बिहार में इस्तीफा देनेवाले शिक्षकों ने फिर कर लिया ज्वाइन, निगरानी जांच में सामने आ रहे नये तरह के फर्जीवाड़े
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 11 Sep 2021 6:54 AM
राज्य में नियोजित शिक्षकों के मामले की करीब पांच साल से चल रही जांच और उलझती जा रही है. निगरानी ब्यूरो के मुताबिक उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षकों व लाइब्रेरियन की जांच तो पूरी हो गयी है.
पटना. राज्य में नियोजित शिक्षकों के मामले की करीब पांच साल से चल रही जांच और उलझती जा रही है. निगरानी ब्यूरो के मुताबिक उच्च माध्यमिक और माध्यमिक शिक्षकों व लाइब्रेरियन की जांच तो पूरी हो गयी है. लेकिन, 3.11 लाख से ज्यादा प्राथमिक शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच का पेच सुलझ नहीं रहा.
वहीं, नये तरह के फर्जीवाड़े सामने जा आ रहे हैं. जांच की शुरुआत में करीब तीन हजार शिक्षकों ने स्वयं को फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्ति का दोषी मानते हुए इस्तीफा दे दिया था, उनमें से करीब 300 शिक्षकों ने अब फिर से बैकडोर से ज्वाइन कर लिया है. इनमें सभी स्तर के शिक्षक हैं. हालांकि, इन शिक्षकों की सही संख्या निगरानी के पास नहीं है, क्योंकि शिक्षा विभाग के स्तर से समुचित जांच कर मुहैया नहीं करायी गयी है.
जानकारी निगरानी ब्यूरो ने शिक्षकों के फोल्डर की जांच शुरू की, तो ऐसे कई नाम और प्रमाणपत्र मिले, जो इस्तीफा देने वाले शिक्षकों की सूची में भी शामिल थे. जब इनकी गहन जांच करायी गयी, तो मालूम हुआ कि ऐसे करीब 300 नाम हैं, जिन्होंने फर्जी प्रमाणपत्र को स्वीकारते हुए इस्तीफा दे दिया था. बाद में अवैध तरीके से दोबारा सेवा में इंट्री ले ली.
अपना फोल्डर नहीं जमा करने वाले 90 हजार प्राथमिक शिक्षकों को शिक्षा विभाग द्वारा तैयार विशेष पोर्टल पर दो बार प्रमाणपत्र अपलोड करने के लिए दो बार मौके दिये गये. इसकी मियाद समाप्त हो गयी है. लेकिन, अब तक करीब 15 हजार शिक्षकों ने प्रमाणपत्र अपलोड नहीं किये हैं. हालांकि, शिक्षा विभाग का कहना है कि करीब तीन हजार शिक्षकों ने सर्टिफिकेट अपलोड नहीं किये हैं.
नियोजित शिक्षकों की जांच में आ रही अड़चन और इसकी रफ्तार तेज करने के लिए निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी की अध्यक्षता में जल्द ही एक बैठक होने जा रही है. इसमें निगरानी ब्यूरो के एडीजी सुनील कुमार झा, शिक्षक जांच के प्रभारी एसपी सुबोध कुमार विश्वास समेत अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहेंगे. इस दौरान इन सभी मुद्दों पर चर्चा होगी.
उच्च माध्यमिक- 11,787 शिक्षकों में 44 के फोल्डर नहीं मिले. इनके 65, 276 प्रमाणपत्रों में 59,286 ही सत्यापित हो पाये. 5,990 प्रमाणपत्र जांच के लिए लंबित हैं. 131 शिक्षकों को दोषी पाते हुए 53 मामले दर्ज किये गये. 121 सर्टिफिकेट फर्जी पाये गये.
माध्यमिक- 27,897 शिक्षकों में 474 के फोल्डर नहीं मिले. 1.22 लाख से अधिक प्रमाणपत्रों में 98,664 सत्यापित हुए और 24,016 पेंडिंग हैं. 70 सर्टिफिकेट फर्जी मिले. 60 को दोषी मानते 43 मामले दर्ज किये गये.
लाइब्रेरियन- 2082 लाइब्रेरियन में 20 के फोल्डर नहीं मिले. 8327 सर्टिफिकेट में 7083 सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन हुआ है, जबकि 1244 पेंडिंग हैं. 14 प्रमाणपत्र फर्जी मिले. 15 को दोषी मानते हुए आठ मामले दर्ज किये गये.
प्राथमिक शिक्षक- 3.11 लाख से अधिक शिक्षकों में 89,797 के फोल्डर नहीं मिले हैं. 5.55 लाख से अधिक सर्टिफिकेट प्राप्त हुए, जिनमें 2.60 से अधिक सर्टिफिकेट जांच के लिए लंबित पड़े हैं. 1132 सर्टिफिकेट फर्जी पाये गये. 1428 अभियुक्तों पर 430 मामले हो चुके दर्ज.
जिन लोगों ने प्रमाणपत्र अपलोड भी किये हैं, उनमें बड़ी संख्या में फर्जी सर्टिफिकेट भी अपलोड कर दिये गये या किसी दूसरे का प्रमाणपत्र नाम-पता बदलकर अपलोड कर दिये गये हैं. एक ही प्रमाणपत्र को एक से ज्यादा लोगों ने अपलोड कर दिया है. ऐसी धांधली की जांच में कुछ समस्याएं भी सामने आ रही हैं.
एक ही प्रमाणपत्र का अगर कई लोग उपयोग कर लेते हैं, तो ऑनलाइन वेरिफिकेशन में इसे पकड़ना बेहद मुश्किल होगा. बोर्ड या विश्वविद्यालय अगर इनकी ऑनलाइन ही जांच करेंगे, तो यह सही पाया जायेगा. ऑनलाइन डुप्लीकेट सर्टिफिकेट को पकड़ना मुश्किल हो रहा है.
कुछ जिलों में यह भी देखने को मिल रहा है कि नियोजित शिक्षकों की संख्या से ज्यादा वहां से वेतन लेने वाले शिक्षकों की संख्या है. इन सवालों के जवाब निगरानी ने शिक्षा विभाग से तलब किया है. यह भी जानकारी मिली है कि कुछ शिक्षकों की नियुक्ति बिना नियोजन प्रक्रिया पूरी किये ही हुई है. ऐसे मामलों की भी जांच चल रही है.
Posted by Ashish Jha
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