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हर महिला के अंदर होती है अपार शक्ति : मधुबाला

एक महिला अगर किसी की पत्नी है, तो किसी की बहन और बेटी भी है. मां तो है ही. उसके भी अपने सपने होते हैं. ज्यादातर महिलाओं के सपने पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से पूरे नहीं हो पाते, मगर कुछ महिलाए अपने सपनों को मरने नहीं देतीं और उसे साकार करके समाज की प्रेरणा बन जाती हैं.

नई दिल्ली : समय के साथ कई बार समझौता करना पड़ता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि महिलाएं कमजोर होती हैं. हर महिला के अदंर अपार शक्ति होती है. वह साक्षात शक्तिस्वरूपा है. हर महिलाएं अपने सपने को पूरा कर सकती हैं. यह बात एक बार नहीं, कई बार सच हुई है. यह कहना है हाल ही में फैशन के रैम्प वाक पर अपने सपने को नई उंचाई देने वाली दिल्ली की मधुबाला की.

एक सवाल के जवाब में मधुबाला ने बताया कि कॉलेज के दिनों से ही फैशन की दुनिया उन्हें रोमांचित करती रही. परिस्थितियों के कारण सबसे पहले उन्होंने सरकारी नौकरी हासिल की. उसके बाद शादी और फिर परिवार की जिम्मेदारी. आज दो सुंदर बेटियों की मां है और संयुक्त परिवार में सबके साथ रहती हैं. वो कहती हैं कि जब आप परिवार में होती हैं, तो एक और एक दो नहीं, बल्कि 11 होते हैं. हमारे परिवार ने मुझे पूरा सहयोग दिया और उसी का असर है कि मैं डेजल मिसेज इंडिया यूनिवर्स 2023 एलिट का ताज का हासिल करने में सफल रही.

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मधुबाला ने बताया कि जो भी महिला किसी कारणवश अपने सपने को पूरा नहीं कर पाईं हों, तो उन्हें मायूस नहीं होना चाहिए. हमारी उन सभी से यही कहना है कि अपने संबंधों के प्रति ईमानदार रहें. पूरी पारदर्शिता के साथ अपने परिवार में बात करें, यकीन मानिए हर कोई आपके सपने को पूरा करने में अपना योगदान दिया. भविष्य की योजना को लेकर मधुबाला ने कहा कि हमने एक नई मुकाम हासिल की है. आगे भी इस पर बढ़ती रहूंगी.

KumarVishwat Sen
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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