प्रशासनिक अनदेखी पड़ गयी जान पर भारी
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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हाजीपुर/बिदुपुर : राघोपुर व बिदुपुर क्षेत्र में नदी में डूबकर होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. कभी स्नान के दौरान तो कभी पिकनिक मनाने के दौरान नदी में डूबकर लोगों की मौत हो रही है. रविवार की दोपहर बहरामपुर घाट के समीप गंगा नदी में डूबकर आठ लोगों की […]
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हाजीपुर/बिदुपुर : राघोपुर व बिदुपुर क्षेत्र में नदी में डूबकर होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. कभी स्नान के दौरान तो कभी पिकनिक मनाने के दौरान नदी में डूबकर लोगों की मौत हो रही है.
रविवार की दोपहर बहरामपुर घाट के समीप गंगा नदी में डूबकर आठ लोगों की हुई मौत ने प्रशासनिक दावों को खोखला साबित कर दिया है. जिस समय लोगों की डूबने से मौत हुई, उस समय वहां अगर एसडीआरएफ की टीम मौजूद होती तो कुछ परिवारों की हंसती-खेलती जिंदगी उजरने से बचायी जा सकती थी. रविवार को रुस्तमपुर ओपी क्षेत्र के मस्ताना घाट पर भले ही स्नान करने के दौरान या पिकनिक मनाने के क्रम में गंगा नदी में डूबने से आठ लोगो की मौत हो गयी, जिसमें सात लोगों के शव को निकाला गया है, शेष के शवों की खोज जारी है.
लेकिन राघोपुर में स्नान करने अथवा नाव डूबने से अब तक दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं. डूबने से मौत होने पर प्रशासन घटना के अगले दो दिनों तक सक्रिय तो जरूर रहता है मगर धीरे धीरे प्रशासन नदी घाटों पर सुरक्षा को लेकर सुस्त दिखने लगता है. बता दें कि छठ पूजा पर ही मस्तान घाट को खतरनाक घोषित कर दिया गया था, फिर भी कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों लोगों ने यहां डूबकी लगायी. गनीमत ये रहा कि इस दौरान घाट पर कोई अप्रिय हादसा नहीं हुआ .
पूर्व में भी हो चुके हैं हादसे: रविवार की घटना से पहले भी 11 अक्तूबर को कच्ची दरगाह से रुस्तमपुर घाट आने के दौरान पतवार का झटका लगने से नाविक सुरेश राय का 15 वर्षीय पुत्र सोनू कुमार की डूबने से मौत हो गयी थी. जबकि 13 अक्तूबर को चकौसन स्थित खालसा घाट पर खाद से लदी नाव के डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गयी थी. शव का अब तक कोई अता पता नहीं चल सका है .वहीं 20 अक्तूबर को जुड़ावनपुर घाट पर स्नान करने के दौरान डूबने से राम विनोद सिंह की 22 वर्षीया पुत्री प्रियंका कुमारी की मौत हो गयी थी.
उधर 27 अक्तूबर को सहदुल्लाहपुर चकफरीद घाट पर स्नान करने के दौरान डूबने से पानापुर ग्राम के 32 वर्षीय युवक गंभीर कुमार की मौत हो गयी.
तीन महीने पहले भी हुआ था हादसा, बाल-बाल बचे थे सभी: घटना से महज तीन माह पहले दो जुलाई को भी बिशनपुर सैदअली के नाविक लालू राय का नाव ठीक इसी तरह डूब गया था, लगभग 150 यात्रियों से खचाखच भरा नाव, जिस पर आठ बाइक भी लदे थे.
गंगा नदी में डूबी थी, लेकिन सभी यात्री बाल बाल बच गये थे. इससे पूर्व माह नवंबर 2015 में भी राघोपुर बीडीओ की गाड़ी डूब गयी थी. वर्ष 2012 में भी बिहार राज्य खाद्य निगम का चावल जन वितरण प्रणाली दुकान पर जा रहा था. इसी बीच चावल से लदी नाव बीच नदी में डूब गयी थी. इससे पूर्व वर्ष 2007 और 2005 में भी नाव डूबी थी. लेकिन सभी यात्री सकुशल नदी से बाहर निकाल लिए गये थे. इससे पूर्व वर्ष 1997 में एक बड़ा नाव हादसा हुआ था, जिसमें स्वास्थ्य विभाग की जीप, एक राजदूत मोटरसाइकिल , तीन स्वास्थ्य कर्मी और बिशनपुर के संजय राय समेत आधे दर्जन से अधिक लोग नाव सहित गंगा में विलीन हो गये थे. जिसका अब तक कोई पता नहीं लगाया जा सका है. हलांकि गोताखोर व महाजाल की व्यवस्था कर लाख प्रयासों के बावजूद आज तक किसी का पता नहीं लगा.
अक्सर खालसा घाट के समीप ही क्यों डूबती है नाव: सरकार के निर्देशों के बाद भी चकौसन के जिमदारी घाट एवं रुस्तमपुर व कच्ची दरगाह घाट समेत कई घाटों पर ओवर लोडेड नाव का परिचालन धड़ल्ले से जारी है. नियमों को ताक पर रखकर लगभग 150 से अधिक यात्रियों को बैठा कर नाव नदी पार करती है. खासकर नाविकों का कहना है कि चेचर से लेकर खालसा तक गंगा नदी काफी गहरी है, जिसके कारण नाव हादसे होते रहे है.
नाव परिचालन के लिए तय मानक: गंगा नदी में परिचालित सभी नावों का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है. एक नाव पर पंद्रह यात्री से ज्यादा बैठाने पर सरकारी मनाही है. साथ ही नाविक को तैरने की जानकारी भी होनी चाहिए और नाविक नाबालिग नहीं होना चाहिए. लेकिन नियमों को ताक पर रखकर बेरोक टोक केवल जिमेदारी घाट से लगभग 45 नावों को लगभग 150 यात्रियों को बैठाकर प्रत्येक दिन परिचालित होते देखा जाता है. पूर्व विधायक सतीश कुमार ने अंचलाधिकारी एवं जिलाधिकारी को आवेदन देकर ओवरलोडेड नाव परिचालन पर रोक लगाने की मांग की है, साथ ही उन्होंने 15 साल से ज्यादा पुराने नावों के परिचालन पर रोक लगाने की मांग भी की है.
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