छात्रावास का सपना अधूरा

Updated at : 03 Feb 2016 3:50 AM (IST)
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छात्रावास का सपना अधूरा

अति पिछड़े समुदाय के छात्र-छात्राओं को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास निर्माण की योजना बनायी गयी थी. इस योजना की शुरुआत वर्ष 2008-09 में की गयी थी. योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में 100 बेड वाले छात्रावास का निर्माण किया जाना है. योजना शुरू […]

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अति पिछड़े समुदाय के छात्र-छात्राओं को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास निर्माण की योजना बनायी गयी थी. इस योजना की शुरुआत वर्ष 2008-09 में की गयी थी. योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में 100 बेड वाले छात्रावास का निर्माण किया जाना है.

योजना शुरू होने से अति पिछड़े समुदाय से आने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं के बीच यह उम्मीद जगी कि आगे की पढ़ाई-लिखाई के लिए अब उनकी राह आसान होगी. गांव में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद शहर में जाकर कॉलेज की पढाई एवं अन्य तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए अब साधनहीनता आड़े नहीं आयेगी. लेकिन जिला प्रशासन की उपेक्षा के कारण यह योजना पिछले चार सालों से फाइलों में दम तोड़ रही है.

हाजीपुर : जिले में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लाने के प्रति जिला प्रशासन गंभीर नहीं है. प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है कि जिले में अभी तक जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास की स्थापना नहीं हो सकी. जिला प्रशासन की उपेक्षा के कारण यह योजना पिछले चार सालों से फाइलों में दम तोड़ रही है.
लंबे समय तक तो जमीन की उपलब्धता के नाम पर इसे टाला जाता रहा, लेकिन जब जमीन मिल गयी, तब भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा.
योजना शुरू होने के सात साल बाद भी नहीं हुआ काम : राज्य सरकार द्वारा अति पिछड़े समुदाय के छात्र-छात्राओं को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास निर्माण की योजना बनायी गयी थी. योजना शुरू होने से अति पिछड़े समुदाय से आने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं के बीच यह उम्मीद जगी कि आगे की पढ़ाई-लिखाई की राह आसान होगी. लेकिन वैशाली जिला प्रशासन की बेरूखी ने उनकी उम्मीदों को सुला दिया है.
योजना शुरू होने के सात साल बाद भी छात्रावास का निर्माण नहीं होने से जिले के छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरी मायूसी है.
राशि और भूमि उपलब्ध, लेकिन इच्छाशक्ति का अभाव : जिले में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास योजना की दो करोड़ रुपये की राशि तीन सालों से पड़ी हुई है. छात्रावास निर्माण के लिए जमीन की भी व्यवस्था हो चुकी है.
इसके बावजूद यह काम ठंडे बस्ते में है. लगभग दो साल पहले ही सदर अंचल के अंचलाधिकारी द्वारा जानकारी दी गयी थी कि नगर स्थित सर्किट हाउस के बगल में गंडक प्रोजेक्ट के निकट डेढ़ एकड़ जमीन की व्यवस्था की गयी है. बताया गया था कि पुल निर्माण निगम की उक्त जमीन पर 75 डिसमिल में कर्पूरी ठाकुर छात्रावास तथा 75 डिसमिल में जगजीवन राम छात्रावास का निर्माण कराया जायेगा. सरकारी बैठकों में भी यह मुद्दा उठाया जाता रहा,
जिस पर काम शीघ्र शुरू कराने की बात कही गयी. आज तक लोग इंतजार ही करते रह गये. विगत तीन वर्षों के भीतर कई बार राज्य सरकार के तत्कालीन मंत्री रमई राम ने खुद शिलान्यास करने का आश्वासन दिया. जिले के प्रभारी मंत्री द्वारा भी इस संबंध में डीएम को निर्देश दिये गये. नतीजा कुछ नहीं निकला.
क्या कहते हैं लोग
जिला प्रशासन के पास तीन वर्षों से छात्रावास निर्माण के लिए राशि पड़ी है. प्रशासन की उदासीनता के कारण इस पर काम शुरू नहीं हो रहा. तत्कालीन मंत्री की घोषणा पर भी अमल नहीं हुआ.
नवीन कुमार, लालगंज
जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास की स्थापना होने से जिले के अतिपिछड़े समाज से आने वाले कम-से-कम दो सौ छात्रों को आवासीय सुविधा उपलब्ध होगी. इससे छात्रों को पढ़ाई-लिखाई और कैरियर बनाने में काफी सहूलियत होगी.
गोरखनाथ महतो, हाजीपुर
दबे-कुचले और कमजोर वर्ग के निर्धन एवं मेधावी छात्र शहर में आवासीय सुविधा के अभाव में आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते. सरकार की यह योजना ऐसे छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है. अफसोस है कि प्रशासन का इस पर ध्यान नहीं है.
प्रताप चंद्रवंशी, राजापाकर
अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा. दलित, महादलित, पिछड़े, अतिपिछड़े एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए चलायी जा रही योजनाओं को प्रशासन को गंभीरता पूर्वक लागू करना चाहिए.
सुनील कुमार साह, जंदाहा
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