झारखंड पुलिस में 14700 पद खाली

रांची: झारखंड पुलिस में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक के करीब 14,700 पद (21}) रिक्त हैं. कुल स्वीकृत पद की संख्या 70,740 (जिला बल के 53333 व जैप के 17407) है. जिला बल में 11472 पद रिक्त हैं. 2010 के बाद से जिला बल में नियुक्ति नहीं हुई है. गृह मंत्रालय की सलाह पर पुलिस […]
रांची: झारखंड पुलिस में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक के करीब 14,700 पद (21}) रिक्त हैं. कुल स्वीकृत पद की संख्या 70,740 (जिला बल के 53333 व जैप के 17407) है. जिला बल में 11472 पद रिक्त हैं. 2010 के बाद से जिला बल में नियुक्ति नहीं हुई है.
गृह मंत्रालय की सलाह पर पुलिस मुख्यालय ने दो साल पहले ट्रांसपैरेंट रिक्रूटमेंट पॉलिसी का प्रारूप सरकार को भेजा था. पर सरकार ने इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है. इस दौरान पुलिस मुख्यालय ने सरकार से पुराने नियम पर ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया. पर सरकार के स्तर पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया. इस कारण सिपाही के रैंक में नियुक्ति नहीं हो पा रही है.
सार्जेट व दारोगा के 1485 पद रिक्त : राज्य में सार्जेट व दारोगा के 3392 पद स्वीकृत हैं. इसमें करीब 1485 पद रिक्त हैं. इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया 2008 में शुरू की गयी थी. 384 पदों के लिए विज्ञापन भी निकला था. उस वक्त पुलिस मुख्यालय के अफसरों ने तय किया था कि दारोगा की नियुक्ति हर साल होगी. पर ऐसा नहीं हुआ. नियुक्ति प्रक्रिया दो साल बाद 2012 में खत्म हुई. पर नियुक्ति में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद फिर से इन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है.
झारखंड आम्र्ड पुलिस (जैप) व इंडिया रिजर्व बटालियन (आइआरबी) के कुल स्वीकृत 17407 के मुकाबले 3228 पद रिक्त हैं. इंस्पेक्टर रैंक में 87, दारोगा रैंक में 171, एएसआइ रैंक में 54, हवलदार रैंक में 530 और सिपाही के 2386 पद रिक्त हैं. जैप-दो, जैप-चार, जैप-छह और जैप- सात में सिपाही के रिक्त पदों को भरने के लिए 2011 में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गयी. पर अभी तक इसका परिणाम सामने नहीं आया. नियुक्ति के लिए गठित समिति के अध्यक्ष को जिला में एसपी बना दिया गया, तो उन्होंने इस पर ध्यान ही नहीं दिया.
जरूरी है ट्रांसपैरेंट रिक्रूटमेंट पॉलिसी
केंद्र सरकार ने राज्यों की पुलिस को ट्रांसपैरेंट रिक्रूटमेंट पॉलिसी (टीआरपी) बनाने की सलाह दी थी. पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान समय में इसकी सख्त जरूरत है, क्योंकि जब नियुक्ति का विज्ञापन निकलता है, तक हर प्रमंडल में एक-एक लाख से अधिक आवेदन आ जाते हैं. उम्मीदवारों की शारीरिक जांच पूरी करने में छह माह से अधिक वक्त लग जाता है. चूंकि प्रक्रिया में सभी जिलों के एसपी शामिल होते हैं, इसलिए जिलों में लॉ एंड ऑर्डर समेत का कई अन्य कार्यो में परेशानी होने लगती है. टीआरपी के प्रस्ताव में पहले लिखित परीक्षा लेने का प्रावधान है. इसमें सफल उम्मीदवारों के मेरिट लिस्ट से रिक्त पद के तीन गुना आवेदकों की शारीरिक जांच की जायेगी. टीआरपी में विशेष चीप की मदद से शारीरिक जांच करने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि गड़बड़ी करने की गुंजाइश न रहे.
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