मनरेगा गरीबों के लिए वरदान, इसे खत्म करने की साजिश बर्दाश्त नहीं: रंजीत रंजन

मनरेगा योजना देश के गरीब और पिछड़े राज्यों के लिए किसी वरदान से कम नहीं रही है
सुपौल. देश के गरीब, मजदूर व ग्रामीण तबके को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2006 में कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को केंद्र सरकार द्वारा समाप्त करने का कुचक्र रचा जा रहा है. यह आरोप राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने रविवार को सुपौल स्थित अतिथि गृह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान लगाया. उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना देश के गरीब और पिछड़े राज्यों के लिए किसी वरदान से कम नहीं रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराकर पलायन पर रोक लगाना था. जिसमें यह योजना काफी हद तक सफल भी रही. उन्होंने कहा कि मनरेगा के माध्यम से करोड़ों परिवारों को साल में कम से कम 100 दिनों का रोजगार मिला. जिससे उनकी आजीविका सुरक्षित हुई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली. राज्यसभा सांसद ने आरोप लगाया कि वर्तमान केंद्र सरकार इस जनकल्याणकारी योजना को कमजोर करने के उद्देश्य से इसमें लगातार संशोधन ला रही है. उन्होंने कहा कि बजट में कटौती, भुगतान में देरी और नियमों में बदलाव कर मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां गरीब विरोधी हैं. रंजीत रंजन ने कहा कि जिस योजना ने महामारी और आर्थिक संकट के समय करोड़ों गरीब परिवारों को सहारा दिया. उसी योजना को समाप्त करने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा से संबंधित सभी संशोधनों को वापस लिया जाए और इस योजना को और अधिक मजबूत किया जाए, ताकि गरीबों और मजदूरों को इसका पूरा लाभ मिल सके. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा को कमजोर करने या समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से संसद तक आंदोलन करेगी. मौके पर जिलाध्यक्ष प्रो सूर्य नारायण मेहता, कांग्रेस नेता मिन्नत रहमानी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रो विमल यादव, कार्यकारी जिलाध्यक्ष राज नारायण गुप्ता, डॉ रमेश प्रसाद यादव, सूर्य नारायण यादव आदि मौजूद थे.
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