एक साथ उठी मां-बाप की अरथी, रो पड़ा सुमन

Updated at : 20 Jul 2017 12:14 PM (IST)
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एक साथ उठी मां-बाप की अरथी, रो पड़ा सुमन

छह माह में 142 सड़क दुर्घटनाएं, 158 लोगों की गयी जान गोरौल : पंद्रह वर्षीय सुमन कुमार गले में उतरी लिए बैठा है. किसी से कुछ नहीं बोल रहा है. इस बेचारे के माथे से माता पिता का साया उठ गया है. रसूलपुर कोरिगांव निवासी संजय कुमार सिंह अपने पत्नी मंजू देवी के साथ हाजीपुर […]

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छह माह में 142 सड़क दुर्घटनाएं, 158 लोगों की गयी जान
गोरौल : पंद्रह वर्षीय सुमन कुमार गले में उतरी लिए बैठा है. किसी से कुछ नहीं बोल रहा है. इस बेचारे के माथे से माता पिता का साया उठ गया है. रसूलपुर कोरिगांव निवासी संजय कुमार सिंह अपने पत्नी मंजू देवी के साथ हाजीपुर जा रहे थे. सुमन को सही ढंग से रहने के लिये कहते हुए शाम तक घर लौटने की बात कही थी. उस पल को याद कर सुमन फफक पड़ता है. अभी खेलने के उम्र में ही एक साथ उसके माता-पिता की मृत्यु सराय सड़क हादसा में हो गयी है. वह अनाथ हो गया है. कुछ बोल नहीं पा रहा है. उसके ऊपर पहाड़ टूट है लोग उसे दिलासा दे रहें है. कोई कहता है कि देखों हमारे माता पिता भी मरे हुए है. फिर भी हम कैसे जिंदा है. भगवान के मरजी के आगे किसी का नहीं चलता है.
वैशाली जिले की सड़कों पर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से एक नयी सामाजिक चिंता इस सवाल के साथ उभरी है कि क्या सड़क पर सफर अब सुरक्षित नहीं? जिले में अब शायद ही कोई दिन दुर्घटना रहित गुजरता है. कोई आदमी जब घर से निकलता है, तो उसके साथ गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचने का भरोसा भी होता है. लेकिन यह भरोसा अब खंडित हो रहा है.
कब, कहां और कौन वाहन से कुचल जाये. कहां दो वाहन टकराकर जिंदगी और मौत में फर्क मिटा दे, यह आशंका हमेशा बनी रहती है. बीते मंगलवार की सुबह एनएच-77 पर बस और ऑटो के बीच भिड़ंत में एक मासूम सहित 11 लोगों की मौत हो गयी. एक हादसे में 11 लोगों की मौत का गवाह बना सराय थाने का सराय पुरानी बाजार चीख-चीख का यह संदेश दे रहा है कि सड़कों पर चलना अब महफूज नहीं है. पिछले छह माह का आंकड़े लें तो इस अवधि में छोटी-बड़ी 142 सड़क दुर्घटनाएं हुई. इन दुर्घटनाओं में 158 लोगों की मौत हो गयी.
यातायात नियमों का नहीं हो रहा पालन : सराय में हुए हादसे में कई जिन्दगियां आसुंओं में डूब गयी. मरने वालों में पांच महिला सहित 11 लोगों में एक पिता-पुत्र और तीन दंपती भी शामिल थे. गोरौल थाना क्षेत्र के रुसुलपुर कोरीगांव के ज्ञानप्रकाश सिंह और उनके मासूम पुत्र आदित्य राज की मौत से पूरा गांव मर्माहत है. पेशे से शिक्षक ज्ञानप्रकाश सिंह भगवानपुर प्रखंड के हुसैना मध्य विद्यालय में शिक्षक थे. वे अपनी पत्नी प्रमीला देवी के साथ पुत्र आदित्य राज का इलाज कराने के लिए हाजीपुर आ रहे थे. गंभीर रूप से घायल प्रमीला देवी पीएमसीएच में जीवन व मौत से जूझ रही है. उसे शायद यह पता भी नहीं है कि अब इस दुनिया में उसका पति और पुत्र नहीं रहा.
