क्या किसी बड़ी घटना का है इंतजार

Updated at : 15 Jul 2016 6:35 AM (IST)
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क्या किसी बड़ी घटना का है इंतजार

चिंताजनक. न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में हैं कई खामियां हाजीपुर : क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी अापराधिक घटना की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसके बाद समाहरणालय और व्यवहार न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाये. पहले मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय परिसर और छपरा व्यवहार न्यायालय फिर उसके बाद सासाराम में घटित घटनाओं के […]

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चिंताजनक. न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में हैं कई खामियां

हाजीपुर : क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी अापराधिक घटना की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसके बाद समाहरणालय और व्यवहार न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाये. पहले मुजफ्फरपुर व्यवहार न्यायालय परिसर और छपरा व्यवहार न्यायालय फिर उसके बाद सासाराम में घटित घटनाओं के बाद यह सवाल काफी प्रासंगिक हो गया है.
राज्य के किसी कोने में न्यायालय परिसर में किसी अापराधिक घटना के बाद जिला प्रशासन कुछ दिनों तक तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकस दिखता है, लेकिन फिर अपने पुराने ढर्रे पर चल पड़ता है. कुछ दिनों तक आने-जाने वालों की जांच और परख होती है और घटना के पुराना होते ही प्रशासन अपने रूटीन कार्य में व्यस्त हो जाता है और परिसर में लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है.
क्या है सुरक्षा व्यवस्था : छपरा की घटना के बाद पटना उच्च न्यायालय की फटकार के बाद व्यवहार न्यायालय परिसर के दोनों परिसर की सुरक्षा की व्यवस्था की गयी है. कारगिल परिसर में गेट पर पुलिस बल तैनात किया गया है और मेटल डिटेक्टर गेट भी लगाया गया है. लेकिन पुराने परिसर में कोई भी व्यक्ति कहीं भी जा सकता है, कोई रोकनेवाला नही है. इस परिसर में प्रवेश के लिए कई रास्ते हैं लेकिन केवल सीजेएम के कार्यालय के पास पुलिस बल तैनात रहता है. दक्षिणी परिसर में पर्याप्त चहारदीवारी नहीं होने और एक प्रवेश द्वार नहीं होने के कारण पुलिस के सामने परेशानी यह है कि कहां और कैसे जांच की जाये.
धीमी गति से बन रहा गेट : दक्षिणी परिसर में मुख्य सड़क से प्रवेश करनेवालों की जांच के लिये सीजेएम के गेट के पास एक गेट धीमी गति से बन रहा है, जो इस शायद इस साल पूरा हो जाये. यहां कुछ पुलिस बल तैनात किये गये हैं. इस परिसर में वाहनों के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है और परिसर की सड़कों पर इस कदर दो पहिया वाहन लगे होते हैं कि किसीआपात स्थिति में कोई चाह कर भी नहीं दौड़ सकता है.
अनधिकृत वाहनों के प्रवेश पर है रोक : पिछले दिनों जब कारगिल परिसर के हाजत के निकट बम विस्फोट हुआ था उसके बाद विधिज्ञ संघ के साथ बैठक कर न्यायालय प्रशासन ने कहा था कि परिसर के अंदर केवल कर्मचारी और अधिवक्ताओं के ही वाहन प्रवेश कर सकेंगे. इस निर्णय के आलोक में प्रवेश द्वार पर एक अनुसेवी और दो गृह रक्षकों की तैनाती की गयी थी. इस दौरान परिसर में विधि-व्यवस्था बनी रहती थी. अनधिकृत वाहन का प्रवेश निषेध रहने के कारण गाड़ियों की भीड़ भी नहीं दिखती थी. न्यायालय प्रशासन ने कारगिल परिसर के लिए तो इसे सख्ती से अमल किया लेकिन दक्षिणी परिसर की स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही.
कभी हो सकती है कोई घटना : परिसर की सुरक्षा व्यवस्था देखते हुए सहज ही अंदाजा लगा सकता है कि कोई भी आदमी जब चाहे किसी अापराधिक घटना को अंजाम देकर आसानी से चला जायेगा. दक्षिणी परिसर में बेरोक-टोक प्रवेश और कैदी हाजत के पास लगने वाली भीड़ को देखते हुए यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां कभी कोई घटना को अंजाम देकर आसानी से निकल सकता है.
कई बार हुई हैं घटनाएं : वर्ष 2014 में व्यवहार न्यायालय के कारगिल परिसर में स्थित हाजत के निकट ताबड़तोड़ कई बम विस्फोट हुए थे. उस घटना में भले ही कोई हताहत नहीं हुआ था, लेकिन कई लोग जख्मी हुए थे और कई कैदी फरार हो गये थे. इसके अलावा छोटी-बड़ी मारपीट की घटना होते रहती है, जिसे देखनेवाला परिसर में कोई नहीं है.
हर घटना के बाद कुछ दिनों के लिए सजग होता है प्रशासन
कैदी हाजत के निकट लगता है जमावड़ा
न्यायालय परिसर में स्थित कैदी हाजत के ऊपर हुई बमबारी की घटना को जेल पुलिस और जिला पुलिस के जवानों ने इस कदर भुला दिया कि यहां हर समय मुलाकातियों की भीड़ लगी रहती है. ये मुलाकाती कैदियों के लिए सामान भी देते हैं जिसे तैनात कर्मी बगैर किसी जांच-पड़ताल के कैदी वाहन में डाल लेते हैं, जो कभी किसी बड़ी घटना का कारण बन सकता है. इस दौरान कुछ कर्मी केवल वसूली में व्यस्त रहते हैं.
कहीं नहीं है सीसीटीवी
पिछले दिनों एसपी ने जिले के सभी विद्यालयों एवं बैंक प्रतिनिधियों के साथ बैठक में सभी संस्थानों से सीसीटीवी लगाने का अनुरोध किया था और उसके बाद कई संस्थानों ने अपने परिसर की सुरक्षा के लिये सीसीटीवी कैमरे लगाये गये, लेकिन व्यवहार न्यायालय परिसर में कहीं भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है.
जिससे किसी घटना के बाद उसके साक्ष्य मिल सके.
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