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तीन दिवसीय गायत्री महायज्ञ में बताये गये युगशक्ति वेदमाता गायत्री के महत्व

Updated at : 11 Mar 2025 6:41 PM (IST)
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तीन दिवसीय गायत्री महायज्ञ में बताये गये युगशक्ति वेदमाता गायत्री के महत्व

गायत्री का मतलब प्राण होता है और प्राण को ही गायत्री कहते हैं.

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– 24 कुंडीय हवन यज्ञ में शामिल हुए दर्जनों दंपत्ति व श्रद्धालु छातापुर मुख्यालय स्थित हाइस्कूल चौक से दक्षिण पेट्रोल पंप के समीप आयोजित तीन दिवसीय गायत्री महायज्ञ व दीप महायज्ञ के दूसरे दिन हवन यज्ञ का आयोजन किया गया. पूर्वाह्नकाल आयोजित 24 कुंडीय हवन यज्ञ में दर्जनों दंपत्ति के अलावे कई श्रद्धालु सपरिवार शामिल हुए. शांतिकुंज हरिद्वार से आये विद्वानों की टोली के मंत्रोच्चारण के बीच विधि विधान पूर्वक हवन संपन्न कराया गया. इस दौरान यज्ञ प्रभारी के नेतृत्व में गायत्री परिवार के महिला पुरुष सदस्य हवन कार्य में सहयोग कर रहे थे. इस दौरान महायज्ञ स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा. प्रथम दिन संध्याकाल के प्रवचन में युगशक्ति वेदमाता गायत्री के महत्व को बताया गया. टोली नायक ओमप्रकाश जाटव ने इसे विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि गायत्री का मतलब प्राण होता है और प्राण को ही गायत्री कहते हैं. प्राण को ही ब्रह्मविद्या भी कहा जाता है. जीवन में गायत्री को पहले समझें फिर उसे अभ्यस्त करें. इससे जीवन सफल और सुंदर होगा. परिवार समाज व संसार भी अच्छा हो जायेगा. बताया कि गायत्री मंत्र दुर्बुद्धि को सदबुद्धि में परिवर्तित करती है. प्राण स्वरूप दुख नाशक सुख स्वरूप श्रेष्ठ, तेजस्वी पाप नाशक देव स्वरूप परमात्मा को अंतरात्मा में ग्रहण करना ही गायत्री है. वो परमात्मा हमारे बूद्धि को सदमार्ग में प्रेरित करती है. उन्होंने कहा कि परमपूज्य गुरूदेव का संकल्प है कि विश्व के छह अरब लोगों के दिमाग में जो विचार चल रहा है, उन विचारों में परिवर्तन करके नये युग का निर्माण करना है. इसलिए कहा गया है हम बदलेंगे युग बदलेगा हम सुधरेंगे युग सुधरेगा. इसी आधार पर हम गायत्री को अपने जीवन में अभ्यस्त करके प्रतिदिन कम से कम 20 मिनट तक सीधी कमर बैठकर उगते हुए सूर्य का ध्यान करें. फिर एक लोटा जल सूर्य को अर्पित करने से आत्मा की शक्ति बढे़गी. अर्थात आत्मा की शक्ति को ही गायत्री कहते हैं. मौके पर प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे. महायज्ञ स्थल पर विशालकाय पांडाल का निर्माण कर मंच व परिसर की आकर्षक सजावट की गई है. परिसर में वेदमाता गायत्री की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है. आगंतुक धर्मप्रेमियों के लिए भंडारा प्रसाद की भी व्यवस्था है. स्थल पर श्रद्धालुजनों की भीड़ से मेले सा नजारा बना हुआ है. टोली में शामिल गायक रमाशंकर कश्यप, तबला वादक शिवम, सारथी भुवनेश्वर ने भजन संगीत की प्रस्तुति दी. वहीं गायत्री परिवार व आयोजन कमेटी के सदस्य महायज्ञ के सफल संचालन के लिए तत्पर दिख रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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