Bihar Teacher Transfer: बिहार के लाखों सरप्लस शिक्षकों को लेकर शिक्षा मंत्री का नया प्लान, कौन होते हैं ये टीचर, जानिए सबकुछ

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मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री

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Bihar Teacher Transfer: बिहार के सरप्लस शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के मुताबिक, राज्य के लाखों सरप्लस शिक्षकों को बाल बाटिका और आंगनबाड़ी केंद्रों में ट्रांसफर किया जाएगा. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री ने पूरी जानकारी दी.

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Bihar Teacher Transfer: बिहार सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में जरूरत से ज्यादा यानी सरप्लस शिक्षकों की नई तैनाती का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. अब ऐसे शिक्षकों को बाल वाटिका और आंगनबाड़ी केंद्रों में ट्रांसफर जाएगा. ताकि जहां शिक्षकों की कमी है वहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो.

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क्या कहना है शिक्षा मंत्री का?

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के मुताबिक, बिहार में करीब 1.06 लाख सरप्लस शिक्षक हैं. इनमें 65 हजार से अधिक शिक्षक प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं. दूसरी ओर अररिया, जमुई और पूर्णिया जैसे जिलों में अभी भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है. इसी असंतुलन को दूर करने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है.

सरकार का कहना है कि जिन स्कूलों में 30 बच्चों पर एक शिक्षक के तय मानक से अधिक शिक्षक हैं, वहां से अतिरिक्त शिक्षकों को फेज वाइज उन स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भेजा जाएगा, जहां उनकी जरूरत है. राज्य के करीब 10 हजार सरकारी विद्यालयों में पहले से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जबकि कई अन्य केंद्र भी इस योजना के दायरे में आएंगे.

मनचाहा मिलेगा शिक्षकों को ट्रांसफर

सबसे राहत वाली बात यह है कि तबादला पूरी तरह स्वैच्छिक होगा. केवल वही शिक्षक आवेदन करेंगे जो ट्रांसफर चाहते हैं. आवेदन के दौरान उन्हें कम से कम 30 विद्यालयों का विकल्प देना होगा और नियुक्ति उन्हीं विकल्पों में से किसी एक जगह पर की जाएगी. पुरुष शिक्षक अपने गृह प्रखंड के आसपास के प्रखंड चुन सकेंगे, जबकि महिला शिक्षकों को उनकी गृह पंचायत के निकट, उनकी पसंद के अनुसार स्थानांतरण का अवसर मिलेगा.

कौन हैं सरप्लस शिक्षक?

जानकारी के मुताबिक, जहां स्कूल के बच्चों की गिनती के हिसाब से जितने शिक्षक होने चाहिए, उससे ज्यादा शिक्षक मौजूद हों. RTE नियमों के अनुसार तय सीमा से ज्यादा शिक्षक होने पर उन्हें उस स्कूल के लिए 'सरप्लस' माना जाता है. समायोजन यानी कि ट्रांसफर के जरिए ऐसे शिक्षकों को सरकार उन स्कूलों में भेजती है जहां शिक्षकों की कमी होती है.

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