पेपरलेस रजिस्ट्री के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल, त्रिवेणीगंज में जमीन की रजिस्ट्री का काम प्रभावित

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पेपरलेस रजिस्ट्री के विरोध में कार्तिक व मुद्रांक विक्रेताओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल | Prabhat Khabar Network

त्रिवेणीगंज में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज़ लेखकों (कातिब) और मुद्रांक विक्रेताओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है. इस हड़ताल के कारण जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ रहा है, जिससे खासकर दूर-दराज के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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Supaul News: त्रिवेणीगंज सुपौल में जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए अवर निबंधन कार्यालय पहुंचे लोगों को इन दिनों बिना काम कराये ही लौटना पड़ रहा है. इसकी वजह है पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल. त्रिवेणीगंज अवर निबंधन कार्यालय के 38 लाइसेंसधारी कातिब यानी दस्तावेज लेखक और पांच मुद्रांक विक्रेता तीन अगस्त से हड़ताल पर हैं.

कातिब और मुद्रांक विक्रेताओं के काम बंद करने से जमीन की रजिस्ट्री समेत इससे जुड़े दूसरे काम भी प्रभावित हो रहे हैं. खासकर दूर-दराज के इलाकों से रजिस्ट्री कराने पहुंचने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई लोग कार्यालय पहुंचने के बाद बिना काम कराये वापस लौटने को मजबूर हैं.

पेपरलेस रजिस्ट्री से आजीविका पर संकट का दावा

हड़ताल पर बैठे कातिबों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से लागू की गयी पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर डालेगी.

कातिबों के अनुसार, वर्षों से दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में लोगों की मदद करने का काम करने वाले दस्तावेज लेखकों के सामने अब रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है.

उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से उनकी भूमिका सीमित हो जायेगी. यही वजह है कि वे नई व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं.

ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को परेशानी का तर्क

हड़ताल कर रहे कातिबों का एक बड़ा तर्क यह भी है कि पूरी तरह ऑनलाइन रजिस्ट्री की प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आसान नहीं होगी.

उनका कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो तकनीकी रूप से दक्ष नहीं हैं या ऑनलाइन प्रक्रिया को पूरी तरह समझने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं. खासकर कम पढ़े-लिखे और ग्रामीण इलाकों के लोगों को जमीन की रजिस्ट्री कराने में अतिरिक्त परेशानी हो सकती है.

कातिबों का दावा है कि दस्तावेज तैयार करने से लेकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया तक आम लोगों को जानकारी और सहयोग की जरूरत पड़ती है. ऐसे में उनकी भूमिका पूरी तरह समाप्त करना व्यावहारिक नहीं होगा.

मैन्युअल रजिस्ट्री व्यवस्था जारी रखने की मांग

हड़ताल कर रहे कातिब और मुद्रांक विक्रेता सरकार से मैन्युअल रजिस्ट्री व्यवस्था को जारी रखने की मांग कर रहे हैं.

इसके साथ ही वे अपनी आजीविका के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि तकनीक आधारित नई व्यवस्था लागू करने से पहले उनके रोजगार और भविष्य को लेकर सरकार को ठोस व्यवस्था करनी चाहिए.

कातिबों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी.

जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों की बढ़ी परेशानी

हड़ताल का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें जमीन की खरीद-बिक्री या उससे जुड़े दस्तावेजी काम के लिए अवर निबंधन कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है.

दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए एक दिन कार्यालय आने के बाद काम नहीं होना अतिरिक्त परेशानी का कारण बन रहा है. लोगों को समय और आने-जाने का खर्च दोनों वहन करना पड़ रहा है.

यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े लंबित मामलों की संख्या भी बढ़ सकती है. इसका असर उन लोगों पर अधिक पड़ सकता है, जिन्हें तय समय सीमा में दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करनी है.

मांग नहीं मानी तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी

कातिबों और मुद्रांक विक्रेताओं ने सरकार को आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को जिला और राज्य स्तर तक विस्तारित किया जायेगा.

इससे आने वाले दिनों में रजिस्ट्री व्यवस्था पर और दबाव बढ़ने की संभावना है.

Supaul News: कातिब और मुद्रांक विक्रेता हड़ताल में शामिल

हड़ताल में कातिब संघ के अध्यक्ष रामनंदन यादव के साथ लक्ष्मी यादव, सलेन्दर यादव उर्फ साधु यादव, विद्यानंद शाह, उमेश सरदार, अशोक शाह, सुशील शाह, दिगंबर चौधरी, नरेंद्र नारायण मलिक, भुवनेश्वर यादव, रामचंद्र पोद्दार, उमेश शाह, रामकुमार शाह, गोपाल ठाकुर और भूपेंद्र यादव समेत अन्य कातिब एवं मुद्रांक विक्रेता शामिल हैं.

फिलहाल त्रिवेणीगंज अवर निबंधन कार्यालय में पेपरलेस रजिस्ट्री को लेकर कातिबों का विरोध जारी है. एक तरफ सरकार डिजिटल और पेपरलेस व्यवस्था को आगे बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ कातिब और मुद्रांक विक्रेता अपनी आजीविका तथा आम लोगों की सुविधा का सवाल उठाकर पुरानी व्यवस्था जारी रखने की मांग कर रहे हैं. अब निगाह सरकार की ओर से होने वाली पहल पर है.

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दीपक कुमार

लेखक के बारे में

By दीपक कुमार

दीपक कुमार प्रिंट माध्यम में 10 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अपराध, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं. त्रिवेणीगंज (सुपौल) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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