वह सपने में भी नहीं सोची थी कि एक हादसा में उसका सुहाग और लाडला सदा के लिए उससे दूर हो जायेंगे.संजय कुमार सिंह और उनकी पत्नी मंजू देवी,मो. सत्तार और उनकी पत्नी शकिला बेगम तथा वृजनंदन पंडित और उनकी पत्नी प्रमीला देवी की मौत सराय हादसे में हो गयी. तीनों दंपतियों की मौत अपने पीछे कई सवाल यक्ष बनकर पूछ रहा है.
क्या सड़क पर छोटे वाहन से चलना गुनाह है? आखिर बड़े वाहन को इतनी तेज गति से चलाने की छूट चालकों को क्यों दी जाती है कि सामने जब कोई छोटे वाहन आये जाये तो ब्रेक लगाकर वाहन को रोका नहीं जा सके. निर्धारित गति सीमा से तेज वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? इसी एनएच पर हाल ही में गोरौल थाना क्षेत्र के हरसेर गांव में बाइक सवार गुंजन, मनीष और विक्रांत की मौत के बाद अगर जिला प्रशासन या परिवहन विभाग इस ओर थोड़ा ध्यान दिया होता तो आज मची कोहराम का यह मंजर नहीं होता.
टाइम पकड़ने व जल्द पहुंचाने की रहती है होड़
वाहन चालकों में गंतत्व स्थान पर जल्द पहुंचाने की कंपीटिशन और टाइम पकड़ने की होड़ ज्यादतर दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है. जिले से गुजरने वाले एनएच-77, एनएच-103 और एनएच-19 पर हो रही हादसों के बाद जांच-पड़ताल में यह बात सामने आ रही है. जब भी कोई उक्त एनएच से गुजरता है तो उनके कलेजे पर हाथ होते हैं. बाइक की बात छोड़ दें, निजी चार पहिया वाहन और बस के अंदर बैठे लोग भी दहशत में सफर करते हैं. बस मालिक अपनी मरजी से टाइम निर्घारित करते हैं.
उनके बीच पैसा कमाने की होड़ मची हुयी है. वे बस को ज्यादा से ज्यादा टीप लगाने का दबाव इस कदर बनाए हुए रहते है कि चालक भी रफ ड्राइविंग के लिए विवश हो जाता है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिवहन विभाग द्वारा इन बस मालिकों के लिए कोई गाइड लाइन क्यों निर्धारित नहीं है? क्या सराय जैसी घटना की पुनरावृति न हो, इसके लिए परिवहन विभाग कुछ सख्त निर्देश देंगे ताकि बस मालिकों पर लगाम लगाया जा सकें. या फिर निर्दोष लोगों की मौत की कीमत चार लाख देकर प्रशासन अपनी जिम्मेवारी खत्म कर लेंगे. यह तो भविष्य के खाते में है.
लापरवाह चालकों पर कार्रवाई जरूरी
हाजीपुर- पटना के बीच गंगा नदी पर गांधी सेतु चालू होने के बाद जिले में जिस अनुपात में दुर्घटनाएं बढ़ीं, सड़क सुरक्षा के प्रति उतनी ही उदासीनता भी देखी गयी. प्रशासन को सड़क सुरक्षा का ख्याल जितना आना चाहिए था, आया नहीं. अलबत्ता, कुछ सामाजिक संस्थाओं के जरिये सड़क सुरक्षा सप्ताह के आयोजन अवश्य हो रहे है, पर प्रशासनिक स्तर पर दुर्घटनाओं के कारणों को गंभीरता से समीक्षा नहीं की जा रही है.
ज्यादातर दुर्घटनाएं चालकों की लापरवाही, ओवरलोडिंग, रफ ड्राइविंग और यातायात नियमों के पालन नहीं करने के कारण हो रही है. सवारी ढ़ोने वाले वाहनों के चालक दक्ष हैं या नहीं, लाइसेंस देने के बाद समय-समय पर उसकी समीक्षा नहीं होती. जिले में 80 फीसदी वाहनों के चालक नाबालिग है और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वाहन चलाना उनका स्टाइल बन गया है. वाहनों में ऊंचे वोल्युम में कैसेट बजाने की विकसित हुई प्रावृति पर रोक नहीं लग रही. यातायात पदाधिकारी भी दबी जुवान में कहते है कि अगर यातायात नियमों का पालन हो तो दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है.
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