बिहार में हुआ 2300 अधिकारियों का ट्रांसफर, न महिला कोटे का रखा गया ध्यान और न ही परफॉर्मेंस पर मिली तवज्जो

राज्य में जून के अंतिम दिन सभी विभागों में विभिन्न स्तर के करीब 2300 पदाधिकारियों का तबादला किया गया. लेकिन, बड़े स्तर पर हुए इस ट्रांसफर-पोस्टिंग में तीन मुख्य बातों की अनदेखी की गयी है. पहला, किसी विभाग के तबादले में 33 फीसदी महिला पदाधिकारियों को तवज्जों देने के नियम का पालन नहीं किया गया है.
पटना . राज्य में जून के अंतिम दिन सभी विभागों में विभिन्न स्तर के करीब 2300 पदाधिकारियों का तबादला किया गया. लेकिन, बड़े स्तर पर हुए इस ट्रांसफर-पोस्टिंग में तीन मुख्य बातों की अनदेखी की गयी है. पहला, किसी विभाग के तबादले में 33 फीसदी महिला पदाधिकारियों को तवज्जों देने के नियम का पालन नहीं किया गया है.
खासकर किसी क्षेत्रीय पदस्थापना वाले पदों मसलन बीडीओ, सीओ, सहायक कर आयुक्त समेत ऐसे अन्य पदों पर पोस्टिंग में 33 फीसदी महिला पदाधिकारियों को शामिल नहीं किया गया है, जबकि कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी 33 फीसदी महिला पदाधिकारियों की तैनाती क्षेत्रीय या जिला स्तरीय कार्यालयों में करने से संबंधित आदेश दिया था.
इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इससे संबंधित आदेश जारी किया था, जिसमें सीओ, बीडीओ, थानाध्यक्ष समेत ऐसे अन्य पदों पर 33 प्रतिशत महिला पदाधिकारियों की तैनाती अनिवार्य रूप से करने की बात कही गयी थी. लेकिन, इस आदेश की भी अनदेखी की गयी है. इसके अलावा फील्ड स्तरीय पदाधिकारियों को उनके परफॉर्मेंस के हिसाब से उनकी रैंकिंग की जाती है.
इसके आधार पर उनकी पोस्टिंग भी की जाती है. लेकिन, इस बार खासतौर से सीओ, डीसीएलआर समेत ऐसे अन्य फील्ड पदाधिकारियों की पोस्टिंग में इस परफॉर्मेंस आधारित रैंकिंग का कोई पालन नहीं किया गया है. उदाहरणस्वरूप सीओ की पोस्टिंग को ही देखें, तो पता चलेगा कि जिनका 114 रैंक है, उन्हें फुलवारीशरीफ जैसा महत्वपूर्ण अंचल में तैनात कर दिया गया है.
इसी तरह एक रैंक वाले की तैनाती कहीं अन्य कर दी गयी है. साथ ही इससे ऊपर के रैंक के अन्य पदाधिकारियों की भी तैनाती दूर-दराज के इलाकों में कर दी गयी है. इसी तरह इंजीनियरिंग विभागों में भी किसी इंजीनियर के परफॉर्मेंस के हिसाब से ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं हुई है. ऐसी ही अनदेखी परिवहन विभाग, पथ निर्माण समेत अन्य विभागों में भी की गयी है.
सामान्य प्रशासन विभाग के स्तर से मार्च, 2007 में जारी पत्र संख्या 434 के नियम के अनुसार किसी विभाग को किसी हालत में किसी कैडर में 10% से अधिक पदाधिकारियों का तबादला एक वर्ष के अंदर नहीं किया जायेगा. अगर किसी प्रशासनिक कारण से ऐसा करने की जरूरत पड़ती है, तो इसके लिए मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव के माध्यम से सीएम के स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य होगा.
लेकिन, इस बार बीडीओ, सीओ, डीसीएलआर, जिला कोषागार पदाधिकारी, सहायक कर पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी समेत अन्य पदाधिकारियों के तबादले इनकी कैडर क्षमता के आधे से अधिक की संख्या में कर दिये गये हैं, लेकिन इनमें किसी में मुख्यमंत्री के स्तर से अनुमति नहीं ली गयी है.
इस तरह से इस बार के तबादले में इन बातों की भी अनदेखी बड़े स्तर पर हुई है. इसके अलावा आनन-फानन में किये गये कई तबादलों में यह भी हुआ है कि किसी एक जिले में एक ही पद पर दो पदाधिकारियों की तैनाती कर दी गयी है.
मधुबनी के जिला कोषागार पदाधिकारी का बिना तबादला किये, वहां एक दूसरे पदाधिकारी की तैनाती कर दी गयी है. मुख्य सचिव त्रिपुरारि शरण ने कहा कि अगर ऐसा हुआ है और मामला मेरे संज्ञान में लाया जायेगा, तो वह इसकी समीक्षा करके उचित कार्रवाई करेंगे.
Posted by Ashish Jha
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By Prabhat Khabar News Desk
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