शैव के लिए स्वर्ग व वैष्णव के लिए बैकुंठ है हरिहर क्षेत्र

सोनपुर : कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले एशिया प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले का पौराणिक एवं पावन भूमिका अत्यंत ही पुरातन है. पौराणिक, धार्मिक, तथा अाध्यात्मिक वर्णन तो अनेक स्थानों पर है. पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार गज ग्राह के बीच लंबे समय तक तक चले संघर्ष का अंत इसी स्थल पर हुआ था. […]
सोनपुर : कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले एशिया प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले का पौराणिक एवं पावन भूमिका अत्यंत ही पुरातन है. पौराणिक, धार्मिक, तथा अाध्यात्मिक वर्णन तो अनेक स्थानों पर है. पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार गज ग्राह के बीच लंबे समय तक तक चले संघर्ष का अंत इसी स्थल पर हुआ था.
गज को ग्राह ने इस तरीके से जकड़ रखा था कि गज का बचना मुश्किल था. गज ने अपने अाराध्य भगवान विष्णु को स्मरण किया. साक्षात भगवान विष्णु ने इसी स्थल पर अवतरित होकर गज की रक्षा की. नारायणी नदी (गंडक) के किनारे पर गज ग्राह युद्ध के बाद ही कौनहारा घाट का नामकरण हुआ. यह स्थल हाजीपुर की ओर है. हरिहर क्षेत्र की संपूर्ण भूमि शैव के लिए स्वर्ग तथा वैष्णव के लिए बैकुंठ है. महान साधक जड़ भरत श्रृषि का आश्रम हरिहर क्षेत्र मंदिर से दो किलोमीटर उत्तर बैजलपुर गांव में गंडक नदी के किनारे स्थित है.
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