सुपौल के छातापुर में बाढ़ आश्रय स्थल बना था टेंट गोदाम, शिकायत पर प्रशासन ने खाली कराकर जड़ा ताला

कार्रवाई के दौरान मौजूद बीडीओ, सीओ व मुखिया | Prabhat Khabar Network
Supaul News: सुपौल के छातापुर में प्रशासन ने बाढ़ आश्रय स्थल पर अवैध कब्जा हटाकर उसे मुक्त कराया. भवन का निजी इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
Supaul News: सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड में प्रशासन ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए डहरिया पंचायत स्थित बाढ़ आश्रय स्थल भवन को अतिक्रमण से मुक्त करा दिया. बताया जा रहा है कि यह भवन लंबे समय से निजी उपयोग में लिया जा रहा था और उसमें टेंट सामग्री रखकर गोदाम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था. स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद प्रशासन मौके पर पहुंचा और भवन को खाली कराकर उस पर ताला जड़ दिया.
इस कार्रवाई के बाद इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली और प्रशासन की पहल की सराहना की. ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के समय उपयोग में आने वाले सार्वजनिक भवनों पर निजी कब्जा होना पूरे समुदाय के हित के खिलाफ है.
BDO और CO ने मौके पर पहुंचकर हटवाया अतिक्रमण
छातापुर प्रखंड के डहरिया पंचायत स्थित बाढ़ आश्रय स्थल पर शनिवार को बीडीओ डॉ. राकेश गुप्ता और सीओ रविराज कुमार संयुक्त रूप से पहुंचे. दोनों अधिकारियों की मौजूदगी में भवन के अंदर रखी टेंट सामग्री को बाहर निकलवाया गया और भवन को पूरी तरह खाली कराया गया.
प्रशासन ने भवन के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर उसे सुरक्षित कर दिया, ताकि भविष्य में दोबारा अवैध कब्जा न हो सके.
निजी गोदाम के रूप में हो रहा था इस्तेमाल
बीडीओ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि स्थानीय निवासी मुकुंद कुमार पांडेय उर्फ लिटिल टेंट व्यवसायी द्वारा बाढ़ आश्रय स्थल भवन का निजी उपयोग किया जा रहा था. भवन में टेंट और अन्य सामान रखकर उसे गोदाम बना लिया गया था.
उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से लगातार शिकायत मिल रही थी कि सामुदायिक उपयोग के लिए बने भवन का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. शिकायत की जांच के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करने का निर्णय लिया.
मुखिया को सौंपी गई भवन की जिम्मेदारी
कार्रवाई पूरी होने के बाद भवन के मुख्य द्वार में ताला जड़ दिया गया. इसकी चाबी डहरिया पंचायत के मुखिया संजीत कुमार चौधरी को सौंप दी गई है. प्रशासन ने उन्हें भवन के रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दी है.
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में भवन का उपयोग केवल सार्वजनिक और आपदा संबंधी जरूरतों के लिए ही हो.
आपदा के समय ऐसे भवनों की होती है बड़ी भूमिका
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बनाए गए आश्रय स्थल भवन संकट के समय लोगों के लिए सुरक्षित ठिकाने का काम करते हैं. ऐसे भवनों में राहत सामग्री, अस्थायी शिविर और बचाव कार्यों से जुड़ी व्यवस्थाएं संचालित की जाती हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे भवन निजी कब्जे में रहेंगे तो आपदा के समय प्रशासन को राहत कार्य चलाने में कठिनाई होगी. इसलिए अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई समय पर और जरूरी कदम माना जा रहा है.
Supaul News: प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
बीडीओ ने स्पष्ट कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए सामुदायिक भवनों का निजी उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध कब्जा करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में इस प्रकार का कोई मामला सामने आता है तो संबंधित अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ त्वरित और विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.
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लेखक के बारे में
By संजय कुमार पप्पू
संजय कुमार पप्पू प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अपराध, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं. छातापुर (सुपौल) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.
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