Timarpur Assembly Election Result 2025: बीजेपी ने मारी बाजी, आप के किले को किया ध्वस्त
तिमारपुर विधानसभा सीट
Timarpur Vidhan Sabha Chunav Result 2025: तिमारपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है. भाजपा ने आप के किले को ध्वस्त कर दिया है. भाजपा ने इस सीट पर 10000 से अधिक वोट के अंतर से जीत दर्ज की.
Timarpur Assembly Election Result 2025: तिमारपुर विधानसभा क्षेत्र पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हो गया है. भाजपा के सूर्यप्रकाश खत्री ने आप के सुरिंदर पाल सिंह बिट्टू को हराकर आप के किले में सेंधमारी कर दी है. इस सीट पर 2013 से आप का कब्जा है. भाजपा के प्रत्याशी ने इस बार 55941 वोट लाए. आप पार्टी 54773 वोट के साथ दूसरे नंबर पर है. कांग्रेस यहां भी तीसरे नंबर पर रही. कांग्रेस को 8361 वोट से संतोष करना पड़ा.
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट |
| सुरिंदर पाल सिंह बिट्टू | आप | 54773 |
| सूर्य प्रकाश खत्री | बीजेपी | 55941 |
| लोकेंद्र चौधरी | कांग्रेस | 8361 |
रोचक है 2025 का त्रिकोणीय मुकाबला
दिल्ली विधानसभा चुनाव का मुकाबला इस बार पूरी तरह से त्रिकोणीय मुकाबला है. आप और कांग्रेस के बीच खटपट की वजह से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. इस खटपट का फायदा इस बार के चुनाव में बीजेपी को मिल सकता है. आप ने पूर्व कांग्रेसी सुरिंदर पाल सिंह बिट्टू को टिकट दिया है, जो दो बार इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं. इस बार उनका मुकाबला बीजेपी के सूर्य प्रकाश खत्री से होगा. बताया जा रहा है कि मुकाबला कांटे का होगा. कांग्रेस जो इस सीट पर तीन बार जीत दर्ज कर चुकी है वो किसी भी तरह इस सीट पर कब्जा चाहती है और कांग्रेस ने लोकेंद्र चौधरी को मैदान में उतारा है.
कभी कांग्रेस का गढ़ था तिमारपुर विधानसभा क्षेत्र
दिल्ली में पहली बार विधानसभा चुनाव 1993 में हुए और अबतक सात बार यहां विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. 1993 में यहां से बीजेपी नेता राजेंद्र गुप्ता विधायक चुने गए थे. उसके बाद यहां लगातार तीन बार यानी 1998, 2003 और 2008 में कांग्रेस पार्टी चुनाव जीती.उसके बाद 2013, 2015 और 2020 में आम आदमी पार्टी चुनाव जीती है. लेकिन तीनों ही चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बदल दिया. 2013 में यहां से हरीश खन्ना, 2015 में पंकज पुष्कर और 2020 में दिलीप पांडेय चुनाव जीते थे.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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