कौन बनेंगी दिल्ली की मेयर? कल मतदान, एलजी और दिल्ली सरकार में फिर ठनी
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 05 Jan 2023 6:15 PM
मेयर पद के लिए कल यानी छह जनवरी को चुनाव होना है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि आम आदमी पार्टी मेयर पद पर भी अपना कब्जा चाहती है.
दिल्ली एमसीडी इलेक्शन में आम आदमी पार्टी ने अपना झंडा बुलंद करते हुए बहुमत हासिल कर लिया और 15 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा को पटखनी दे दी है. लेकिन अभी यह तय होना बाकी है कि दिल्ली एमसीडी का मेयर कौन होगा? मेयर पद के लिए छह जनवरी को मतदान होगा.
मेयर पद के लिए कल यानी छह जनवरी को चुनाव होना है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि आम आदमी पार्टी मेयर पद पर भी अपना कब्जा चाहेगी. आप ने एमसीडी चुनाव में 134 सीट जीतकर बहुमत हासिल किया है, जबकि भाजपा को 104 सीटें मिलीं हैं. दिल्ली में इस बार कोई महिला उम्मीदवार ही मेयर बनेंगी.
मेयर पद के लिए सुबह 11 बजे से मतदान होगा. मेयर के साथ-साथ कल डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव भी होना है. इसके लिए तैयारी पूरी हो गयी है. जानकारी के अनुसार कल के चुनाव में तीन रंग के बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जायेगा. भाजपा ने रेखा गुप्ता को मेयर पद के लिए उम्मीदवार बनाया है, जबकि आप ने शैली ओबेराॅय को अपना उम्मीदवार बनाया है. डिप्टी मेयर के लिए भाजपा की ओर से कमल बागड़ी और आम आदमी पार्टी की ओर से आले मोहम्मद इकबाल चुनावी मैदान में हैं.
रेखा गुप्ता भाजपा की नेत्री हैं और वे पूर्व में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष और जेनरल सेक्रेटरी रह चुकी हैं. वे पार्टी की दिल्ली शाखा की जेनरल सेक्रेटरी भी हैं. वहीं शैली ओबेरॉय पश्चिमी दिल्ली के पूर्वी पटेल नगर वार्ड की पार्षद हैं. वह दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत भी हैं.
मेयर पद के चुनाव को लेकर भी एलजी और दिल्ली सरकार में ठन गयी है और दोनों आमने-सामने हैं. वजह यह है कि एलजी विनय कुमार सक्सेना ने मेयर चुनाव के लिए भाजपा की पार्षद सत्या शर्मा को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया है. सत्या शर्मा को पीठासीन पदाधिकारी बनाने से दिल्ली सरकार नाराज है, क्योंकि सरकार की ओर से पीठासीन अधिकारी के लिए आम आदमी पार्टी के पार्षद मुकेश गोयल के नाम का प्रस्ताव उपराज्यपाल को भेजा गया था. इसी वजह से एलजी और दिल्ली सरकार एक बार फिर आमने-सामने है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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