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रामेश्वरम की तर्ज पर बिहार में बन रहा विराट रामायण मंदिर, ढाई वर्षों में हो जायेगा तैयार

Updated at : 02 May 2022 6:40 PM (IST)
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रामेश्वरम की तर्ज पर बिहार में बन रहा विराट रामायण मंदिर, ढाई वर्षों में हो जायेगा तैयार

यह देश ही नहीं, दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र होगा, जो पर्यटन की दृष्टि से भी कारगर साबित होगा. मंदिर का कार्य आरंभ मंगलवार को बिहार न्याय परिषद के अध्यक्ष सह आचार्य किशोर कुणाल करेंगे. मंदिर के आगे शिवलिंग स्थापित होगा.

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मोतिहारी. पूर्वी चंपारण के केसरिया प्रखंड स्थित कैथवलिया में टावर ऑफ टैम्पल्स की परिकल्पना को विराट रामायण मंदिर के रूप में रामेश्वर मंदिर के तर्ज पर उतारा जायेगा. इसमें 15 शिखर होंगे, जिसमें सबसे ऊंची शिखर 270 फुट की होगी. यह देश ही नहीं, दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र होगा, जो पर्यटन की दृष्टि से भी कारगर साबित होगा. मंदिर का कार्य आरंभ मंगलवार को बिहार न्याय परिषद के अध्यक्ष सह आचार्य किशोर कुणाल करेंगे. मंदिर के आगे शिवलिंग स्थापित होगा. उसके पीछे भगवान राम पूजा करने के मुद्रा में रहेंगे. दाहिनी ओर हनुमान जी झुके हुए मुद्रा में होंगे.

पटना श्री महावीर स्थान न्यास समिति कर रही है मंदिर का निर्माण

आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि मूर्तियों से 200 फुट सामने अशोक वाटिका जैसी मंदिर होगी, जिसमें माता सीता विरजमान होगी. उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ डीएम शीर्षत कपिल अशोक व अन्य अधिकारियों का सहयोग मिल रहा है. इस मंदिर का निर्माण पटना श्री महावीर स्थान न्यास समिति कर रही है.

भूमि पूजन 21 जून 2012 को किया गया था

भूमि पूजन 21 जून 2012 को किया गया था. मंदिर परिसर की लंबाई 2800 फुट और चौड़ाई 1500 फुट होगी. मुख्य द्वारा 1240 फुट लंबा, 1150 फुट चौड़ा और 270 फुट उंचा होगा. मंदिर में भगवान राम जी के साथ-साथ सीता जी, लव-कुश एवं महर्षि वाल्मिकी की मूर्ति के साथ अन्य देवी-देवाताओं के मूर्ति स्थापित होंगे. 18 देवता घर व 18 शिखर होंगे.

250 एमटी ब्लैक ग्रेनाइट के एक ही चट्टान से बनेगा सहस्त्र लिंगम

कैथवलिया में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग स्थापित होंगे. इसके लिए कन्या कुमारी से ब्लैक ग्रेनाइट के 250 एमटी का एक ही चट्टान खरीद कर चेन्नई के महाबलीपुरम में भेजा गया है. वहां चट्टान तरासने के बाद 200 एमटी का सहस्त्र लिंगम का आकार लेगा, जिसमें 108 शिवलिंग विराज रहेंगे, जो मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित होगा. 1400 वर्षों के बाद विश्व के केसरिया में सहस्त्र लिंगम की स्थापना की जाएगी.

कैथवलिया से पूर्व हाजीपुर व सीतामढ़ी में भी देखी थी जमीन

आचार्य किशोर कुणाल ने पूछने पर बताया कि हनुमान जी की विराट स्वरूप की स्थापना के लिए हाजीपुर व सीतामढ़ी में जमीन देखी, लेकिन उसके अनुरूप कैथवलिया में मिला. अभी किसी से चंदा नहीं लिया जा रहा है. महंगाई के समय में अगर जरूरत पड़ी तो बैंक अकाउंट व कूपन जारी किया जायेगा. मंदिर में जमीन दान करने वाले, बदलने वाले या बेचने वालों के अलावा अन्य दाताओं का नाम कृति स्तंभ में अंकित होगा.

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