का प्रारूप कैसे बताया जाये. किस मुंह से बताया जाये. प्रदेश की प्रतिभा को ट्रेनिंग देकर निखारने के उद्देश्य से बोकारो आया था. इसके लिए 24 घंटा उपलब्ध हूं. सरकार की योजना भी प्रतिभा निखारने की है. पूर्व खिलाड़ी के इस्तेमाल की भी योजना है. लेकिन, सरकार सिर्फ योजना-योजना खेल रही है.
पैसे की जरूरत नहीं
अजय सिंह ने कहा कि सम्मान को कई लोग पैसा या अन्य चीजों से जोड़ कर देखते हैं. मुझे सम्मान को पैसा से जोड़कर देखना होता तो पश्चिम बंगाल सरकार की लाखों की नौकरी, स्टारडम छोड़ कर बोकारो नहीं आता. मेरा सपना झारखंड की प्रतिभाओं को निखारना है. इसकी शुरुआत एकेडमी के रूप में कर चुका है. यदि सरकार योजना में साथ देती है तो प्रदेश के खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाऊंगा.
सिर्फ फुटबॉल से प्यार है, खिलाड़ी बनाना जानता हूं
अजय सिंह कहते हैं कि सिर्फ फुटबॉल से प्यार है. खिलाड़ी बनाना जानता हूं. मेरा सपना प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल क्लब बनाना है. कई जिला में फुटबॉल एकेडमी की शुरुआत कर चुका हूं. परिणाम भी दिखने लगा है. बच्चों की प्रतिभा बड़े-बड़ों को चुनौती देने लगी है. हाल में ही एकेडमी के बच्चों ने मोहन बगान जूनियर को कड़ी टक्कर दी थी. बोकारो समेत प्रदेश के 200 बच्चों को फुटबॉल की ट्रेनिंग दिया जा रहा है. ट्रेनिंग नो प्रोफिट-नो लॉस के सिद्धांत पर दिया जा रहा है. अजय सिंह बताते हैं कि दो जून की रोटी के लिए बोकारो इस्पात संयंत्र में ठेकेदारी का काम कर रहे हैं.
सरकार गंभीर नहीं
अजय सिंह ने कहा कि बोकारो समेत झारखंड में प्रतिभा की कमी नहीं है. जरूरत है सही आकलन की. सरकार इस ओर गंभीर नहीं है. वर्तमान में सरकार प्रतिभाओं की तलाश में प्रतियोगिता करा रही है, लेकिन सिर्फ सरकारी स्कूल के बच्चों को ही मौका दिया जा रहा है. प्रतिभा की तलाश में सेलेक्टिव नहीं होना चाहिए. प्रदेश के बच्चों में नेचूरल स्टेमिना की कमी नहीं है. यहां की मिट्टी ही प्रेरणादायी है. इसका सही से इस्तेमाल हो जाये, तो यहां से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलेंगे.
फुटबॉल के आगे ना नौकरी, ना पढ़ाई
अजय सिंह ने कहा कि फुटबॉल के आगे कुछ नहीं है. उच्च शिक्षा से लेकर नौकरी तक का त्याग किया. क्लास टेन में ही इस्ट बंगाल क्लब के लिए सेलेक्शन हो गया. इसके बाद फुटबॉल से संबंध गहरा बनता गया. अंडर 16 वर्ल्ड कप खेलने के फौरन बाद बिहार सरकार की ओर से नौकरी का ऑफर मिला, टिस्को ने नौकरी पेशकश की, पश्चिम बंगाल सरकार ने बिजली विभाग में नौकरी देने की बात कही. लेकिन, इन सब को ठुकरा दिया. फुटबॉल के कारण ही बंगाल में ऑडिट ऑफिसर बना. लेकिन इसे भी छोड़ दिया. फुटबॉल मेरी जिंदगी है.
एक नजर में
क्लब साल
इस्ट बंगाल 1992
मोहम्डन स्पोर्टिंग 1993
इस्ट बंगाल 1993
महिंद्रा एंड महिंद्रा 1995
मोहन बगान 1996
इस्ट बंगाल 1997
चर्चिल ब्रदर्स 1999
मोहन बगान 2000
चर्चिल ब्रदर्स 2005
क्लब से टीम इंडिया का सफर
स्कूल इंडिया 1991
सब जूनियर इंडिया 1992
जूनियर इंडिया (कप्तान) 1994
प्री ओलिंपिक 1995
टीम इंडिया (सीनियर) 1996
प्रोफाइल
नाम : अजय सिंह
पिता : आरके सिंह (बीएसएल रिटायर कर्मी)
माता : नुनीबाला देवी (गृहिणी)
वर्तमान पता : सेक्टर 09, स्ट्रीट 01, क्वार्टर 52
स्थायी पता : ग्राम + पोस्ट : अराजु, जरीडीह- बोकारो
…तो अजय सिंह वन मैन आर्मी होगा : भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व प्रशिक्षक रुस्तम अकरमुफा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि यदि भारतीय फुटबॉल टीम को क्रिकेट टीम की तरह ख्याति प्राप्त बनाना है, तो अजय सिंह वन मैन आर्मी साबित होगा. इस टीम में बाइचुंग भुटिया को भी जगह दी गयी थी. अजय सिंह इस वाक्या के साथ अपने गौरवमयी इतिहास व वर्तमान को जोड़ कर मायूस हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में खेल-खिलाड़ी का सम्मान नहीं होता, वहां प्रतिभा तलाशने का अभियान चलाया जा रहा है.
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