थमी नहीं कोसी की रफ्तार: तेजी से बढ़ रहा नदी का जलस्तर, सुपौल-मरौना समेत कई प्रखंडों के गांवों में बढ़ी बाढ़ की दहशत

Author Pintu Pranav|Edited by System
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थमी नहीं कोसी की रफ्तार: तेजी से बढ़ रहा नदी का जलस्तर, सुपौल-मरौना समेत कई प्रखंडों के गांवों में बढ़ी बाढ़ की दहशत

कोसी बराज

Kosi Barrage: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश का असर अब कोसी नदी पर साफ दिखने लगा है. बराहक्षेत्र में तेजी से बढ़ते जलप्रवाह के बीच कोसी बराज के सात फाटक खोल दिए गए हैं. तटबंध के भीतर रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है.

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वीरपुर (सुपौल) से प्रमोद कुमार की रिपोर्ट

Kosi Barrage: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण कोसी नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है. रविवार सुबह बराहक्षेत्र में जलप्रवाह में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद एहतियातन कोसी बराज के 56 में से सात फाटक खोल दिए गए. जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है. वहीं तटबंध के भीतर बसे गांवों के लोगों में संभावित बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ गई है.

बराहक्षेत्र में लगातार बढ़ रहा जलप्रवाह

कोसी बराज कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार रविवार सुबह 10 बजे कोसी नदी का जलप्रवाह 68,880 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि बराहक्षेत्र में जलप्रवाह बढ़कर 56,500 क्यूसेक पहुंच गया. सुबह 6 बजे यह 48,250 क्यूसेक था, जो सुबह 8 बजे 49,350 क्यूसेक और दो घंटे बाद 56,500 क्यूसेक तक पहुंच गया. लगातार बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए अधिकारियों ने स्थिति पर विशेष नजर बनाए रखी है.

एहतियातन खोले गए सात फाटक

Kosi Barrage: जलप्रवाह में बढ़ोतरी के बाद कोसी बराज के कुल 56 फाटकों में से सात फाटक खोल दिए गए हैं. जल संसाधन विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन नेपाल में लगातार हो रही बारिश के कारण आने वाले समय में जलस्तर और बढ़ सकता है. इसी वजह से बराज और नदी के जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है.

पहले भी बढ़ चुका है जलस्तर

गौरतलब है कि 22 जून को इस मानसून सीजन में पहली बार कोसी नदी का जलप्रवाह बढ़कर 1,86,385 क्यूसेक तक पहुंच गया था, जो इस वर्ष का अब तक का सर्वाधिक स्तर था. उस समय स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोसी बराज के 22 फाटक खोलने पड़े थे. हालात का जायजा लेने के लिए जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बराज का निरीक्षण भी किया था.

तटबंध के भीतर बसे गांवों में बढ़ी चिंता

यदि नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहा और कोसी का जलस्तर और बढ़ा, तो बसंतपुर, सरायगढ़, किशनपुर, मरौना और सुपौल प्रखंड के तटबंध के भीतर बसे कई गांव प्रभावित हो सकते हैं. इन इलाकों के लोगों को मवेशियों के रख-रखाव, चारे की व्यवस्था, आवागमन और दैनिक जरूरतों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. स्थानीय लोग प्रशासन से समय रहते आवश्यक तैयारी करने की मांग कर रहे हैं.

प्रशासन रख रहा है स्थिति पर नजर

जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने बताया कि कोसी नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है. प्रशासन ने तटबंध के भीतर रहने वाले लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और सरकारी सूचनाओं का पालन करने की अपील की है.

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पिंटू प्रणव

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