सुपौल में ‘ज्ञान की खोज’: युवाओं ने ढूंढी 153 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियाँ, बौद्धिक विरासत बचाने की बड़ी पहल

Published by :Shruti Kumari
Published at :06 May 2026 9:58 AM (IST)
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सुपौल में ‘ज्ञान की खोज’: युवाओं ने ढूंढी 153 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियाँ, बौद्धिक विरासत बचाने की बड़ी पहल

प्रशासनिक टीम को पांडुलिपियाँ सौंपते युवक व शिक्षिका

जिलाधिकारी सावन कुमार के आह्वान पर जिले के युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों को खोज निकालने में बड़ी सफलता हासिल की है. इस अभियान को गति देते हुए संगीत शिक्षिका दीपिका चंद्रा और ‘माय भारत’ के पूर्व युवा वालंटियर इन्दल कुमार ने 20 महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की खोज की है

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सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट:

सुपौल. जिला प्रशासन की विशेष पहल और ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत शुरू हुआ बौद्धिक विरासत संरक्षण अभियान अब रंग लाने लगा है. जिलाधिकारी सावन कुमार के आह्वान पर जिले के युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों को खोज निकालने में बड़ी सफलता हासिल की है.

इस अभियान को गति देते हुए संगीत शिक्षिका दीपिका चंद्रा और ‘माय भारत’ के पूर्व युवा वालंटियर इन्दल कुमार ने 20 महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की खोज की है. ये अमूल्य दस्तावेज जिले के मलाढ़ निवासी कृपानंद झा और बिमलानंद झा के निजी संग्रह से प्राप्त हुए हैं. इन युवाओं के प्रयासों से जिले की सभ्यता, ज्ञान और पहचान से जुड़ी बौद्धिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है.

153 साल पुरानी है यह विरासत मिली जानकारी के अनुसार, खोजी गई ये पांडुलिपियाँ संस्कृत और मिथिलाक्षर लिपि में लिखी गई हैं, जिनकी उम्र लगभग 153 वर्ष से अधिक बताई जा रही है. ये मात्र कागज के दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि उस दौर की बौद्धिक समृद्धि, अद्वितीय लेखन कला और तकनीकी समझ का जीवंत प्रमाण हैं. इस अभियान का मुख्य लक्ष्य इन दुर्लभ धरोहरों को आधुनिक तकनीक से सुरक्षित करना है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली इतिहास से रूबरू हो सकें.

जिला प्रशासन ने की सराहना उप विकास आयुक्त सारा अशरफ ने युवाओं के इस साहसिक प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत है. उन्होंने अन्य युवाओं से भी इस मिशन से जुड़ने की अपील की है. वहीं, जिलाधिकारी सावन कुमार ने नागरिकों, विद्वानों, शिक्षकों और छात्रों से विशेष आग्रह किया है कि वे अपने पास मौजूद अप्रकाशित पांडुलिपियों को सामने लाएं. उन्होंने कहा कि मंदिरों, मठों, मस्जिदों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में छिपी इस विरासत को उजागर करना समय की मांग है.

प्रशासन ने घोषणा की है कि इस बौद्धिक विरासत संरक्षण अभियान में अहम योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को जिला स्तर पर सम्मानित भी किया जाएगा.

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