लाखों श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी

Updated at : 05 Nov 2017 7:37 AM (IST)
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लाखों श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी

कार्तिक पूर्णिमा . सुबह से शाम तक चलता रहा गंगा स्नान, लगते रहे हरि गोविंद के जयकारे मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन को उमड़े श्रद्धालु हाजीपुर : सड़कों पर उतर आया आस्था का सैलाब और हरि गोविंद के गीतों से गूंज उठा कोनहार घाट. शनिवार को कार्तिक पूर्णिमा स्नान के दिन प्रसिद्ध कोनहारा घाट से लेकर तमाम […]

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कार्तिक पूर्णिमा . सुबह से शाम तक चलता रहा गंगा स्नान, लगते रहे हरि गोविंद के जयकारे

मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन को उमड़े श्रद्धालु
हाजीपुर : सड़कों पर उतर आया आस्था का सैलाब और हरि गोविंद के गीतों से गूंज उठा कोनहार घाट. शनिवार को कार्तिक पूर्णिमा स्नान के दिन प्रसिद्ध कोनहारा घाट से लेकर तमाम स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की ऐसी भीड़ उमड़ी कि कहीं भी तिल रखने की जगह नहीं रही. गंडक घाटों की ओर जाने-आने वाली सड़कों पर सिर्फ रेला ही रेला दिख रहा था. शुक्रवार की मध्य रात्रि के बाद से गंगा-गंडक के पावन संगम में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगानी शुरू कर दी. शनिवार को दिन भर गंगा स्नान और दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा. तीर्थ यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारी कर रखी थी.
कार्तिक पूर्णिमा मेले को लेकर यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने का दावा जिला प्रशासन चाहे जितना करे, लेकिन इसी व्यवस्था ने मेला यात्रियों को सबसे ज्यादा रुलाया. वाहन पड़ावों पर गाड़ियों में ठुंसे और वाहन की छत से लेकर पीछे तक लटके यात्री तथा कोसों दूर पैदल चलते यात्रियों को देख कर उनकी पीड़ा समझी जा सकती थी. वाहन चालकों की मनमानी पर प्रशासन अंकुश नहीं लगा पाया. किसी भी स्टैंड में यात्री किराये की सूची भी नहीं टांगी जा सकी. इसके चलते वाहन चालकों ने भीड़ का फायदा उठाकर यात्रियों से मनमाना किराया वसूला. यात्रियों की परेशानी देखने और शिकायत सुनने वाला कहीं कोई नजर नहीं आ रहा था. दूसरी ओर जाम के नाम पर विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहनों के चालक निर्धारित पड़ाव से काफी पीछे ही यात्रियों को उतार दे रहे थे.
बेहतर व्यवस्था से संभव हुआ सुरक्षित स्नान : गंगा स्नान में जुटने वाली लाखों की भीड़ के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सुरक्षित स्नान के लिए नदी घाटों पर चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी थी. स्नान के दौरान लोग गहरे पानी में न चले जाये, इसके लिए घाटों की बैरिकेडिंग की गयी थी. घाटों पर आपात स्थिति से निबटने के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात थी. गोताखोरों को भी लगाया गया था. मोटर बोट से अधिकारियों की टीम गोताखोरों के साथ लगातार गश्ती कर रही थी.
कंट्रोल रूम व क्लोज सर्किट कैमरे से हुई निगरानी: घाटों से सड़कों तक फैले जन सैलाब में प्रशासन की नजर चप्पे-चप्पे पर थी. नगर के कोनहारा घाट पर जिला प्रशासन द्वारा बनाये गये कंट्रोल रूम से सारी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी. जिलाधिकारी रचना पाटील और पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार ने खुद सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी. कंट्रोल रूम में वरीय अधिकारियों को तैनात किया गया था.
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिहाज से आधा दर्जन वाच टावर बनाये गये थे. सभी टावरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये थे. सभी प्रमुख स्थानों पर दंडाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती थी. नगर के जीए इंटर स्कूल में मेला पुलिस कैंप लगाया गया है, जहां से सार्जेंट मेजर के नेतृत्व में पुलिस के जवान व्यवस्था संभालने में लगे हैं.
भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक कंट्रोल पर था विशेष जोर: कार्तिक पूर्णिमा मेले में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात को व्यवस्थित करने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष रूप से योजना बनायी थी, जो सफल रही. विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहनों के लिए शहर के आखिरी छोर पर वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गयी थी. शुक्रवार की शाम से ही लालगंज, वैशाली की तरफ से आने वाली गाड़ियों के लिए नाका नंबर तीन के पास, के निकट पार्किंग की व्यवस्था की गयी थी.
पूरे शहर में प्रमुख चौक-चौराहों पर डेढ़ दर्जन ड्रॉप गेट बनाये गये थे.
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