व्रतियों ने ग्रहण किया खरने का प्रसाद, अस्ताचलगामी सूर्य को आज अर्घ देंगे व्रती
Updated at : 11 Apr 2019 12:23 AM (IST)
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छपरा : सूर्योपासना व छठी माता की पूजा-अर्चना के कठिन लोक महापर्व चैती छठ को लेकर स्थानीय बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में चहल-पहल बढ़ गयी है. छठव्रतियों की ओर से छठ पूजा की खरीदारी को लेकर बाजार में भी काफी चहल-पहल दिख रही है. नहाय-खाय का अनुष्ठान पूरा करने के साथ ही चार दिवसीय […]
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छपरा : सूर्योपासना व छठी माता की पूजा-अर्चना के कठिन लोक महापर्व चैती छठ को लेकर स्थानीय बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में चहल-पहल बढ़ गयी है. छठव्रतियों की ओर से छठ पूजा की खरीदारी को लेकर बाजार में भी काफी चहल-पहल दिख रही है. नहाय-खाय का अनुष्ठान पूरा करने के साथ ही चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत हो गयी है. बुधवार की शाम में छठव्रतियों ने भक्तिभाव से पूजा कर खरने का प्रसाद किया.
व्रतियों ने स्वजनों के सुख व समृद्धि की कामना की. इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास भी शुरू हो गया. गुरुवार को छठव्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ देंगे. वहीं शुक्रवार की सुबह व्रती उदीयमान सूर्य को अर्घ देंगे और भगवान भास्कर से खुशहाली की कामना करेंगे. वहीं छठ के गीत गूंजने से माहौल भक्तिमय हो गया.
घाटों की सफाई में जुटे लोग
शहर के राजेंद्र सरोवर की सफाई नगर निगम द्वारा करायी गयी है, जहां छठ व्रती अर्घ देंगे. गंगा, सरयू समेत विभिन्न घाटों पर युवाओं की टोली साफ-सफाई में लगी हुई है. वहां आपस में चंदा कर लोग प्रकाश की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं. सर्वाधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों के छठव्रतियों को झेलनी पड़ेगी. जिले के प्रखंडों व गांवों में स्थित लगभग सभी तालाब सूख चुके हैं, जहां छठव्रती पहले अर्घ देते थे. इस बार अर्घ कहां देंगे, इसकी समस्या को देखते हुए ग्रामीण युवक व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं.
पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना के लिए की जाती है छठ
वहीं, ताजपुर फुलवरिया गांव निवासी व ज्योतिषाचार्य डॉ. (प्रो.) विवेकानंद तिवारी बताते हैं कि मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है. यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत में और दूसरी बार कार्तिक में. चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले पर्व को कार्तिक छठ कहा जाता है. पारिवारिक सुख-समृद्धि व मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है.
बताते हैं कि स्त्री व पुरुष दोनों समान रूप से इस पर्व को मनाते हैं. भगवान सूर्य की उपासना के साथ छठ पर्व की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में किसी भी पर्व की शुरुआत स्नान के साथ ही होती है. इसलिए यह पर्व भी पहले दिन स्नान यानी ‘नहाय-खाय’ के साथ शुरू होता है. चैत व कार्तिक महीने में छठ मानने का विशेष महात्म्य भी है.
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