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आवागमन के लिए बनायी गयी सड़क बना खलियान

Updated at : 08 May 2025 6:29 PM (IST)
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आवागमन के लिए बनायी गयी सड़क बना खलियान

सड़क पर पसारा गया मक्का दो-दो किमी तक अनवरत नजर आता है.

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– एनएच सहित अन्य सड़कों पर धड़ल्ले से सुखाया जा रहा अनाज – अनाज सुखाये जाने के कारण कई जगह टू लेन की सड़क भी हो जाती है वनवे सुपौल कोसी के तट पर बसा सुपौल जिला कभी आवागमन के मामले में राज्य के सबसे पिछले पायदान पर खड़ा था. लेकिन पिछले तीस वर्षो में यह जिला आवागमन खासकर सड़क के मामले में तेजी से विकास कर रहा है. वर्तमान समय में सुपौल जिले से 06 एनएच लगभग 250 किमी होकर गुजरती है. लेकिन आवागमन के लिए बनाई गई सड़कों का इस्तेमाल इन दिनों मक्का सुखाने के लिए किया जा रहा है. जिले से गुजरने वाले एनएच-एसएच या पीडब्ल्यूडी व आरईओ की सड़कें हो, हर सड़क पर इन दिनों बड़े पैमाने पर मक्का सुखाने का काम किया जा रहा है. कई जगह तो सड़क पर पसारा गया मक्का दो-दो किमी तक अनवरत नजर आता है. ऐसी स्थिति में डबल लेन की सड़कें कहीं-कहीं सिंगल लेन और कहीं पगडंडी सी नजर आनी लगी हैं. सड़क पर फसल सुखाए जाने से सबसे अधिक परेशानी दोपहिया और बड़े वाहन चालकों को हो रही है. आए दिन लोग हादसे के शिकार हो रहे हैं. पिछले पांच साल में लगभग दो दर्जन बाइक सवारों की मौत सड़क पर मक्का या जूट सुखाने के कारण हुई दुर्घटनाओं में हुई है. सड़कों पर सिर्फ फसल सुखाने का ही काम नहीं हो रहा है. कई जगह सड़कों पर ही थ्रेसर लगाकर मक्का को तोड़ा जाता है और फिर सड़क पर कांटा लगाकर अनाज तौल कर व्यापारियों को बेचा भी जाता है. मोटे तौर पर कहा जाए तो जिले की अधिकांश सड़कें इन दिनों खलिहान बनी हुई हैं. सुबह होते ही सड़क किनारे बसे ग्रामीण मक्का की मोटी परत आधी सड़क पर पसार देते हैं और फिर रात होने के बाद वहीं पर जमाकर उसे प्लास्टिक सीट से ढंक भी देते हैं. जिस एक तरफ वाहनों की आवाजाही होती है उस तरफ बड़े-बड़े बोल्डर या पेड़-पौधों की टहनियां रख दिए जाने से दुर्घटनाओं की अधिक आशंका बनी रहती है. अनाज पर चढ़ा वाहन तो वाहन चालकों की होगी फजीहत अपने-अपने घरों के आगे सड़क को खलियान बनाये किसान के अनाज पर अगर भूल से भी वाहन चढ़ गया तो वाहन चालकों की खैर नहीं. कोई वाहन चालक जान-बुझकर अनाज पर वाहन चढ़ाना नहीं चाहता. जब उन्हें लगता है कि वे दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं तो ऐसी स्थिति में वाहन को मोड़ देते हैं. ऐसे में दुर्घटना से तो बच जाते है लेकिन किसानों की नजर से बचना मुश्किल हो जाता है. अगर किसान देख लिया तो वाहन चालक के साथ दुव्यवहार के साथ-साथ अर्थदंड भी लगाया जाता है. अब गांवों में नहीं दिखते खलियान एक दौर था जब फसल कटाई के बाद गांवों के बाहर खुले मैदानों में खलियान नजर आते थे. किसान वहां फसल की मड़ाई करते, दाने अलग होते, और वही जगह ग्रामीण मेलजोल का केंद्र होती. लेकिन अब तस्वीर बदल गई है. गांवों से खलियान लगभग गायब हो चुके हैं. किसानों के अनुसार, खलियानों के खत्म होने की कई वजहें हैं मशीनों का बढ़ता उपयोग, छोटे होते खेत, और परंपरागत कृषि कार्यों का आधुनिक तरीकों से स्थानापन्न होना. अब मड़ाई की प्रक्रिया खेत में ही या मशीनों से सीधे थ्रेसर के माध्यम से की जा रही है. किसान रामदीन यादव कहते हैं, पहले खलियान में कई दिन लगते थे मड़ाई में, गांव के लोग इकट्ठा होते थे, बच्चों के लिए उत्सव जैसा माहौल होता था. अब तो एक-दो घंटे में मशीन से सब हो जाता है. खलियानों के खत्म होने के साथ ग्रामीण संस्कृति का एक हिस्सा भी खत्म होता जा रहा है. जहां एक ओर आधुनिकता ने कृषि को आसान बनाया है, वहीं दूसरी ओर सामूहिकता और मेलजोल की परंपरा पीछे छूट गई है. कहते हैं अधिकारी एसडीएम इंद्रवीर कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद स्थानीय थाना को भेजकर उक्त सड़क से अनाज को हटा दिया जाता है. इससे दुर्घटना की भी आशंका बनी रहती है. लोगों को भी इसके लिए जागरूक होना होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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