गुजरा नहीं है गुड़ही जलेबी का जमाना

Updated at : 18 Nov 2016 3:41 AM (IST)
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गुजरा नहीं है गुड़ही जलेबी का जमाना

सोनपुर : सोनपुर मेंले में गुड़ही जलेबी का जमाना अभी गुजरा नहीं है. अगर आप सोनपुर मेला घूमने आये हो और गुड़ वाली जलेबी खाए बिना मेला से वापस चले गये तो जनाब समझिये कि आपने बहुत बड़ी गलती की.जी हां, मेला चाहे जितना आधुनिक हो गया हो,मगर आज भी मेला में बिकने वाली गुड़ […]

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सोनपुर : सोनपुर मेंले में गुड़ही जलेबी का जमाना अभी गुजरा नहीं है. अगर आप सोनपुर मेला घूमने आये हो और गुड़ वाली जलेबी खाए बिना मेला से वापस चले गये तो जनाब समझिये कि आपने बहुत बड़ी गलती की.जी हां, मेला चाहे जितना आधुनिक हो गया हो,मगर आज भी मेला में बिकने वाली गुड़ की जलेबी की खुशबू हर किसी के मुंह में पानी ला देता है.इस बार भी मेला में दर्जनों जगह गुड़ वाली जलेबी की दुकानें सजी हैं जहां ग्राहकों की भीड़ दिखती है.आम से लेकर खास लोग इस लजीज जलेबी का स्वाद लेना नहीं भूलते हैं.

गरीब से लेकर अमीर लोग भी जलेबी खाने का मौका नहीं गवां रहे है. 50 साल पहले चार अने पौआ खालेरे बउआ कहकर बेची जाने वाली यह जलेबी अब 50 से 70 रूपये प्रति किलो बिक रही है.

मेले में चिड़िया बाजार मोड़, लकड़ी बाजार, लोहा बाजार होते हुए नखास चौक तक तथा इधर चिड़िया बाजार के सामने मेन सड़क पर जलेबी की पांच दर्जन से अधिक दुकानें सजी हुई है. गांवों से आने वाले लोग इसे बड़े चाव से खरीदते और खाते है. लोग हरिहरक्षेत्र मेले के प्रसाद के रूप में इसे अपने घर भी ले जाना नहीं भुलते. सीवान जिले के जलेबी बेचने आये विक्रम साह बताते है कि यहां चिनी वाले जलेबी से ज्यादा गुड़ वाली जलेबी को मेला घूमने आने वाले लोग पसंद करते है.

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