दुष्कर्म के दो आरोपितों को 20 साल का सश्रम कारावास
Updated at : 06 Feb 2016 7:21 AM (IST)
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हाजीपुर : नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के दो आरोपितों को न्यायालय ने 20 साल के सश्रम कारावास और 70 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनायी है. अर्थदंड से प्राप्त राशि पीड़िता को दी जायेगी. जंदाहा थाना कांड संख्या- 56/15 की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश प्रथम सह विशेष न्यायधीश पॉक्सो […]
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हाजीपुर : नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के दो आरोपितों को न्यायालय ने 20 साल के सश्रम कारावास और 70 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनायी है. अर्थदंड से प्राप्त राशि पीड़िता को दी जायेगी. जंदाहा थाना कांड संख्या- 56/15 की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश प्रथम सह विशेष न्यायधीश पॉक्सो बीके तिवारी ने यह सजा सुनायी.
क्या है घटना : गत वर्ष 29 मार्च को राष्ट्रीय राजमार्ग 103 पर जंदाहा थाना क्षेत्र के हरप्रसाद गांव में स्थित पेट्रॉल पंप के निकट स्थित एक दुकानदार की नाबालिग पुत्री के साथ कुछ लोगों ने तब सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था, जब वह शौच करने गयी, तभी पूर्व से घात लगाये दुष्कर्मियों ने उसे अपना शिकार बनाया था. देर होने पर जब पीड़िता के पिता ने जाकर देखा तब वह वहां बेहोश पड़ी थी. पीड़िता के बताने पर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने गांव के ही विजय राय, संतोष कुमार उर्फ जेसीबी एवं मुनचुन साह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जो फैसले की तिथि तक जेल में हैं.
दो को सजा और एक आरोपमुक्त : मामले में जिन तीन लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया और पुलिस ने उनके विरुद्ध आरोप पत्र भी समर्पित किया था, उनमें से केवल दो विजय राय और संतोष कुमार उर्फ जेसीबी को न्यायालय ने दोषी पाया और सजा सुनायी, जबकि मुनचुन साह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया. दोनों को भादवि की धारा376 डी के अपराध के लिए 20-20 साल सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड एवं अर्थदंड न देने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास, धारा 341 के अपराध के लिए एक माह का कारावास, धारा 323 के लिए छह माह का कारावास और पॉक्सो की धारा छह के अंतर्गत अपराध के लिए 10 साल सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. सभी सजाएं एक साथ चलेंगी.
मिला एक लाख रुपये का अनुतोष : न्यायालय ले पीड़िता को एक लाख रुपये अनुतोष देने का आदेश राज्य सरकार को दिया है. विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि पॉक्सो की धारा सात के अंतर्गत त्यायालय ने पीड़िता को एक लाख रुपये देने का आदेश दिया है. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव को आदेश की प्रति उपलब्ध करा दी गयी है. इसके साथ ही अभियुक्तों को दिये गये अर्थदंड की राशि भी पीड़िता को दी जायेगी.
केवल सात माह में हुई सुनवाई : गत वर्ष 29 मार्च को घटित इस घटना में न्यायालय ने 29 जून को संज्ञान लिया था और त्वरित विचारण कर न्यायालय ने केवल सात माह में फैसला सुनाया. विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 10 साक्षियों के साक्ष्य कराये.
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने पैरवी की.
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