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जाड़े में संरक्षित रेल परिचालन के लिए होंगी अतिरिक्त सावधानियां

Updated at : 04 Dec 2019 7:28 AM (IST)
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जाड़े में संरक्षित रेल परिचालन के लिए होंगी अतिरिक्त सावधानियां

हाजीपुर : जाड़े के मौसम में संभावित कुहरे के मद्देनजर पूर्व मध्य रेल द्वारा संरक्षित ट्रेन परिचालन की दिशा में कई कदम उठाये जा रहे हैं जिससे कि कोहरे के दौरान कम से कम गाड़ियां प्रभावित हो और यात्रियों को परेशानी ना हो. इसके लिए इंजनों में फॉग सेफ डिवाइस लगाया गया है. ट्रेनों के […]

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हाजीपुर : जाड़े के मौसम में संभावित कुहरे के मद्देनजर पूर्व मध्य रेल द्वारा संरक्षित ट्रेन परिचालन की दिशा में कई कदम उठाये जा रहे हैं जिससे कि कोहरे के दौरान कम से कम गाड़ियां प्रभावित हो और यात्रियों को परेशानी ना हो.

इसके लिए इंजनों में फॉग सेफ डिवाइस लगाया गया है. ट्रेनों के सुचारू परिचालन हेतु पूर्व मध्य रेल के मेल/एक्सप्रेस एवं पैसेंजर ट्रेनों के लोको पायलटों के लिए 1630 फॉग सेफ डिवाइस का प्रावधान किया गया है.फॉग सेफ डिवाइस जीपीएस आधारित एक उपकरण है जो लोको पायलट को आगे आने वाली सिगनल की चेतावनी देता है जिससे लोको पायलट टेªनों की स्पीड को नियंत्रित करते हैं.
इसके अतिरिक्त फॉग मैन भी तैनात किये जा रहे हैं जो कुहरे के दौरान रेल लाइन पर सिग्नल की स्थिति की निगरानी करेंगे. रेल फ्रैक्चर से बचाव एवं समय पर इसकी पहचान के लिए उच्चाधिकारियों की निगरानी में रेलकर्मी द्वारा निरंतर पेट्रोलिंग की जानी है. इससे एक ओर जहां संरक्षा में वृद्धि होगी वहीं कोहरे के बावजूद समय-पालन बनाए रखने में मदद मिलेगी.
सिग्नलों की दृश्यता को बढ़ाने के लिए सिग्नल साइटिंग बोर्ड, फॉग सिग्नल पोस्ट, ज्यादा व्यस्त समपार के लिफ्टिंग बैरियर आदि को एक विशेष रंग काला एवं पीला रंग से रंगकर उसे चमकीला बनाया गया है. सिगनल आने के पहले रेल पटरी पर सफेद चूने से निशान बनाया गया है, ताकि लोको पायलट कुहासे वाले मौसम में सिग्नल के बारे में अधिक सतर्क हो जायें.
घने कुहरे में स्टॉप सिग्नल की पहचान हेतु स्टॉप सिग्नल से पहले एक विशेष पहचान चिन्ह ‘‘सिगमा शेप्स‘‘ का प्रावधान किया जा रहा है ताकि चालक को स्टॉप सिगनल की जानकारी आसानी से प्राप्त हो सके. लोको पायलटों को प्रत्येक स्टेशनों का ‘फस्र्ट स्टॉप सिग्नल लोकेशन‘ किलोमीटर चार्ट उपलब्ध कराया जा रहा है.
जिसके प्रयोग से चालक यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि अगले कितनी दूरी पर ट्रेन को रोकना है और इसके अनुसार वे ट्रेन की गति नियंत्रित करेंगे. शीतकाल में सुगम ट्रेन परिचालन हेतु बरती जाने वाली इन कदमों की जानकारी देने के लिए ट्रेन परिचालन से सीधे रूप से जुड़े रेलकर्मियों को संरक्षा सलाहकारों द्वारा कांउसिलिंग भी की जा रही है.
सभी स्टेशन मास्टरों तथा लोको पायलटों को निर्देश दिया गया है कि कुहासा होने पर इसकी सूचना तत्काल नियंत्रण कक्ष को दी जाये. इसके बाद दृश्यता की जांच वीटीओ (विजुविलिटी टेस्ट ऑब्जेक्ट) से करें. दृश्यता बाधित होने की स्थिति में लोको पायलट ट्रेन के ब्रेक पावर, लोड और दृश्यता की स्थिति के आधार पर गाड़ी की गति को नियंत्रित करें .
पूर्व मध्य रेल में रेल गाड़ियों की अधिकतम स्वीकृत गति लगभग 130 किमी प्रति घंटे के आस-पास है, लेकिन लोको पायलटों को निर्देश दिया गया है कि कुहासा होने पर वे गाड़ियों को 75 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से न चलायें. समपार फाटक पर तैनात गेटमैन एवं आम लोगों तक ट्रेन गुजरने की सूचना मिल सके इसलिए ट्रेन के चालक समपार फाटक के काफी पहले से लगातार हॉर्न देंगे ताकि यह पता चल सके कि समपार फाटक से ट्रेन गुजरने वाली है.
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