क्रोध को जन्म देती है मानव की अपूर्ण कामनाएं : अनंत

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चास: इस भौतिकवादी युग में मनुष्य की आवश्यकताएं बढ़ गयी हैं. कई आवश्यकताएं पूर्ण होती हैं और कई अपूर्ण रह जाती हैं. कामनाएं पूर्ण नहीं होने पर मानव में क्रोध की उत्पत्ति होती है और यह विनाश का कारण बनता है. क्रोध के कारण जीवन आनंदमय नहीं रहता है. यह बातें संत निरंकारी मंडल के […]

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चास: इस भौतिकवादी युग में मनुष्य की आवश्यकताएं बढ़ गयी हैं. कई आवश्यकताएं पूर्ण होती हैं और कई अपूर्ण रह जाती हैं. कामनाएं पूर्ण नहीं होने पर मानव में क्रोध की उत्पत्ति होती है और यह विनाश का कारण बनता है. क्रोध के कारण जीवन आनंदमय नहीं रहता है.

यह बातें संत निरंकारी मंडल के सेवा दल संचालक प्रभारी अनंत कुमार सिन्हा ने रविवार को संत निरंकारी सत्संग भवन सोलागीडीह में आयोजित विशेष सत्संग सभा में कही. उन्होंने कहा कि मानव जीवन को विकसित बनाने के लिए मन में विश्वास होना बहुत जरूरी है. धरती पर सिर्फ काम करने नहीं आये हैं. बल्कि परमात्मा को भी जानने आये हैं. परमात्मा को जानने के लिए लोगों को सद्गुरु की शरण में आना होगा. परमात्मा को प्राप्त करने के लिए मानव जीवन को ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति करना आवश्यक है. इसके बिना जीवन में कुछ भी नहीं मिलता है. ऐसे भी जीवन को सजाने-संवारने के लिए गुरु के शरण में जाना चाहिए. निरंकारी माता के बताये रास्ते पर चलना होगा.

मौके पर जिला संयोजक सह ज्ञान प्रचारक उमाशंकर प्रसाद, इंद्राणी, फुलकुमारी, बिंदु देवी, जगन बाउरी, पंचु महतो, महादेव महतो, दीनदयाल, दिलीप कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
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