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इबादत, बरकत व इंसानियत का मुकद्दस महीना आज से शुरू, बाजारों में बढ़ी चहल-पहल

Updated at : 18 Feb 2026 6:41 PM (IST)
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इबादत, बरकत व इंसानियत का मुकद्दस महीना आज से शुरू, बाजारों में बढ़ी चहल-पहल

अच्छे आचरण को अपनाने का समय है रमजान

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सुपौल. इस्लाम धर्म का सबसे पाक और बरकतों से भरा महीना रमजान गुरुवार से शुरू होने जा रहा है. रमजान के आगमन की खबर के साथ ही शहर से लेकर आसपास के गांवों तक एक खास तरह की रौनक देखने को मिल रही है. यह महीना न सिर्फ रोजे और इबादत का है, बल्कि सब्र, संयम, नेकी और इंसानियत का पैगाम भी देता है. रमज़ान की तैयारियों में जुटे रोजेदारों ने बाजारों और गलियों को जीवंत बना दिया है. रमजान से पहले ही शहर के मुख्य बाज़ार, सब्ज़ी मंडी और चौक-चौराहों पर चहल-पहल बढ़ गई है. कपड़े, सेवई, खजूर, इत्र, टोपी और रोजमर्रा की जरूरतों की दुकानों पर लोग पहुंचने लगे हैं. सेवई, खजूर, चना, बेसन, ड्राई फ्रूट्स और फलों की मांग में अचानक इजाफा हो गया है. दुकानदारों का कहना है कि हर साल रमजान से पहले कारोबार में तेजी आ जाती है, जिससे छोटे व्यापारियों को भी खासा फायदा होता है. सजने लगा कपड़े का बाजार कपड़ा बाजार में भी रमजान की रौनक साफ दिखाई दे रही है. दुकानदारों ने पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा, टोपी और महिलाओं के लिए सूट-सलवार, दुपट्टा व बच्चों के नए कपड़ों का स्टॉक मंगाना शुरू कर दिया है. दर्जी की दुकानों पर भी ऑर्डर आने लगे हैं. व्यापारियों का कहना है कि लोग रमजान के शुरू होते ही ईद की तैयारियां भी शुरू कर देते हैं, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो. रमजान सिर्फ बाजारों की चहल-पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महीना आत्मिक शुद्धता और इबादत का भी है. मुस्लिम परिवार अपने घरों की साफ-सफाई में जुट जाते हैं और मस्जिदों को भी सजाया-संवारा जा रहा है. मस्जिदों में रंग-रोगन, लाइटिंग और सफाई का काम की जा रहा है. ताकि रमजान के दौरान तरावीह की नमाज शांत और पवित्र माहौल में अदा की जा सके. अच्छे आचरण को अपनाने का समय है रमजान मौलवियों और धर्मगुरुओं ने रमजान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महीना सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि अपने नफ्स पर काबू पाने, बुराइयों से दूर रहने और अच्छे आचरण को अपनाने का समय है. कहा कि रमज़ान में नमाज़, ज़कात, सदका और गरीबों की मदद पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इस महीने किए गए अच्छे कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है. सहरी और इफ्तार का भी विशेष महत्व है, जिसमें संयम और संतुलन बनाए रखने की सीख दी जाती है. प्रशासन की ओर से भी रमजान को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है. बिजली, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं. ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. खासकर इफ्तार के समय बाजारों और मस्जिदों के आसपास ट्रैफिक और भीड़ को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जा रहा है. कुल मिलाकर रमजान का महीना सुपौल में इबादत, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश लेकर आ रहा है. यह पाक महीना लोगों को न सिर्फ खुद को बेहतर इंसान बनाने की प्रेरणा देता है, बल्कि समाज में प्रेम, सहयोग और इंसानियत को मजबूत करने का भी अवसर प्रदान करता है.

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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