बिहार के विश्वविद्यालयों में समिति के जरिये होगी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा विभाग ने जारी किया संकल्प

Updated at : 14 Apr 2021 8:37 AM (IST)
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बिहार के विश्वविद्यालयों में समिति के जरिये होगी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा विभाग ने जारी किया संकल्प

बिहार के सभी 13 विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कॉलेजों में अतिथि एवं अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षा विभाग ने एक संकल्प पत्र जारी किया है़ संकल्प पत्र के मुताबिक विश्वविद्यालयों को ऐसे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति का निर्णय कुलपति की अध्यक्षता में एक समिति लेगी़

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पटना. बिहार के सभी 13 विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कॉलेजों में अतिथि एवं अंशकालिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षा विभाग ने एक संकल्प पत्र जारी किया है़ संकल्प पत्र के मुताबिक विश्वविद्यालयों को ऐसे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति का निर्णय कुलपति की अध्यक्षता में एक समिति लेगी़

इस संकल्प पत्र के जरिये अतिथि शिक्षकों के मानदेय को बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति पीरियड और अधिकतम 50 हजार करने का निर्णय लिया है़ हाल ही में इस संदर्भ में विधानमंडल के बजट सत्र में विभागीय शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने घोषणा की थी़ वित्त और विधि विभाग ने इस मामले में अपनी औपचारिक सहमति भी दे दी है़

फिलहाल प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अतिथि शिक्षकों एवं अंशकालिक शिक्षकों के खाली पदों की संख्या करीब 4500 है़ इन्हीं घोषित नियुक्ति के आधार पर ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए जल्दी ही शुरू की जानी है़ शिक्षा विभाग की तरफ से जारी आधिकारिक संकल्प पत्र के मुताबिक विश्वविद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता में गठित करनी होगी़

11 माह के लिए नियुक्त होंगे अतिथि शिक्षक

चयन समिति में कुलपति की तरफ से मनोनीत संबंधित विषयों के विषय विशेषज्ञ, संबंधित संकाय का संकायाध्यक्ष(अगर वहां लागू हो), संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष/अनुसूचित जाति/जनजाति/अत्यंत पिछड़ा वर्ग/महिला/दिव्यांग श्रेणी के एक शिक्षाविद शामिल रहेंगे़ अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति केवल 11 माह के लिए की जायेगी़

58 हजार से अधिक आये हैं आवेदन

शिक्षा विभाग ने करीब साढ़े चार हजार सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग से साक्षात्कार के लिए आग्रह किया है़ करीब 58 हजार से अधिक आवेदन आये हैं.

इस चयन प्रक्रिया के जरिये सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति में कम से दो से तीन साल लगेंगे़ इसलिए अतिथि शिक्षकों से ही पढ़ाई कराने का निर्णय लिया गया है़ अलबत्ता कोविड काल में अभी इनकी चयन प्रक्रिया शायद ही शुरू हो सके़

Posted by Ashish Jha

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