छात्र बोले, एमडीएम बेस्वाद

Updated at : 29 Nov 2017 6:01 AM (IST)
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छात्र बोले, एमडीएम बेस्वाद

असंतोष . मध्याह्न भोजन का खस्ता हाल, मिलीं गड़बड़ियां लालगंज नगर : लालगंज प्रखंड क्षेत्र के भटौली भगवान स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय और नवसृजित विद्यालय दोनों भवन के अभाव में एक ही जगह चलता है. स्कूल की मिड डे मील योजना में भी अनियमितता बरती जा रही है. इसके कारण कई बच्चे मिड डे मील […]

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असंतोष . मध्याह्न भोजन का खस्ता हाल, मिलीं गड़बड़ियां

लालगंज नगर : लालगंज प्रखंड क्षेत्र के भटौली भगवान स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय और नवसृजित विद्यालय दोनों भवन के अभाव में एक ही जगह चलता है. स्कूल की मिड डे मील योजना में भी अनियमितता बरती जा रही है. इसके कारण कई बच्चे मिड डे मील नहीं खा पाते हैं.
मंगलवार को जब प्रभात खबर की ओर से इसकी पड़ताल की गयी तो कई अनियमितताएं सामने आयीं. वहीं दोनों स्कूलों के प्रधानाध्यापकों विनोद शंकर दास और संतलाल रजक ने मिड डे मील पर असंतोषजनक बातें बतायीं. उत्क्रमित मध्य विद्यालय में नामांकित छात्र-छात्राओं की कुल संख्या 384 और नवसृजित विद्यालय में कुल नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या 97 है. बच्चों की उपस्थिति उत्क्रमित में 277 और नवसृजित स्कूल में 80 बतायी गयी है.
मंगलवार को मेनू के अनुसार बना था खाना
मेनू के हिसाब से बच्चों को मंगलवार को चावल और आलू-सोयाबीन की सब्जी परोसी गयी. इस संबंध में कक्षा सात की आकृति कुमारी ने बताया कि स्कूल के भोजन में घर के खाने जैसे स्वाद की अनुभूति नही होती है. लेकिन, खाना स्वच्छ रहता है. वर्ग आठ की अनन्या कुमारी, वर्ग आठ की ही अनीषा समेत अन्य बच्चों ने बताया कि भोजन की गुणवत्ता असंतोषजनक है. प्रधानाध्यापक विनोद शंकर दास ने बताया कि यह नियमावली आज से नहीं बल्कि पूर्व से ही है.
भोजन की गुणवत्ता की शिकायत मध्याह्न भोजन के बीआरपी लक्ष्मण पासवान से की गयी थी.लेकिन आज तक कोई निदान नही निकल पाया. प्रधानाध्यापक से पूछे जाने पर कि मेनू चार्ट कहां लिखा है, तो उनके द्वारा जो बताया गया, उसके अनुसार दीवार पर केवल मध्याह्न भोजन का शीर्षक अंकित था. दिन के हिसाब से अंकित नहीं था़ खाने की गुणवत्ता पर दोनों प्रधानाध्यापकों ने बताया कि गुणवतापूर्ण तो नही है. लेकिन खाने योग्य रहता है.जो बच्चों की दिनचर्या में उर्जा जरूरतों को पूरा कर उनका सहयोग करता है.
क्या कहते हैं प्रधानाध्यापक
यह आज से नहीं पूर्व से ही होता आ रहा है. मिड डे मील की गुणवत्ता ठीक वैसी नही होती है, जैसा कि घर के पौष्टिक खाने में हुआ करती हैं, लेकिन मिलाजुला कर खाने योग्य रहता है.
विनोद शंकर दास, प्रधानाध्यापक
बच्चे समूह में बैठकर मिड डे मील ग्रहण करते वक्त बेहद उत्साहित रहते हैं. हालांकि भोजन की गुणवत्ता में और भी सुधार जरूरी है.
संतलाल रजक, प्रभारी प्रधानाध्यापक
क्या कहते हैं बच्चे
मिड डे मील में स्वाद नहीं रहता है. जैसे-तैसे खाते हैं. पुलाव और अंडे की गुणवत्ता ठीक नही है.
अनन्या, छात्रा
ऐसा भी हो सकता है की अंडे को लेकर आने-जाने के दौरान वाहन के हिचकोले खाने के कारण वह खराब हो जाता हो.
आकृति, छात्रा, वर्ग-आठ
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