हरियाली की कमी व अत्यधिक ऊर्जा खपत से बढ़ने लगा तापमान

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हरियाली की कमी व अत्यधिक ऊर्जा खपत से बढ़ने लगा तापमान

सामान्य मौसम रहने वाले जिले में अचानक बढ़ी गर्मी

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-शहर की हर ऊंची इमारतों में लगा एसी – सामान्य मौसम रहने वाले जिले में अचानक बढ़ी गर्मी सुपौल. कोसी नदी के तट पर बसे शांत और हराभरा माने जाने वाला सुपौल जिला में गर्मी ने अपना तांडव दिखाना शुरू कर दिया है. बढ़ रही गर्मी से आम लोग सहित पशु-पक्षी भी परेशान हैं. तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो कि पिछले दस वर्षों की तुलना में 2 से 3 डिग्री अधिक है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती ऊर्जा खपत, हरियाली की कमी और शहरीकरण के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. कभी संतुलित मौसम के लिए प्रसिद्ध यह इलाका अब महानगरों की तरह गर्म शहरों की सूची में शामिल हो रहा है. तेजी से बढ़ रही बिजली की खपत बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता सौरभ कुमार के अनुसार वर्ष 2018-19 में जिले में प्रतिदिन औसतन 85 मेगावाट बिजली की खपत होती थी, जो अब बढ़कर 160 से 170 मेगावाट हो चुकी है. केवल शहर की बात करें तो यहां 11 से 14 मेगावाट बिजली प्रतिदिन खर्च हो रही है. गर्मी में एसी और कूलर के अत्यधिक उपयोग से यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जिले की कुल आबादी लगभग 23 लाख है, जिसमें करीब 8 लाख घर हैं. सरकारी, गैर-सरकारी कार्यालय, दुकानें, मॉल और छोटे उद्योग मिलाकर लगभग 30 हजार प्रतिष्ठान हैं. अनुमान के मुताबिक एक चौथाई घरों व कार्यालयों में एसी लगा हुआ है. इस वर्ष अब तक जिले में 2,000 से अधिक एसी बिक चुके हैं. शहर में हरियाली गायब, पेड़ों की कमी से बढ़ रही गर्मी कभी हरियाली के लिए प्रसिद्ध सुपौल जिले में अब सड़कों के किनारे और बाग-बगीचों की जगह बहुमंजिला इमारतों ने ले ली है. विशेषज्ञ बताते हैं कि पीपल, बड़ और नीम जैसे वृक्ष जो वातावरण की गर्मी को जैव ऊर्जा में बदलने की क्षमता रखते हैं, अब लगभग गायब हो चुके हैं. लोग अब ऐसे छायादार पेड़ लगाने से कतराते हैं, जबकि इन्हीं पेड़ों में प्राकृतिक तापमान को नियंत्रित करने की सबसे अधिक क्षमता होती है. प्राकृतिक समाधान की जरूरत जानकारों का मानना है कि तापमान में हो रही यह वृद्धि महज प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह मानवजनित कारणों का परिणाम है. अनियंत्रित शहरीकरण, बढ़ता ऊर्जा उपभोग और हरियाली की अनदेखी इसकी प्रमुख वजहें हैं. इस स्थिति से निपटने के लिए नगर परिषद और ग्राम पंचायतों को सड़कों के दोनों ओर छायादार पेड़ खासकर पीपल, बरगद और नीम लगाने की आवश्यकता है. साथ ही, जो पेड़ निर्माण कार्यों के कारण हटाए जा रहे हैं, उन्हें काटने की बजाय सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना चाहिए. कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ देवन कुमार चौधरी ने बताया कि गुरुवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया.

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राजीव कुमार झा

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार झा

राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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