दुर्गा पूजा को लेकर बाजारों में बढ़ी चहल-पहल

पूजन सामग्री खरीदने को लेकर खरीदारों की बढ़ी भीड़
– पूजन सामग्री खरीदने को लेकर खरीदारों की बढ़ी भीड़ सुपौल. दुर्गा पूजा सोमवार से प्रारंभ होने जा रहा है. कलश स्थापन के साथ ही माता की पूजा-अर्चना प्रारंभ हो जायेगी. नवरात्र के प्रथम दिन सोमवार को माता शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जायेगी. जिसे लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह और उल्लास का माहौल व्याप्त है. हिंदुओं के महापर्व दशहरा को लेकर मुख्यालय स्थित बाजारों में काफी चहल पहल देखी गयी. शारदीय नवरात्र को लेकर शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर सैकड़ों की संख्या में पूजन सामग्री की दुकान सज गई है. जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन सामग्री की खरीददारी करने में जुट गए हैं. बाजार में पूजन सामग्रियों की सजी दुकानें नवरात्र को लेकर शहर का माहौल भक्तिमय बना हुआ है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गा पूजा के अवसर पर लगने वाले मेले की भी पूजा समितियों द्वारा तैयारी की जा रही है. वहीं पूजा पांडालों को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है, जहां माता की प्रतिमा स्थापित कर उनके सभी 09 स्वरूपों की नौ दिनों तक पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ पूजा-आराधना की जायेगी. गौरतलब है कि जिला मुख्यालय स्थित बड़ी दुर्गा स्थान, माल गोदाम एवं गांधी मैदान में मुख्य रूप से दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है. वहीं प्रखंड क्षेत्र के हरदी, सुखपुर, परसरमा, लौकहा आदि गांवों में भी माता की पूजा की जा रही है. जिसे लेकर तरह-तरह के पांडाल सज रहे हैं. इसके अलावा हजारों श्रद्धालुओं द्वारा दशहरा के अवसर पर घरों में भी कलश की स्थापना कर नौ दिनों तक माता की पूजा की जाती है. इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा व्रत व उपवास भी रखा जाता है. पूजा को लेकर शहर में चहल पहल बढ़ गई है. लोग माता की चुनरी, धूप, दीप, कर्पूर, चंदन की लकड़ी, धूमन, अगरबत्ती, नारियल, नेवेद्य के सामान, कलश आदि की खरीदारी में जुटे थे. माहौल भक्तिमय बना हुआ था. प्रातः काल 5:59 कलश स्थापन का है सबसे उपयुक्त समय मां आदिशक्ति दुर्गा की उपासना के लिए वर्ष पर्यन्त चार नवरात्रि मनाई जाती है. इस बार आगामी नवरात्रि शारदीय होगी, जो आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाई जाएगी. इसे आश्विन नवरात्रि में कहा जाता है. भगवती दुर्गा की आराधना करने के लिए यह नवरात्रि सभी के सरल होती है. इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से होकर 02 अक्टूबर विजयादशमी के दिन होगा. माता की आगमन और गमन का शास्त्रानुसार मंथन करते हुए आचार्य धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि इस बार के आश्विन नवरात्रि में माता का आगमन गज (हाथी) पर होने जा रहा है जबकि माता का गमन इस बार नरवाहन (मनुष्य) पर चढ़कर प्रस्थान करेंगी. जिसका फल अति शुभ है. बताया कि इस बार 22 सितंबर को कलश स्थापना का शुभ समय प्रातः काल सूर्योदय 5:59 मिनट तक सबसे उपयुक्त समय है. नवरात्रि के दौरान प्रतिपदा तिथि, सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है. वहीं अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं का पूजन की जाती है. मां दुर्गा के नौ रूप हैं, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है. नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां के एक रूप का पूजन होता है.
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