गौरवशाली विरासत को मिला नया सम्मान : डीएम-एसपी ने गोसपुर पहुंच दुर्लभ पांडुलिपियों का किया अवलोकन

Published by : RAJEEV KUMAR JHA Updated At : 14 Jun 2026 6:01 PM

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अटल मिथिला सम्मान से सम्मानित मैथिल विद्वान आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने मिथिला की समृद्ध परंपरा के अनुरूप जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक का पाग, मिथिला पेंटिंग एवं पुष्पमाला से भव्य स्वागत किया

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– ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत सदियों पुरानी धरोहरों के संरक्षण की पहल को मिली सराहना – 600 वर्ष पुरानी ज्ञान-धरोहर, ‘कुवलयानंद’ और दुर्लभ ‘भृगुसंहिता’ ने खींचा देश का ध्यान – राघोपुर के गोसपुर गांव में मिली ऐतिहासिक पांडुलिपियां – डीएम और एसपी ने पहुंचकर किया अवलोकन सुपौल जिला प्रशासन की अपील और ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत सुपौल की ऐतिहासिक एवं बौद्धिक विरासत को खोजने और संरक्षित करने के अभियान के क्रम में जिलाधिकारी सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक शरथ आरएस तथा जिला संस्कृति पदाधिकारी तारकेश्वर पटेल अपनी टीम के साथ राघोपुर प्रखंड के गोसपुर गांव स्थित आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र के आवास पहुंचे. अधिकारियों ने वहां संरक्षित दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन कर इस अमूल्य धरोहर की जानकारी प्राप्त की. मिथिला परंपरा के अनुसार हुआ भव्य स्वागत अटल मिथिला सम्मान से सम्मानित मैथिल विद्वान आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने मिथिला की समृद्ध परंपरा के अनुरूप जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक का पाग, मिथिला पेंटिंग एवं पुष्पमाला से भव्य स्वागत किया. इस दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा की सराहना की. 10 दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज से बढ़ा जिले का गौरव आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने अपने अथक प्रयासों से 10 महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें संरक्षित किया है. ये पांडुलिपियां दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह के राजपंडित, व्याकरण, वेद, न्याय, मीमांसा एवं धर्मशास्त्र के प्रकांड विद्वान पंडित त्रिलोकनाथ मिश्र की समृद्ध ज्ञान परंपरा से जुड़ी हुई हैं. इन पांडुलिपियों को उनके वंशज पंडित शचींद्रनाथ मिश्र तथा आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने वर्षों से सहेजकर रखा है, जिससे यह अमूल्य धरोहर आज भी सुरक्षित है. 15वीं शताब्दी की पांडुलिपियां बनीं शोध का विषय विशेषज्ञों के अनुसार खोजी गई ये पांडुलिपियां संस्कृत और मिथिलाक्षर लिपि में लिखी गई हैं तथा इनकी आयु लगभग 500 वर्ष से अधिक आंकी जा रही है. ये केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि तत्कालीन समाज की बौद्धिक क्षमता, लेखन कला और ज्ञान-विज्ञान की उन्नत परंपरा का जीवंत प्रमाण हैं. पांडुलिपियों का अवलोकन करने के बाद जिलाधिकारी एवं अन्य अधिकारियों ने गोसपुर गांव की सराहना करते हुए कहा कि यह गांव वास्तव में आध्यात्मिकता और ज्ञान की परंपरा से समृद्ध है. अधिकारियों ने कहा कि अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को खोजने तथा संरक्षित करने की यह पहल अत्यंत प्रशंसनीय है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी. डीएम को भेंट की पुस्तक ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ इस अवसर पर आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने अपनी लिखित पुस्तक ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ जिलाधिकारी सावन कुमार को भेंट की. पुस्तक के विषय में चर्चा करते हुए कहा गया कि वर्तमान समाज में ऐसे वैचारिक एवं मूल्यपरक ग्रंथों की विशेष आवश्यकता है. आचार्य मिश्र ने यह भी कहा कि हस्तलिखित पांडुलिपियों को सार्वजनिक रूप से प्रकाश में लाना और उनका संरक्षण करना समय की मांग है. उन्होंने इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जिला संस्कृति पदाधिकारी तारकेश्वर पटेल को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. जिला प्रशासन करेगा सम्मानित जिले की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहरों को खोजने तथा संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र को जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई. इस निर्णय से क्षेत्र के विद्वानों और संस्कृति प्रेमियों में हर्ष का माहौल है. ज्ञान, संस्कृति और विरासत के संरक्षण की दिशा में गोसपुर की यह उपलब्धि न केवल सुपौल, बल्कि पूरे मिथिलांचल के लिए गर्व का विषय बन गई है.

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