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लोकपर्व मधुश्रावणी को ले नवविवाहिताओं में उल्लास, गलियों में गूंजे पारंपरिक गीत

Updated at : 17 Jul 2025 5:53 PM (IST)
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लोकपर्व मधुश्रावणी को ले नवविवाहिताओं में उल्लास, गलियों में गूंजे पारंपरिक गीत

कथा के माध्यम से वैवाहिक जीवन की शिक्षा

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सुपौल. मिथिलांचल की सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक मधुश्रावणी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ आरंभ हो गया है. नवविवाहिताओं के लिए विशेष इस पर्व को लेकर गांव से लेकर शहर तक उत्सव जैसा माहौल है. नागपंचमी के अवसर पर शुरू हुआ यह पर्व 27 जुलाई को टेमी की परंपरा के साथ संपन्न होगा. यह लोकपर्व नवविवाहिताओं के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दौरान व्रती महिलाएं 13 दिनों तक एक समय संध्या भोजन कर भगवान शिव, माता गौरी एवं नागदेवता की आराधना करती हैं. मधुश्रावणी व्रत की सबसे खास बात है बासी फूल से पूजन की परंपरा. संध्या को नवविवाहिताएं पारंपरिक शृंगार कर फूल लोढ़ती हैं और अगले दिन उन्हीं फूलों से पूजन करती हैं. पूजन के लिए महिलाएं सखी-सहेलियों संग रंग-बिरंगे फूल और पत्तियों से सजे डलिया लेकर मंदिरों में जाती हैं. कथा के माध्यम से वैवाहिक जीवन की शिक्षा पूरे पर्व के दौरान महिला पंडित दैनिक कथा वाचन करती हैं, जिनमें नवविवाहिताओं को सफल और सुखद दांपत्य जीवन की शिक्षा दी जाती है. यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि संस्कार, परंपरा और महिला सशक्तिकरण का भी प्रतीक बन गया है. बगिया में गूंजने लगे लोकगीत सुपौल सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में गांव की बगिया पारंपरिक लोकगीतों और सामूहिक पूजन की गतिविधियों से गुलजार हो गई है. सजी-धजी नवविवाहिताएं सखियों के साथ गीत गाते हुए डलिया सजाकर उत्साह से भाग ले रही हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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